श्रीमती थैचर के निधन के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, उनसे जुड़ी यादों ने दर्द भी पहुंचाया. इंदिरा गांधी और उनमें समानताएं खोजी गईं. इंदिरा गांधी उनकी बहुत बड़ी प्रशंसक थीं. एक नेता के रूप में इन दोनों महिलाओं का अपने देश पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव रहा, लेकिन बहुत अलग [...]
Tags: इंदिरा गांधी, परमाणु विस्फोट, मजबूत नेता, मार्गरेट थैचर, मार्गरेट थैचर मिल्क स्नेचर, लोकतांत्रिक मानदंड Posted in राजनीति by Author: मेघनाद देसाई | No Comments » | Read More... |
महापुरुषों की ज़िंदगी एक रौशन चिराग़ की तरह होती है, जो दूसरों को रास्ता दिखाने का काम करता है. तभी तो हमारे देश में बचपन से ही बच्चों को महापुरुषों की कहानियां सुनाने की प्रथा रही है. लोककथाओं में भी महापुरुषों के अनेक क़िस्से होते हैं. इन क़िस्सों के ज़रिये नानी-दादी या घर की अन्य [...]
Tags: अंतरिम बजट, अभिजीत मुखर्जी, इंदिरा गांधी, कांग्रेस, किंकर मुखर्जी, केंद्रीय मंत्री, चुनाव, देश, बंगाल, मंत्रि मंडल, महापुरुषों, मिराती, राजनीति, राजीव गांधी, राज्यपाल, राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस, लोकसभा, वाणिज्य मंत्री, वित्तमंत्री, विदेश मंत्रालय, विदेश मंत्री, विधायक, स्वतंत्रता सेनानी Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
आज़ाद भारत के इतिहास में संजय गांधी ऐसे इकलौते राजनेता हैं, जिनके व्यक्तित्व और क्रियाकलापों के बारे में जानने की जिज्ञासा भारतीय जनमानस में अब भी है, लेकिन उनके बारे में ज़्यादा लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है, लिहाज़ा उनके बारे में सबसे ज़्यादा किंवदंतियां सुनी जाती रही हैं. संजय गांधी ख़ुद कहा करते थे कि [...]
Tags: अटल बिहारी वाजपेयी, अडिग, इंदिरा गांधी, इकलौते, इतिहास, उद्योग मंत्री, जार्ज फर्नांडिस, ज्योतिर्मय बोस, तत्कालीन मुख्यमंत्री, तुर्कमान गेट, निर्णयों, पत्र-पत्रिकाओं, बंसीलाल, भारत, भारतीय जनता पार्टी, युवा कांग्रेस, राज नारायण, राजनीतिक, राजनेता, विनोद मेहता, संजय गांधी, संसद, हरियाणा Posted in साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.
Tags: Bill, Congress leader, Decision, Indira Gandhi, Inflation, Lok Sabha, Manmohan Singh, Pranab Mukherjee, Prime Minister, Rajya Sabha, Sonia Gandhi, development, fraud, government, political, politics, polls, इंदिरा गांधी, कांग्रेस, घोटाला, चुनाव, नेता, प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री, फैसला, बिल, मनमोहन सिंह, महंगाई, राजनीति, राजनीतिक, राज्यसभा, लोकसभा, विकास, सरकार, सोनिया गांधी Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: डा. मनीष कुमार | 1 Comment » | Read More... |
भारतीय राजनेताओं में महात्मा गांधी के बाद इंदिरा गांधी लेखकों एवं राजनीतिक टिप्पणीकारों की पसंद हैं. उन पर प्रचुर मात्रा में लिखा गया और अब भी लिखा जा रहा है. महात्मा गांधी अपने विचारों को लेकर लेखकों को चुनौती देते हैं, वहीं इंदिरा गांधी अपनी राजनीति, अपने निर्णयों और उसके पीछे की वजहों से लेखकों के लिए अब भी चुनौती बनी हुई हैं.
Tags: Indira Gandhi, Katherine Frank, Mahatma Gandhi, Subject, political, इंदिरा गांधी, कैथरीन फ्रैंक, महात्मा गांधी, राजनीतिक, विषय Posted in जरुर पढें, मीडिया, राजनीति, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
मुझे प्रेम कथाओं के अलावा जीवनियां और आत्मकथाएं पढ़ने का बेहद शौक है. मेरे मित्र भी अगर कोई नई बॉयोग्राफी पढ़ते हैं तो उसकी जानकारी मुझे देते हैं, साथ ही देश-विदेश के प्रकाशकों के ई-मेल से भी जानकारियां मिलती रहती हैं. जब भी जानकारी मिलती है, उस किताब को ख़रीद लेता हूं.
Tags: Biographies, Indira Gandhi, Rahul Gandhi, Sonia Gandhi, publishers, आत्मकथाएं, इंदिरा गांधी, जीवनियां, प्रकाशक, राहुल गांधी, सोनिया गांधी Posted in जरुर पढें, मीडिया, राजनीति, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
भूतपूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता स्वर्गीय इंदिरा गांधी का नाम आते ही ज़हन में एक ऐसी महिला की तस्वीर उभर आती है, जिसने कभी झुकना और हारना नहीं सीखा था. ताउम्र उनका विवादों से नाता रहा. देश में इमरजेंसी लगाने जैसा फैसला इंदिरा गांधी जैसी नेता ही ले सकती थीं, यह बात इमरजेंसी का विरोध करने वाले भी कहने से परहेज़ नहीं करते.
Tags: Congress, Indira Gandhi, Politics, emergency, prime, इंदिरा गांधी, इमरजेंसी, कांग्रेस, प्रधानमंत्री, राजनीति Posted in चुनाव, जरुर पढें, राजनीति, राज्य, समाज by Author: अजय कुमार | 1 Comment » | Read More... |
बिहार में विधानसभा चुनावों के बाद मुख्य सत्ताधारी दल जनता दल(यू) को अनुशासन का बुखार च़ढा है. आनन-फानन में एक अनुशासन समिति बनाई गई और जैसी कि चर्चा है, तक़रीबन छह सौ कार्यकर्ताओं को इस बात पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया कि उन्होंने चुनाव में पार्टी विरोधी हरकत की है.
Tags: Bihar, Indira Gandhi, Janata Dal United, Leader, Nitish Kumar, political, polls, इंदिरा गांधी, चुनाव, जदयू, जनता दल(यू), नीतीश कुमार, नेता, बिहार, राजनीतिक Posted in जरुर पढें, राजनीति, राज्य by Author: प्रेम कुमार मणि | No Comments » | Read More... |
कांग्रेस ने दिल्ली के बुराड़ी में अपना दो दिवसीय 83वां अधिवेशन आयोजित किया. पार्टी के तमाम दिग्गज वहां जुटे और कांग्रेस ने महाअधिवेशन के दौरान ही अपने 125 साल पूरे होने के सालाना जलसे का समापन भी किया. इस मौक़े पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने दो खंडों में प्रकाशित किताब-कांग्रेस एंड द मेकिंग ऑफ द इंडियन नेशन का विमोचन किया.
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चौहत्तर में लिखी लाइनें, जिन्हें बुंदेलखंड के जनकवि राम गोपाल दीक्षित ने लिखा था, कौन चलेगा आज देश से भ्रष्टाचार मिटाने को, बर्बरता से लोहा लेने सत्ता से टकराने को, आज देख लें कौन रचाता मौत के संग सगाई है, उठो जवानों तुम्हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है, याद आती हैं. संयोग है कि उन दिनों सत्ता में इंदिरा गांधी थीं और उनके ख़िला़फ छात्र आंदोलन चल रहा था, जिसका मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार था. छात्र युवा उठ खड़े हुए, इंदिरा जी चुनाव हार गईं, लेकिन जो सत्ता में आए, न उसे संभाल सके और न जनता की आशाएं पूरा कर सके.
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आधुनिक भारत के निर्माण का आधार अंग्रेजों के उस कुतर्क में ढूंढा जा सकता है, जिसमें उन्होंने भारत को एक राष्ट्र मानने से इंकार कर दिया था. अंग्रेजों का दावा था कि भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रांतों, धर्मों, भाषाओं एवं जातियों का एक समूह है. पहले गोलमेज सम्मेलन में यह फैसला ले लिया गया कि भारत एक कमज़ोर केंद्र और ताक़तवर प्रांतों वाला राष्ट्र होगा.
Tags: Cabinet, India, Indira Gandhi, Manmohan Singh, Politics, Prime Minister, power, powerless, इंदिरा गांधी, कैबिनेट, प्रधानमंत्री, भारत, मनमोहन सिंह, राजनीति, शक्तिहीन, सत्ता Posted in कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, स्टोरी-6 by Author: मेघनाद देसाई | No Comments » | Read More... |
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व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है |
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