गांधी-नेहरू को ‘कचरा’ कह बुरे फंसे बीजेपी सांसद

रविवार को असम के बीजेपी सांसद कामाख्या प्रसाद तासा अपने बातों की वजह से विवादों में फंस गए हैं. प्रसाद

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मौजूदा स्थिति देश के लिए दुखद है

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नरेंद्र मोदी का समर्थन करने और विरोध करने वाली कुछ ताकतें हैं,

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कांग्रेस का एक और झांसा : आदिवासियों के लिए भी कमेटी का गठन

चुनावी वादे करके वोट बटोरने में कांग्रेस को महारत हासिल है. कांग्रेस ने अतीत में भी रंगनाथ मिश्रा आयोग और

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राह से भटकी अकादमियां

बिहार भोजपुरी अकादमी ने मशहूर लोकगायिका मालिनी अवस्थी को अंतराष्ट्रीय सांस्कृतिक राजदूत बनाने का ऐलान किया तो भोजपुरी भाषा और

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कश्मीरी झेल रहे हैं विभाजन का दंश

जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक भारत के सभी प्रधानमंत्री आपसी विवादों को हल कर पाकिस्तान से अच्छे

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लाल किले की प्राचीर से : वादाख़िलाफ़ी के दस साल

वैसे तो सामान्य परिस्थितियों में हमारे यहां प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा देश को संबोधित करने की परंपरा नहीं है. राष्ट्रीय

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जब तोप मुकाबिल हो : चीन पर भारत का रुख लचीला क्यों

हमारे देश के पिछले कुछ सेनाध्यक्षों ने बार-बार सरकार को चेताया था कि हमारे लिए वास्तविक ख़तरा पाकिस्तान नहीं, बल्कि

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जिन्हें भ्रष्ट व्यवस्था से स़ख्त नफरत थी

इंदु जी इंदु जी क्या हुआ आपको, सत्ता के नशे में भूल गईं बाप को…ऐसे थे नागार्जुन, जिन्होंने इंदिरा गांधी

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पश्चिम बंगाल उपचुनाव ममता को अल्टीमेटम

हावड़ा लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव ममता बनर्जी एवं उनकी पार्टी की आंखें खोलने के लिए काफी है, लेकिन अपनी लोकप्रियता

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विद्वान प्रधानमंत्री विफल प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.

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पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की

पत्रकारिता की संवैधानिक मान्यता नहीं है, लेकिन हमारे देश के लोग पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर संसद, नौकरशाही और न्यायपालिका से जुड़े लोगों से ज़्यादा भरोसा करते हैं. हमारे देश के लोग आज भी अ़खबारों और टेलीविजन की खबरों पर धार्मिक ग्रंथों के शब्दों की तरह विश्वास करते हैं.

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मदर इंडिया की जीवनी

भारतीय राजनेताओं में महात्मा गांधी के बाद इंदिरा गांधी लेखकों एवं राजनीतिक टिप्पणीकारों की पसंद हैं. उन पर प्रचुर मात्रा में लिखा गया और अब भी लिखा जा रहा है. महात्मा गांधी अपने विचारों को लेकर लेखकों को चुनौती देते हैं, वहीं इंदिरा गांधी अपनी राजनीति, अपने निर्णयों और उसके पीछे की वजहों से लेखकों के लिए अब भी चुनौती बनी हुई हैं.

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जीवनी नहीं, घटनाओं का कोलाज

मुझे प्रेम कथाओं के अलावा जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने का बेहद शौक है. मेरे मित्र भी अगर कोई नई बॉयोग्राफी पढ़ते हैं तो उसकी जानकारी मुझे देते हैं, साथ ही देश-विदेश के प्रकाशकों के ई-मेल से भी जानकारियां मिलती रहती हैं. जब भी जानकारी मिलती है, उस किताब को ख़रीद लेता हूं.

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क्या प्रियंका लक्ष्मण रेखा पार करेंगी

भूतपूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता स्वर्गीय इंदिरा गांधी का नाम आते ही ज़हन में एक ऐसी महिला की तस्वीर उभर आती है, जिसने कभी झुकना और हारना नहीं सीखा था. ताउम्र उनका विवादों से नाता रहा. देश में इमरजेंसी लगाने जैसा फैसला इंदिरा गांधी जैसी नेता ही ले सकती थीं, यह बात इमरजेंसी का विरोध करने वाले भी कहने से परहेज़ नहीं करते.

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