देर से मिले न्याय का कोई अर्थ नहीं

जस्टिस डिलेड, जस्टिस डिनाइड, यानी देर से मिले न्याय का कोई अर्थ नहीं रह जाता. प्रस्तावित सिटीजन चार्टर बिल के

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चांदन डैम पर किसका हक़- जल और ज़मीन की जंग लड़ रहे हैं किसान

किसानों और आदिवासियों को उनके जल, जंगल एवं ज़मीन से बेदख़ल करने के लिए राजनेता और पूंजीपति वर्ग जिस तरह

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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नया भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के खिलाफ साजिश

भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में भी पेश नहीं हो सका. यह विधेयक कब पेश होगा और देश के करोड़ों किसानों की परेशानियां कब खत्म होंगी, यह कोई नहीं बता सकता. मौजूदा समय में देश के अंदर जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन चल रहे हैं. अब नंदीग्राम, सिंगुर, भट्टा पारसौल, नगड़ी, जैतापुर और कुडनकुलम जैसे हालात कई राज्यों में पैदा हो गए हैं.

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भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास व पुनर्स्‍थापन अधिनियम (संशोधन) 2011 : नई हांडी में पुरानी खिचड़ी

नए भूमि अधिग्रहण क़ानून को लेकर देश भर की निगाहें संसद और केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं. जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलित कई राज्यों में सैकड़ों ग़रीब किसानों एवं आदिवासियों को पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा. उनका दोष स़िर्फ इतना था कि वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पुश्तैनी ज़मीन देने के लिए तैयार नहीं थे. ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 बनाया था.

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स्कूलों से हिसाब मांगें

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया. इस क़ानून ने आम आदमी को सत्ता में बैठे ताक़तवर लोगों से सवाल पूछने की ताक़त दी. व्यवस्था में लगे दशकों पुराने ज़ंग को छुड़ाने में मदद की.

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बजट- 2012 देश पर गंभीर आर्थिक संकट

सोलह मार्च को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बजट पेश करेंगे. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद पेश किए जा रहे इस बजट की रूपरेखा पर हाल में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के घर पर एक मीटिंग हुई. दो घंटे के बाद मीडिया को स़िर्फ इतना बताया गया कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया जाएगा, लेकिन इस मीटिंग के बाद जितने भी नेता मुखर्जी के घर से बाहर निकल रहे थे, उनके चेहरे से पता चल रहा था कि आगे क्या होने वाला है.

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स्त्रियों की मज़दूरी का मूल्यांकन

फिर कल-काऱखानों के चल निकलने के कारण स्त्री कामगारों की संख्या बढ़ी, लेकिन बाज़ार में इनकी मज़दूरी का भाव पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्तर का ही रहा. मालिकों की दलील यह थी कि यदि हमें मज़दूरों की ज़रूरत ही हो तो हम पुरुषों को ही क्यों न रखें और फिर सस्ती दर में औरतें काम करने के लिए राज़ी भी तो हैं. उनके इस उत्तर में सुदृढ़ तर्क का अभाव भले हो, इसने स्त्रियों को मज़दूरी की आवश्यकता के कारण सस्ती दर पर काम करने के लिए बाध्य कर दिया.

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आरटीआई और तीसरा पक्ष

पिछले दो अंकों से हम लगातार आपको उन बिंदुओं के बारे में बता रहे हैं, जो सूचना के प्रकटीकरण में बाधा बनते हैं. अभी तक हमने आपको बताया कि कैसे न्यायालय की अवमानना और संसदीय विशेषाधिकार के नाम पर लोक सूचना अधिकारी सूचना न देने के लिए हज़ारों बहाने बनाते हैं और सूचना अधिकार क़ानून की धारा 8 का ग़लत इस्तेमाल करते हैं.

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संसदीय विशेषाधिकार और आरटीआई के बीच क्या संबंध है

सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने वाले आवेदकों ने तीसरे पक्ष और न्यायालय की अवमानना जैसे शब्दों का कई बार सामना किया होगा, क्योंकि इन्हीं शब्दों की आड़ में कई बार सूचना देने से मना कर दिया जाता है.

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सूचना ग़लत मिले तो शिकायत करें

पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था. आइए, इस अंक में हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि सूचना का अधिकार क़ानून के तहत शिक़ायत क्या होती है, आख़िर अपील और शिकायत में क्या फर्क़ है.

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कांग्रेस-भाजपा का कम्युनल कार्ड

उमा भारती कहती हैं कि मुस्लिम आरक्षण इस देश के बंटवारे का रास्ता तय करेगा. मुस्लिम आरक्षण की बात करके कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति कर रही है. ऐसा करके कांग्रेस ने संविधान, क़ानून एवं मर्यादा का उल्लंघन किया है. मुस्लिम आरक्षण इस्लाम के बुनियादी उसूलों के ख़िलाफ़ है, क्योंकि मुस्लिम समाज में जाति प्रथा नहीं है.

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सरकारी दस्तावेज़ या कार्य का निरीक्षण करें

आरटीआई क़ानून में कई प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था है. निरीक्षण का मतलब है कि आप किसी भी सरकारी विभाग की फाइल, किसी भी विभाग द्वारा कराए गए काम का निरीक्षण कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आपके क्षेत्र में कोई सड़क बनाई गई है और आप उसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री से संतुष्ट नहीं हैं या सड़क की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं तो आप निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

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सरकारी लोकपाल बिल : यह अंधा क़ानून है

पांच जून, 1975 को पटना के गांधी मैदान में लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि इस संसद को आग लगा दो. अगले दिन अ़खबारों ने उनके इसी वाक्य को इस समाचार का शीर्षक बनाया. लालू यादव उस व़क्त छात्रनेता थे, युवा थे और जयप्रकाश जी के आंदोलन के महत्वपूर्ण आंदोलनकारी थे. 29 दिसंबर, 2011 को लालू यादव सचमुच संसद को आग लगाने का काम कर रहे थे.

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अन्ना और लोकपाल

पिछले अप्रैल महीने से सिविल सोसाइटी की एक टीम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है. संसद में भी इस आंदोलन के पक्ष-विपक्ष में बहस हो रही है. सरकार की परेशानी बढ़ गई है. यह एक अलग तरह का आंदोलन है.

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पूंजी की निर्धारित सीमा

पूंजी संपत्ति पूंजीवाद का मूल स्तंभ है. इसे मिटाना ही होगा. इस श्रेणी में प्रधानत: दो ही संपत्तियों का समावेश होता है- (1) ज़मीन जायदाद, (2) पूंजी. भारत सरकार ने जबसे समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपना ध्येय घोषित किया है, प्रथम कक्षा के लिए कई संशोधन हुए हैं, नए क़ानून बने हैं.

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सूचना मिलने के बाद क्या करें

सूचना अधिकार क़ानून के इस्तेमाल और सूचना मिलने के बाद एक आवेदक को समझदारी से क़दम उठाना चाहिए, ताकि उसे किसी प्रकार की दिक्कत न हो, साथ ही उसका काम भी हो जाए. कभी-कभी आवेदक को आरटीआई का इस्तेमाल करने पर धमकी भी मिलती है या उसे फर्ज़ी मामले में फंसा दिया जाता है.

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राष्ट्रीय शहरी सड़क विक्रेता नीति 2009 : सिर्फ़ क़ानून बनाने से काम नहीं चलेगा

पिछले कई वर्षों से फुटपाथों, पार्कों और सब-वे जैसे सार्वजनिक स्थलों पर सामान बेचने वाले विक्रेताओं की पहुंच सही उपभोक्ताओं तक न हो पाने का मामला दुनिया भर के बड़े शहरों में विवादग्रस्त बन गया है.

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वनों में प्रकाश की किरण

भारत में वनों पर निर्भर 250 मिलियन लोग दमनकारी साम्राज्यवादी वन संबंधी क़ानूनों के जारी रहने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भारी अन्याय के शिकार होते रहे हैं और ये लोग देश में सबसे अधिक ग़रीब भी हैं. वन्य समुदायों के सशक्तीकरण के लिए पिछले 15 वर्षों में भारत में दो ऐतिहासिक क़ानून पारित किए गए हैं.

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आपका हथियार सूचना का अधिकार

इस क़ानून से जु़डी सूचनाएं हम आपको लगातार देते रहते हैं. इस अंक में हम चर्चा कर रहे हैं इस क़ानून के उस पक्ष की, जिससे आमतौर पर ज़्यादातर आवेदकों का वास्ता प़डता है. ऐसी खबरें भी आई हैं कि किसी आवेदक को सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने पर धमकी मिली या जेल में ठूंस दिया गया या फर्ज़ी केस में फंसा दिया गया.

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अन्ना का तीसरा अनशन : कांग्रेस की रणनीति का जवाब है

अन्ना का आंदोलन अब अपने आख़िरी पड़ाव पर आता दिख रहा है. दो स्थितियां बनती हैं. पहली यह कि सरकार अगर एक मज़बूत जन लोकपाल क़ानून लेकर आती है तो अन्ना का आंदोलन फिजल आउट कर जाएगा.

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चौंसठ साल बनाम छह साल

अक्टूबर, 2005. इसी दिन सूचना का अधिकार क़ानून लागू हुआ था. क़ानून तो बन गया, लेकिन इस क़ानून को लेकर जनता और सरकार में तू डाल-डाल, मैं पात-पात का खेल जो शुरू हुआ, वह अब तक चल रहा है.

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बिहार सरकार के सुशासन का सच

नीतीश कुमार की पहली सरकार को का़फी अच्छे अंक मिले, लेकिन अब पैमाना बदला है. एनडीए के लाख चाहने के बावजूद जनता नीतीश सरकार की दूसरी पारी की तुलना लालू-राबड़ी के शासनकाल से नहीं, बल्कि इस सरकार की पहली पारी से करने लगी है. खासकर, क़ानून व्यवस्था और सड़क के मामले में पिछड़ती दिखती सरकार को लोग ध्यान से देख रहे हैं.

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राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्‍ट के बिना यह प्रजातंत्र अधुरा है

अन्ना हजारे मूल बातें कहते हैं, इसलिए बड़े-बड़े विद्वान उनसे बहस नहीं कर सकते. सांसद सेवक हैं और देश की जनता मालिक है. अगर सेवक मालिक की बात न माने तो मालिक को यह हक़ है कि वह उसे बाहर कर दे. यही दलील अन्ना हजारे की है. देश को भ्रष्ट सांसदों से छुटकारा दिलाने के लिए राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्ट की मांग लेकर अन्ना हजारे और उनकी टीम आंदोलन करने वाली है.

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आरटीआई के रक्षक या कुछ और…

सूचना क़ानून को लागू हुए 6 साल हो गए और इस बीच इसने कई उतार-चढ़ाव देखे. संशोधन की मार से बचते हुए भी इस क़ानून पर पीआईओ (लोक सूचना अधिकारियों) और सूचना आयुक्तों की टेढ़ी नज़र से गुजरना पड़ा.

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