हुंडई की एलीट आई -20

भारत की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंडई ने लोकप्रिय हैचबैक मॉडल एलीट आई-20 पेश कर दिया है. इस

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श्रम क़ानूनों में संशोधन मज़दूरों के ख़िलाफ़ है

श्रम क़ानूनों में किए जा रहे संशोधन से केंद्रीय ट्रेड यूनियनें मोदी सरकार से ख़ासी नाराज़ हैं. श्रमिक संगठनों का

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रिलायंस पर चला सरकार का चाबुक

निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी भारतीय कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम पर केंद्र सरकार ने केजी बेसिन से निर्धारित लक्ष्य से कम

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इंटेक्स की प्लेटिनम सीरीज

भारत की जानी-मानी कंपनी इंटेक्स टेक्नोलॉजी ने प्लेटिनम सीरीज के प्लेटिनम कर्व, प्लेटिनम मिनी एवं प्लेटिनम ए-6 फोन बाज़ार में

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गुपचुप शुरू आईपैड मिनी की बिक्री

एप्पल अपने किसी भी उत्पाद की बिक्री शुरू करने से पहले उसकी लॉन्चिंग करता है, लेकिन कंपनी ने इस बार

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होंडा का सीआर-वी का सस्ता अवतार

भारतीय बाज़ार में एक से बढ़कर एक शानदार कारों को पेश करने वाली जापान की प्रमुख कार निर्माता कंपनी होंडा

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जहाज से भी तेज दौड़ेगी बाइक

इसकी स्पीड, मशक्यूलर बॉडी, हवा को चीरती गड़गड़ाहट भरी आवाज़, इसे देखकर अच्छे-अच्छे के हौसले पस्त हो जाते हैं. जब

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राजनीति के नए सिद्धांत

भारत की राजनीति में नए सैद्धांतिक दर्शन हो रहे हैं. पता नहीं ये सैद्धांतिक दर्शन भविष्य में क्या गुल खिलाएंगे, पर इतना लगता है कि धुर राजनीतिक विरोधी भी एक साथ खड़े होने का रास्ता निकाल सकते हैं. लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में क्या अब ऐसी ही बहसें होंगी, जैसी इस सत्र में देखने को मिली हैं. मानना चाहिए कि ऐसा ही होगा. ऐसा मानने का आधार है. दरअसल, अब इस बात की चिंता नहीं है कि हिंदुस्तान में आम जनता का हित भी महत्वपूर्ण है.

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

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किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके हितों की रक्षा सरकारी तंत्र स्वयं ही कर देता है, मतलब यह कि किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती और उन्हें बिना शोर-शराबे के फायदा पहुंचा दिया जाता है.

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दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

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रॉबर्ट वाड्रा को आरोपों का सामना करना चाहिए

रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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खतरे में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र : चीनी घुसपैठ हो चुकी है

पूरी दुनिया टेलीकॉम क्षेत्र में भारत द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा कर रही है. भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है. लेकिन विरोधाभास यह है कि दूरसंचार मंत्रालय भी आज तक के सबसे बड़े घोटाले में शामिल है, जिसे टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का नाम दिया गया. एक लंबे समय तक दूरसंचार मंत्रालय ने बहुत से घनिष्ठ मित्र बनाए, जिन्होंने मनमाने तरीक़े से इस क्षेत्र का दोहन किया.

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मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-

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भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

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मारुति, मजदूर और तालाबंदी : कामगारों की अनदेखी महंगी पड़ेगी

मज़दूरों की गहमागहमी और मशीनों की घरघराहट से गुलज़ार रहने वाले मानेसर (गुड़गांव) के मारुति सुजुकी प्लांट में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है. प्लांट के भीतर मशीनें बंद हैं और काम ठप पड़ा है. पिछले महीने मारुति सुजुकी प्रबंधन और मज़दूरों के बीच हुए विवाद में कंपनी के एचआर हेड की मौत हो जाने के बाद हिंसा भड़क उठी. दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में कई दर्जन लोग घायल हो गए.

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राजस्‍थान में मौत का पुल

न जांच, न कोई बातचीत सबसे पहले क्लीनचिट. लगता है सरकार ने ग़रीबों की लाशों पर भी निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की नीति बना ली है. जब भी विवाद अमीर और ग़रीब के बीच का होता है, तो पूरी सत्ता अमीर के साथ खड़ी हो जाती है. ग़रीब मरते हैं तो सरकार को अ़फसोस नहीं होता. उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता. एक निर्माणाधीन पुल ताश के पत्तों की तरह गिर जाता है. सौ से ज़्यादा लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. जांच का आदेश दे दिया जाता है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही पुल बनाने वाली कंपनियों को देश के आलाधिकारी क्लीन चिट दे देते हैं.

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असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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दूध की कीमत का सवालः मुनाफे में कंपनियां घाटे में किसान

अनाज पैदा करने वाले किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते अक्सर देखा गया है, लेकिन ऐसा पहली मर्तबा हुआ, जब दूध की सही क़ीमत निर्धारित करने को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों एवं ग्वालों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन किया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ग्वाला गद्दी समिति एवं दूध उत्पादक किसानों की मांगों को जायज़ क़रार देते हुए टीम अन्ना ने भी इसका समर्थन किया.

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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

मध्य प्रदेश का कटनी ज़िला भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण बेशक़ीमती खनिज संपदा के प्रचुर भंडारण सहित जल संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अपने इस्पात उद्योगों हेतु आवश्यक गुणवत्ता पूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले चूना पत्थर (लाईम स्टोन) की खदानें यहां के ग्राम कुटेश्वर में स्थापित की गई थीं.

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अतिरिक्त धन का मायाचक्र

अब राष्ट्र के लिए महत्व की बात है-कि नई-नई कंपनियां खोलकर नए-नए काऱखाने या फैक्टरियां लगाई जाएं, उत्पादन बढ़ाया जाए, उसमें ही फालतू पड़े सब रुपयों का उपयोग होना चाहिए. मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये फालतू पड़े हैं. आप शेयर बाज़ार में किसी कंपनी के शेयर ख़रीदते हैं.

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काग़ज़ का जहाज़

बच्चे बचपन से ही काग़ज़ से कुछ न कुछ बनाने में लगे रहते हैं, कभी नाव तो कभी हवाई जहाज़. बचपन में काग़ज़ के हवाई जहाज़ बनाकर आसमान में हम सभी ने उड़ाए होंगे. न्यूयॉर्क की पीमा एयर एंड स्पेस म्यूजियम ने ऐसे ही काग़ज़ के 363 किलो वज़नी हवाई जहाज़ को आसमान में 4000 फीट ऊंचाई तक उड़ाने में कामयाबी पाई है.

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ओलंपिक, डाउ और खेल मंत्रालय

लंदन ओलंपिक की स्पांसर डाउ कंपनी को लेकर भारतीय खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक ओलंपिक आमने-सामने आ गए हैं.

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चुनार प्‍लांट से जेपी सीमेंट चादर का उत्‍पादन शुरू

जेपी समूह की इकाई जेपी सीमेंट चादर के चुनार प्लांट से भी उत्पादन शुरू हो गया है. इससे बिहार और झारखंड के उपभोक्ताओं को सहूलियत होगी. होटल मौर्या में कंपनी के विक्रेता सम्मेलन में इसकी जानकारी दी गई.

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बिजली बनाने का नायाब तरीक़ा

बिजली संकट से निजात पाने के लिए स्पेन में समुद्र की लहरों से बिजली बनाई जा रही है. हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी महंगी है, लेकिन कंपनी का कहना है कि तटीय इलाक़ों के लिए यह तकनीक अच्छी है.

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तेल कंपनियां या सरकारः देश कौन चला रहा है

यह कैसी सरकार है, जो जनता के खर्च को बढ़ा रही है और जीवन स्तर को गिरा रही है. वैसे दावा तो यह ठीक विपरीत करती है. वित्त मंत्री कहते हैं कि सरकार अपनी नीतियों के ज़रिए नागरिकों की कॉस्ट ऑफ लिविंग को घटाना और जीवन स्तर को ऊंचा करना चाहती है.

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मध्‍य प्रदेशः वेलस्‍पन कंपनी का कारनामा- देश में कितने और सिंगुर बनेंगे

विकास के नाम पर आ़खिर कब तक किसानों और मज़दूरों को उनके हक़ से वंचित किया जाएगा? सेज, नंदीग्राम, सिंगुर, जैतापुर, फेहरिस्त लंबी है और लगातार लंबी होती जा रही है. इसी क़डी में एक और नाम जु़ड गया है वेलस्पन का. मध्य प्रदेश के कटनी ज़िले में वेलस्पन कंपनी के प्रस्तावित पावर प्लांट की स्थापना हेतु ज़िले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसीलों के गांव बुजबुजा व डोकरिया के किसानों की लगभग 237.22 हेक्टेयर भूमि का शासन द्वारा अधिग्रहण किए जाने की खबर है.

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यह कैसा गिफ्ट

कंपनी का कहना है कि इस तरह के इनाम अब नहीं दिए जाते. दुनिया की सबसे बड़ी बीमा कंपनियों में से एक ने अपने सबसे क़ाबिल एजेंटों को इनाम में यौनकर्मी की सेवाएं दी थीं. म्यूनिख़ आरई दुनिया की सबसे बड़ी पुनर्बीमा-यानी बीमा कंपनियों का बीमा करने वाली कंपनी है. इस कंपनी की एक इकाई आर्गो ने बीबीसी को बताया कि सबसे अच्छा काम करने वाले बीमा विक्रय एजेंटों के लिए ये पार्टी 2007 में रखी गई थी.

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