इंडिया इन ट्रांजिशनः भारत में कोयले की काली लकीर

यह समय सबसे अच्छा था, यह समय सबसे खराब था, यह युग समझदारी का था, यह युग ही बेवक़ूफ़ियों का था. कोयले की इस वर्तमान गतिशीलता की तुलना किसी षड्‌यंत्र और दो शहरों की कथा (ए टेल ऑफ़ टू सिटीज़) के झंझावात से नहीं की जा सकती.

Read more

इलियास की जगह उपेंद्र

उड़ीसा कैडर और 1985 बैच के आईएएस अधिकारी उपेंद्र प्रसाद सिंह को इस्पात मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है.

Read more

कोयले की तस्करी से 350 करोड़ की चपत

भिलाई इस्पात संयंत्र में काले हीरे की कालाबाज़ारी इस तरह चलती है कि प्रतिवर्ष अरबों रुपये का लेनदेन अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस के साथ मिलकर खुलेआम कर लिया जाता है. इस धंधे में लगे हुए ठेकेदार कहने को तो कोयले की बुहारन यानी शेष बचा हुआ कोयला बटोरते हैं, पर इसी के भरोसे छत्तीसगढ़ में एक नया कोल मा़फिया लंबे समय से सक्रिय है.

Read more

औद्योगिक विकास का अभिशाप भोगता बचपन

रायगढ़ की पहचान छत्तीसगढ़ राज्य के संपन्न औद्योगिक क्षेत्र के रूप में बनी हुई है. यहां इस्पात एवं लौह धातुकर्म उद्योग के साथ ऊर्जा उत्पादन की इकाइयों की स्थापना करने के बाद अब पूरे रायगढ़ ज़िले को ऊर्जा केन्द्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस शहर में औद्योगीकरण से उद्योगपतियों को करोड़ो रूपये की आय हो रही है, हज़ारों लोगों को काम मिला हुआ है और इस क्षेत्र का आर्थिक और भौतिक विकास भी हो रहा है, लेकिन इस विकास के वरदान के लाभ कम है, विकास का अभिशाप कहीं ज़्यादा है.

Read more