इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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स्टिंग ऑपरेशन का षड्यंत्र

अन्ना कोर कमेटी की बैठकों के बारे में ऐसी भ्रांतियां फैलाई जाती रही हैं कि वे बहुत गोपनीय होती हैं. इस संदर्भ में हाल में शमूम काज़मी की घटना का पूरा ब्यौरा इस प्रकार हैः-

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पेट में कार्बेज डंप

भारत में अजब-ग़ज़ब घटनाएं बहुत आम हैं. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में चिकित्सकों ने एक मरीज के पेट का ऑपरेशन कर छह किलो लोहा निकाला है, जिसमें ढेरों सिक्के, चाबियां और नट बोल्ट शामिल हैं. इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई.

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कमाल का डॉक्टर

आयरलैंड में 2007 में कॉर्क यूनिवर्सिटी के मैटरनिटी अस्पताल में पहली बार गायनेकोलॉजिकल सर्जरी में रोबोट का इस्तेमाल किया गया था. उसके नतीजों को देखकर अस्पताल ने ऑपरेशन में रोबोट का इस्तेमाल बढ़ा दिया है.

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सेना के शीर्ष अधिकारी सामने आए: फौज का इस्‍तेमाल न हो

पहले सेना ने और अब सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने सरकार की प्रस्तावित सेना तैनाती नीति को लेकर अपना विरोध प्रगट किया है. जो बात सरकार को समझनी चाहिए, उसे भारत की सेना सरकार को समझाने की कोशिश कर रही है कि विकास के काम में युद्ध स्तर की तेज़ी लाए और भ्रष्टाचार के दोषी सिविल पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों को मध्यकालिक सख्ती वाली सज़ा दिए बिना,

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ऑपरेशन ग्रीन हंट सफलता पर सवालिया निशान

काफी जद्दोजहद के बाद झारखंड में ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू हुआ. केंद्र सरकार के दिशानिर्देश पर सूबे में उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और नक्सलियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से यह अभियान जारी है.

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विकास का वादा बनाम विनाश का भय

बलूचिस्तान ऑपरेशन की शुरुआत तो ग्वाडोर परियोजना की घोषणा के साथ हुई थी, लेकिन इसकी बुनियाद रखी गई हत्या, अपहरण और दिल को दहला देने जैसी वारदातों के साथ. ग्वाडोर बंदरगाह की बात तो की गई, लेकिन वादा केवल वादा ही बनकर रह गया.

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कुछ और इनामी डकैतों से छुटकारा मिला

तराई क्षेत्र में आतंक का पर्याय रहे ददुआ और ठोकिया गिरोह की तरह ही छोटे-छोटे गिरोह द्वारा प्रदेश में आतंक फैलाने की होड़ मची हुई है. लेकिन पिछले कुछ समय से पुलिस कई ऑपरेशन के जरिए का़फी हद तक इनका खात्मा करने में कामयाब रही है. इसी क़डी में सतना पुलिस ने कई घंटे चली मुठभेड़ के बाद चार इनामी डकैतों को ढेर करने में सफलता हासिल की है.

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