ऑपरेशन 136 : पतित होती पत्रकारिता का काला चिट्‌ठा

कोबरापोस्ट की तहकीकात ‘ऑपरेशन स्टिंग’ में कई नामी-गिरामी मीडिया कंपनियों को पैसे के आगे निष्पक्ष पत्रकारिता से समझौता करते पाया

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दिल्ली विधानसभा चुनाव : यह आम आदमी पार्टी की अग्नि परीक्षा है

दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक और स्थिति पैदा हो सकती है कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीत जाती है. कांग्रेस

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मानदेय का अर्थशास्त्र नहीं बदला

बात नब्बे के दशक के शुरुआती वर्षों की है. उस व़क्त मैं अपने शहर जमालपुर से दिल्ली आया था. अख़बारों में लिखना-पढ़ना तो अपने शहर से ही शुरू कर चुका था. लिहाज़ा दिल्ली आने के बाद जब बोरिया-बिस्तर लगा और पढ़ाई शुरू हुई तो उसके साथ-साथ अख़बारों के दफ्तर में इस उम्मीद में चक्कर काटने लगा कि कोई असाइनमेंट मिले, ताकि घर से मिलने वाले पैसों के अलावा कुछ और पैसों का इंतज़ाम हो सके.

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किसका कितना हिस्सा ले गए प्रभाष जी

इंडिया टुडे का हिंदी संस्करण 1986 में शुरू हुआ था. शुरू में इसमें महज़ पांच लोग थे और उनमें से चार जनसत्ता से लिए गए थे. मैं भी उनमें एक था. हमें बताया गया था कि अरुण पुरी को जनसत्ता की हिंदी सबसे ज़्यादा पसंद है, इसलिए वे यहां काम करने वालों को तरजीह देते हैं. जिस दिन हमें छोड़ कर जाना था, उस दिन एक्सप्रेस बिल्डिंग में हमारे लिए विदाई कार्यक्रम रखा गया. उसमें कई लोग बोले. अंत में प्रभाष जी का भाषण हुआ. भाषण के बीच उन्होंने कहा, कुछ लोग हवा में उड़ने की इच्छा रखते हैं.

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