एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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फैसले न लेने की कीमत

मनमोहन सिंह की बुनियादी समस्या यह है कि वह खुद फैसले नहीं लेना चाहते, लेकिन प्रधानमंत्री हैं तो फैसले तो लेने ही थे. जब उनके पास फाइलें जाने लगीं तो उन्होंने सोचा कि वह क्यों फैसले लें, इसलिए उन्होंने मंत्रियों का समूह बनाना शुरू किया, जिसे जीओएम (मंत्री समूह) कहा गया. सरकार ने जितने जीओएम बनाए, उनमें दो तिहाई से ज़्यादा के अध्यक्ष उन्होंने प्रणब मुखर्जी को बनाया.

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कोल इंडिया का चेयरमैन कौन बनेगा

कोल इंडिया के नए चेयरमैन की नियुक्ति का मामला गरमा गया है. पांच आईएएस अधिकारी यानी पर्यावरण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नंदिता चटर्जी, पर्यावरण सचिव आर के काहलोन, लालू यादव के पूर्व ओएसडी, राजस्थान के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीमत पांडेय और सिंगरेनी कोलियरी के प्रबंध निदेशक इस पद के लिए दौड़ में शामिल हैं.

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मिस्र : मार्शल तांतवी का तांडव

कहा जाता है कि क्रांति अपने पुत्रों को निगल जाती है. क्या मिस्र में कुछ ऐसा ही होने वाला है? जिन लोगों ने देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए अपना क़ीमती समय ख़र्च किया, संसाधन लगाए और होस्नी मुबारक को इस्ती़फा देने के लिए मजबूर किया, आज उन्हीं के साथ फिर से अन्याय किया जा रहा है.

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यह संसद के चेतने का समय है

संसद को चेतना होगा. देश की सारी संस्थाओं पर विशेषकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं. इन्हें सवालों के दायरे में आने से बचाना चाहिए, नहीं तो व्यवस्था पर विश्वास का संकट पैदा हो जाएगा. नए संकट के बादल दिखाई दे रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः तबादला और इस्ती़फा

करियर के बीच में नौकरी छोड़ देना आईएएस अधिकारियों के लिए कोई नई बात नहीं है. हाल के सालों में कई अधिकारी निजी क्षेत्र के मोहपाश में बंधकर सरकारी नौकरी से इस्ती़फा दे चुके हैं. लेकिन आश्चर्य तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ नौकरशाह ने बार-बार तबादलों से तंग आकर अपना इस्ती़फा सौंप दिया.

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माओवादी अपने सिद्धांतों से भटक रहे हैं

नेपाल असमंजस के दौर से गुज़र रहा है. 30 जून को माधव कुमार नेपाल द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्ती़फा दिए जाने के बाद से यह देश राजनीतिक नेतृत्व के अभाव का शिकार है. प्रतिनिधि सभा में छह-सात बार मतदान के बाद भी प्रधानमंत्री पद के दोनों उम्मीदवारों पुष्प कमल दहल प्रचंड और रामचंद्र पौडेल में से किसी को आवश्यक बहुमत हासिल नहीं हो पाया.

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दिल्‍ली का बाबूः उठो, जागो, काम करो

केंद्रीय सूचना आयोग तमाम कठिनाइयों के बावजूद लगातार पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है. जन शिक़ायतों के निराकरण में हो रही देरी से चिंतित आयोग ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह जन शिक़ायतों के निराकरण के लिए एक समय सीमा तय करने के लिए गाइड लाइन जारी करे.

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थरूर का इस्ती़फा कहानी का अंत नहीं है

भारतीय मीडिया में अब तक के सबसे अनोखे सोप ओपेरा एवं सनसनीखेज क्राइम थ्रिलर से अचंभित और रोमांचित हो रहे लोगों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्होंने शायद अगाथा क्रिस्टी की लिखी मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस नहीं पढ़ी. उन्होंने इसके फिल्मी रूपांतरण में अल्बर्ट फिनी और पीटर उस्तीनोव को हरक्यूल पॉयरट के किरदार में भी नहीं देखा है.

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अमिताभ को अपमानित मत करो

अमिताभ बच्चन को अभी और अपमान सहने पड़ सकते हैं. एक व्यक्ति के नाते उनकी व्यथा को कोई समझना नहीं चाहता. कोई से हमारा मतलब आम जनता से नहीं, बल्कि खास लोगों से है. ये खास लोग कांग्रेस से रिश्ता रखते हैं और किसी हद तक जा सकते हैं, क्योंकि इन्हें लगता है कि इनकी हरकतों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी खुश होकर इन्हें शाबाशी देंगे.

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