भाई-भतीजे को जज बनाने वाली लिस्ट आखिरकार खारिज हुई : आईन के घर को आइना

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने जजों की नियुक्ति के लिए वकीलों की जो लिस्ट सुप्रीम कोर्ट

Read more

दिल्ली का बाबू : प्रशासन में राजनीति का दखल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन करके अधिकारियों के एक तबके की नाराजगी

Read more

उत्तर प्रदेश : अखिलेश सरकार को अदालत का झटका : सपा का खेल हो गया फेल

विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए अपने वादे पूरे करने की धुंध में समाजवादी पार्टी की सरकार सारे नियम-क़ानून ही

Read more

खा गए खाद्यान्न

बह दिन दूर नहीं, जब सरकार और न्यायिक व्यवस्था से ऊबे देश के आम लोग क़ानून को अपने हाथ में ले लें, सार्वजनिक हत्याएं शुरू हो जाएं और देश फिर से विखंडित हो जाए. ऐसी गंभीर आशंका जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शासनिक और न्यायिक व्यवस्था की कमज़ोर नब्ज़ पर हाथ रखकर देश की विस्फोटक हालत को जैसे रोशनी में ला दिया है. हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोकसेवकों पर अभियोजन चलाने की स्वीकृति न देकर सत्ता में बैठे नेता ही भ्रष्टाचार का पालन-पोषण करते हैं. सीबीआई या दूसरी कोई भी जांच एजेंसी जांच का काम पूरा करके भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं या अधिकारियों के ख़िला़फअभियोजन की स्वीकृति के लिए सरकार को दरख्वास्त देती है, लेकिन सरकार उसे दबाए बैठी रहती है. केंद्र का यह हाल है और राज्य सरकारों का भी यही हाल है. अभियोजन की स्वीकृति के सैकड़ों मामले लंबित पड़े हैं. उत्तर प्रदेश के खाद्यान्न घोटाले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को आड़े हाथों लेते हुए एक बड़ा सवाल देश के सामने खड़ा कर दिया है, लेकिन बहस इस पर नहीं हो रही. बहस बरगदी भ्रष्टाचार की शाखाओं पर है, पत्तियों पर है, लेकिन विस्तार लेती, गहरे समाती जाती जड़ पर नहीं है.

Read more

यह कांग्रेस के इम्तहान का समय है

चौहत्तर में लिखी लाइनें, जिन्हें बुंदेलखंड के जनकवि राम गोपाल दीक्षित ने लिखा था, कौन चलेगा आज देश से भ्रष्टाचार मिटाने को, बर्बरता से लोहा लेने सत्ता से टकराने को, आज देख लें कौन रचाता मौत के संग सगाई है, उठो जवानों तुम्हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है, याद आती हैं. संयोग है कि उन दिनों सत्ता में इंदिरा गांधी थीं और उनके ख़िला़फ छात्र आंदोलन चल रहा था, जिसका मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार था. छात्र युवा उठ खड़े हुए, इंदिरा जी चुनाव हार गईं, लेकिन जो सत्ता में आए, न उसे संभाल सके और न जनता की आशाएं पूरा कर सके.

Read more