ख़ूबबसूरती किसे नहीं भाती. हर इंसान ख़ूबसूरती से प्यार करता है, चाहे वह तन की हो या फिर मन की. वह ख़ूबसूरत चीज़ों को देखना चाहता है. हम फूलों को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि वे बेहद ख़ूबसूरत होते हैं और हमें ख़ुशी देते हैं. इंसान ख़ुद को भी ख़ूबसूरत देखना चाहता है. इसलिए वह रंग-बिरंगी पोशाकें पहनता [...]
Tags: इंसान, कैलोरी, कॉस्मेटिक्स, ख़ूबबसूरती, खाद्य पदार्थ, जीवनशैली, डाइट, डायमंड बुक्स, नमिता जैन, प्यार, प्रोटीन, फल-सब्ज़ियां, मानसिक सेहत, मिनिरल्स, वज़न घटाने, वज़न नियंत्रण, वसा, व्यायाम, संपूर्ण भोजन Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
इंसान के बहुत से सपने होते हैं, ख्वाहिशें होती हैं, लेकिन जब उसके इंद्रधनुषी सपने और ख्वाहिशें पूरी नहीं हो पातीं, तो वह दुखी हो जाता है. उसे लगता है कि ज़िंदगी में अब कुछ नहीं बचा, सब कुछ ख़त्म हो चुका है. दरअसल, यहीं से उसके दुखों की शुरुआत होती है. उसे अपनी ज़िंदगी [...]
Tags: अहंकार, आत्मशक्ति, आत्मा, आनंद, इंसान, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, ऊर्जावान, गिरजाघरों, जीवंत, देवता, बंगाली संत, भारतीय उपमहाद्वीपों, मंदिर, मनुष्य, मस्जिद, महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, शंकराचार्य, संन्यासी, संसार, स्वामी राम, हिंदू धर्म, हिमालय संत, हिमालयन इंस्टीट्यूट Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments » | Read More... |
अगर आप आयरन लेडी इरोम शर्मिला को देखकर नहीं पिघलते और आपको शर्म नहीं आती, तो फिर आपको आत्म-निरीक्षण की ज़रूरत है, क्योंकि पिछले १२ वर्षों से अनशन कर रहीं शर्मिला अपने लिए नहीं, बल्कि आपके लिए लड़ रही हैं. आपके लिए, यानी उस समूची मानव जाति की गरिमा बचाने के लिए, जो आज हर [...]
Tags: अदालत, अनशन, आत्महत्या, आमरण अनशन, आर्म्ड फोर्सेस, इंसान, इरोम शर्मिला, जंतर-मंतर, ज़िंदगी से प्यार आयरन लेडी, जेल, दिल्ली, पटियाला हाउस, भारतीय दंड, भारतीय सेना, मणिपुर, महात्मा गांधी, मानव, मानव जाति, राजनीतिक नेताओं, राष्ट्रपिता, लोकतांत्रिक देश, विशेषाधिकार, शर्म, समाज, सरकार, सैन्य बल Posted in Crousel2, राजनीति, राज्य, स्टोरी-6 by Author: एस बिजेन सिंह | No Comments » | Read More... |
इंसान अपनी ज़िंदगी में क्या चाहता है, शायद वह ख़ुद भी नहीं जानता. ग़रीब दौलत चाहता है और अमीर सुकून के कुछ लम्हे. वह ख़ाली हाथ आता है और ख़ाली हाथ ही इस दुनिया से रुख्सत हो जाता है. वह कहां से आता है और कहां चला जा है, अमूमन दुनिया के सभी मज़हबों में इसका ज़िक्र किया गया [...]
Tags: अंतरराष्ट्रीय, आध्यात्मिक अंश, इंसान, ईश्वर, किताब, चुनाव, ज़िंदगी, जादू, डॉ. वेन डायर, तलाश, दुनिया, बदल, मज़हबों, मनुष्य, विचार, हिलेरी क्लिंटन Posted in साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
इंसान ही नहीं दुनिया की कोई भी नस्ल जल, जंगल और ज़मीन के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती. ये तीनों हमारे जीवन का आधार हैं. यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि उसने प्रकृति को विशेष महत्व दिया है. पहले जंगल पूज्य थे, श्रद्धेय थे. इसलिए उनकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए मंत्रों का सहारा लिया गया. मगर गुज़रते व़क्त के साथ जंगल से जु़डी भावनाएं और संवेदनाएं भी बदल गई हैं.
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इस बात से तो सभी वाक़ि़फ हैं कि कुत्ते इंसान से भी अधिक संवेदनशील होते हैं, लेकिन आप इस बात से वाक़ि़फ नहीं होंगे कि वे मानसिक रोग के भी शिकार हो जाते हैं. युद्ध प्रभावित इराक और अ़फग़ानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ तैनात कुत्ते युद्ध की भयावह यादों से संबंधित विकृति का शिकार हो रहे हैं.
Tags: Ahfghanistan, American, Army, Dog, human, अमेरिकी, अ़फग़ानिस्तान, इंसान, कुत्ते, सेना Posted in जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
सपने कभी नहीं मरने चाहिए, क्योंकि सपने ही इंसान को ज़िंदा रखते हैं. हम लोग ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं, जब देश में अच्छे भविष्य की कोई संभावना नज़र नहीं आ रही है. यह उद्गार प्रख्यात साहित्कार डॉ. नामवर सिंह ने एम आर मोरारका फाउंडेशन और प्रज्ञा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में बीते 19 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में आयोजित एक समारोह में प्रख्यात उद्यमी एवं समाजसेवी महावीर प्रसाद आर मोरारका की पुस्तक समाजवाद: एक अध्ययन का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए.
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कई जगह पढ़ने को मिल जाता है कि सुख और दुःख एक सिक्के के दो पहलू हैं. एक बार टीवी पर साई बाबा पर आधारित धारावाहिक आ रहा था. साई बाबा ने कहा कि सुख और दुःख इंसान के दो रिश्तेदार हैं. सुखों से इंसान ख़ुद रिश्तेदारी रखना चाहता है और उन्हें पाने के लिए हर उपाय करता है.
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अभी तक आपने जानवरों की बलि से जुड़ी कई घटनाओं के बारे में सुना होगा, लेकिन पेरू के पुरातत्वविदों की मानें तो एक ऐसी जगह भी है, जहां छठवीं शताब्दी में इंसानों की बलि दी जाती थी. इस जगह का नाम लैम्बेक है. यह पेरू के उत्तरी भाग में स्थित है.
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एलियंस के बारे में सभी जानते हैं. अगर आपसे कोई यह कहे कि एलियंस भी हमारे बीच में रहते हैं. मतलब यह कि इंसानों के वेश में घूमते-फिरते हैं तो शायद आप चौंक जाएं, लेकिन इस बात का खुलासा एक सर्वेक्षण में हुआ है. यह सर्वे न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स द्वारा पूरे विश्व में किया गया, जिसमें 20 फीसदी लोगों ने माना कि एलियंस हमारे बीच इंसानों की शक्ल में घूमते हैं.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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