सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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सीवर सफाईकर्मी : पेट की खातिर मौत से पंजा लड़ाने की मजबूरी

सीचिपियाना (ग़ाज़ियाबाद) निवासी फुट सिंह वाल्मीकि ऐसे पिता हैं, जिनके पांच जवान बेटों की मौत सीवर की स़फाई करते समय हो गई. सबकी उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच थी. फुट सिंह की पांच विधवा बहुए हैं. इसी तरह 40 वर्षीय तारी़फ सिंह सीवर स़फाई का काम करते थे. वह घर से काम पर निकले थे. शाम को घर पर खबर आई कि तारी़फ सिंह की काम के दौरान हालत बिगड़ गई है, वह अस्पताल में हैं.

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आपके सवाल हमारे सुझाव

मेरी पंचायत संत नगर की हर एक योजना में धांधली है. सरकारी पदाधिकारी, पंचायत सचिव एवं मुखिया की मिलीभगत से यह सब चल रहा है. आरटीआई का इस्तेमाल करने पर भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

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लोकपाल के नाम पर धोखाः कहां गया संसद का सेंस ऑफ हाउस

इस बार दिल्ली की जगह मुंबई में अन्ना का अनशन होगा. जंतर-मंतर और रामलीला मैदान से गिरफ्तारियां दी जाएंगी. इसकी घोषणा टीम अन्ना ने कर दी है. आख़िरकार, वही हुआ, जिसकी आशंका चौथी दुनिया लगातार ज़ाहिर कर रहा था. अगस्त का अनशन ख़त्म होते ही चौथी दुनिया ने बताया था कि देश की जनता के साथ धोखा हुआ है.

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मिर्जापुर : अवैध नियुक्तियों के जरिये करोड़ों की चपत

उत्तर प्रदेश में दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या ने पूरे देश का ध्यान स्वास्थ्य विभाग में हो रही लूट की ओर खींचा है. इस विभाग में घोटालों की संस्कृति इतनी व्यापक है कि अन्य विभागों के प्रभावशाली लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए.

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मनरेगा : सरकारी धन की बंदरबाट

नक्सलवाद, भौगोलिक स्थिति और पिछड़ापन आदि वे कारण हैं, जो विंध्याचल मंडल को प्रदेश के विकसित हिस्सों से अलग करते हैं. मंडल के तीन ज़िलों में से एक भदोही को विकसित कहा जा सकता है, किंतु कालीन उद्योग में आई मंदी ने जनपद की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं की कमी

देश में नौकरशाहों की कमी सरकार के लिए चिंता का विषय है. इसके अलावा वन प्रबंधन और डाटा संग्रह विभाग में अधिकारियों की कमी है. वन्यजीव संरक्षण के लिए कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है. इसके बावजूद इस कमी को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है. पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, वन्यजीव महकमे में कम से कम 40 फीसदी पद रिक्त हैं.

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सिगरेट और सैलरी

सुनने में अजीब है, मगर सच है. धूम्रपान छोड़िए और पाइए 10 प्रतिशत ज़्यादा वेतन. कर्मचारियों की धूम्रपान की आदत छुड़ाने के लिए बंगलुरू की एक कंपनी ने यह नया तरीक़ा निकाला है. कंपनी ने कहा है, जो कर्मचारी धूम्रपान करते हैं, यदि वे इस आदत को छोड़ देते हैं तो उनकी बेसिक सैलरी में 10 प्रतिशत वृद्धि कर दी जाएगी.

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रेलवे भर्ती में छत्तीसगढि़यों की उपेक्षा

रेलवे में कर्मचारियों की भर्ती और विवादों के बीच चोली-दामन जैसा रिश्ता है, इसलिए कोई भी भर्ती बिना विवाद पूरी नहीं हो पा रही है. दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे में चार साल पहले गैंगमैन के 3016 पदों पर भर्तियां की गई थीं, जिसमें 4500 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था.

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किस जज ने कितना लूटा

घोटालेबाज़ कर्मचारियों को संरक्षण देने और उन्हें बचाने में ग़ाज़ियाबाद के तत्कालीन ज़िला जज आर एस चौबे का नाम सबसे अव्वल है. न्यायाधीश स्तर के ऊंचे अधिकारी और घोटाला करने वाले सामान्य स्तर के कर्मचारी आशुतोष अस्थाना की मिलीभगत के तमाम काग़ज़ी प्रमाण पुलिस को भी मिले और सीबीआई को भी.

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निलंबित शिक्षणेत्तर कर्मचारीः नीतीश जी, विरोध की सजा निलंबन नहीं है

आखिर यह कैसी सरकार है, जो अपने ही कर्मचारियों के खिला़फ अदालत का दरवाज़ा खटखटाती है. आंदोलन करने पर उन्हें निलंबित कर देती है. विरोध करने पर डंडा चलवाती है. शायद ये सुशासन में होने वाले नए-नए प्रयोग हैं. इसी प्रयोग का ताज़ा परिणाम तब दिखा, जब पटना, भागलपुर, जय प्रकाश और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के 15 सौ से ज़्यादा कर्मचारियों को एक साथ निलंबित कर दिया गया.

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ज़िंदा कर्मचारी रिकॉर्ड में मुर्दा

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक अजीबोग़रीब कारनामा कर लोगों को चौंका दिया है. हो सकता है, इस ख़बर को पढ़कर आप भी चौंक जाएं. बीएमसी ने अपने एक कर्मचारी को ज़िंदा रहते हुए मृत घोषित कर दिया. इससे वह कर्मचारी भी स्तब्ध है.

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छत देने के नाम पर छीनी जा रही खुशी

साहूकारों, सूदखोरों तथा जमींदारों द्वारा आर्थिक शोषण की बात तो होती ही रहती है, लेकिन सरकार द्वारा शोषण हो तो समझ में नहीं आता है. आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाना सरकार का दायित्व है. मगर, आवास के नाम पर केंद्र सरकार का उर्वरक मंत्रालय सैकड़ों लोगों का पिछले सात वर्षों से लगातार आर्थिक शोषण कर रहा है.

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वार्ड पार्षद मस्त, गयावासी पस्त

कहा जाता है कि रोम जल रहा था और वहां का शासक नीरो अपनी धुन की बंसी बजाने में मस्त था. कुछ ऐसा हो रहा है गया शहर में. एक ओर शहरवासी इस गर्मी में बिजली पानी के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गया नगर निगम के वार्ड पार्षद और वहां के पदाधिकारी एक दूसरे से अहं की लड़ाई ल़ड रहे हैं.

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नौकरशाहों की लोकतंत्र में आस्था नहीं

देश के आला अफसरों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है. नौकरशाह मनमाने ढंग से प्रशासन चलाना चाहते हैं और चला भी रहे हैं. संवैधानिक बाध्यता के कारण विधानसभा एवं मंत्री परिषद आदि संस्थाओं की कार्यवाही में वे औपचारिकता ही पूरी करते हैं.

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अफसरों ने सरकार को 2342 करोड़ रुपयों का चूना लगाया

जिन अफसरों और कर्मचारियों पर सरकारी करों और सेवाओं के शुल्क की वसूली का दायित्व है, वे किस लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदारी से काम करते हैं, इसका खुलासा भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में किया गया है.

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सार-संक्षेप

मध्य प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फे्रंडली नीति कितनी बोगस है, इसका पता इसी से चलता है कि लघु और मध्यम उद्योगों को बैंकों से ऋृण उपलब्ध कराने में राज्य सरकार का वित्त निगम सफल नहीं हो पा रहा है. जानकारी के अनुसार, राज्य में वित्त निगम द्वारा 337 उद्योगों के लिए 230 करोड़ रुपये का ऋृण स्वीकृत किया गया था, लेकिन उद्योगों को केवल 161 करोड़ रुपये ही मिल सके.

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भ्रष्टाचार के महासागर की छोटी मछलियों का शिकार

मध्य प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार से हो रही बदनामी से त्रस्त होकर प्रशासन को सा़फ-सुथरी छवि देने का अभियान चला रखा है. पिछले दिनों राज्य भर में साठ से अधिक छोटे कर्मचारी दंडित किए जा चुके हैं. अब तक पुलिस आरक्षक, पटवारी, कार्यालयों के बाबू एवं वनरक्षक जैसे छोटे कर्मचारी रिश्वत लेते या जबरन उगाही करते पकड़े गए और उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया.

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इमामगंज में नक्‍सलियों का शासन चलता है

झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया ज़िले का इमामगंज विधान सभा क्षेत्र पूरी तरह से नक्सलियों की जद में है. यहां के लोग प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के प्रभाव क्षेत्र में हैं. सुशासन का दावा करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश यहां पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहा है. वहीं दूसरी ओर नक्सलियों के किसी भी फरमान को यहां के लोग सर आंखों पर ले लेते हैं. सच कहें, तो नक्सलियों ने बिहार के महत्वपूर्ण विधान सभा क्षेत्र माने जाने वाले इमामगंज में सुशासन की हवा निकाल कर रख दी है. वे रात तो रात, दिन के उजाले में भी जो चाहते हैं, करते हैं.

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