अनगिनत फाइलें खुलवाने वाले की फाइल बंद

सतीश शेट्टी का नाम आपको याद है? अगर नहीं याद है, तो इसमें आपकी गलती भी नहीं है. इतने बड़े

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

अन्ना हजारे कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए उड़ीसा दौरे पर गए. उनकी अगवानी करने के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर हज़ारों लोग मौजूद थे, जो अन्ना हजारे जिंदाबाद, भ्रष्टाचार हटाओ और उड़ीसा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के नारे लगा रहे थे. अन्ना ने कहा कि हमारा काम बहुत बड़ा है और किसी को भी खुद प्रसिद्धि पाने के लिए यह काम नहीं करना है.

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षडयंत्र के साये में भाजपा

भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को समझे बिना आने वाले समय में क्या होगा, इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. भारतीय जनता पार्टी संसद में प्रमुख विपक्षी पार्टी है और कई राज्यों में उसकी सरकारें हैं. इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी, जो 2014 के चुनाव में दिल्ली की गद्दी पर दांव लगाने वाली है, इस समय सबसे ज़्यादा परेशान दिखाई दे रही है. यशवंत सिन्हा, गुरुमूर्ति, अरुण जेटली, नरेंद्र मोदी एवं लालकृष्ण आडवाणी के साथ सुरेश सोनी ऐसे नाम हैं, जो केवल नाम नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय जनता पार्टी में चल रहे अवरोधों, गतिरोधों, अंतर्विरोधों और भारतीय जनता पार्टी पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करने वाली तोपों के नाम हैं.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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यह जनता की जीत थी

संजय सिंह अन्ना के सहयोगी हैं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अहम कार्यकर्ता भी. 26 अगस्त को जब दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं और आम जनता की भिड़ंत हुई, तब उसके कई दिनों बाद पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई सहयोगियों के खिला़फ मामले दर्ज किए. गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है.

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देश को विजेता का इंतजार है

अगस्त का महीना भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा. सरकार, विपक्ष, अन्ना हजारे और बाबा रामदेव इस महीने के मुख्य पात्र थे. एक पांचवां पात्र भी था, जिसका ज़िक्र हम बाद में करेंगे. इन चार पात्रों ने अपनी भूमिका ब़खूबी निभाई. सरकार और विपक्ष ने अपनी पीठ ठोंकी, दूसरी ओर अन्ना और रामदेव ने अपने आंदोलन को सफल कहा. हक़ीक़त यह है कि ये चारों ही न हारे हैं, न जीते हैं, बल्कि एक अंधेरी भूलभुलैया में घुस गए हैं.

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अन्‍ना की हार या जीत

अन्ना हजारे ने जैसे ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की, वैसे ही लगा कि बहुत सारे लोगों की एक अतृप्त इच्छा पूरी नहीं हुई. इसकी वजह से मीडिया के एक बहुत बड़े हिस्से और राजनीतिक दलों में एक भूचाल सा आ गया. मीडिया में कहा जाने लगा, एक आंदोलन की मौत. सोलह महीने का आंदोलन, जो राजनीति में बदल गया. हम क्रांति चाहते थे, राजनीति नहीं जैसी बातें देश के सामने मज़बूती के साथ लाई जाने लगीं.

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आडवाणी जी, कार्यकर्ता आपकी राह देख रहे हैं

आडवाणी जी को धन्यवाद देना चाहिए कि आखिर उनकी समझ में आ गया कि देश की जनता उनकी पार्टी से खुश नहीं है. उन्हें शायद यह भी समझ में आ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी अपने नेतृत्व से खुश नहीं हैं. इस नेतृत्व की परिभाषा क्या है?

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भाजपा विपक्ष नहीं है

यह इस देश का दुर्भाग्य है कि भारतीय जनता पार्टी देश की मुख्य विपक्षी पार्टी है. आपसी फूट, अविश्वास, षड्‌यंत्र, अनुशासनहीनता, ऊर्जाहीनता, बिखराव और कार्यकर्ताओं में घनघोर निराशा के बीच उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में हार का सामना और अलग-अलग राज्यों के पार्टी संगठन में विद्रोह, वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की यही फितरत बन गई है.

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आरटीआई का इस्तेमाल ऐसे करें

हमारे पास पाठकों के ऐसे कई पत्र आए, जिनमें बताया गया कि आरटीआई के इस्तेमाल के बाद किस तरह उन्हें परेशान किया गया या झूठे मुक़दमे में फंसाकर उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया. यह एक गंभीर मामला है और आरटीआई क़ानून के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद से ही इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.

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साक्षात्‍कारः बड़े ढांचे में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का चलना मुश्किल

83 वर्षीय सच्चिदानंद सिन्हा एक समाजवादी कार्यकर्ता, चिंतक एवं लेखक हैं. उस दौर में जब समाजवादी विचारधारा महानगरों एवं चर्चाओं तक सीमित रह गई हो, तब सच्चिदानंद बाबू की न स़िर्फ लेखनी, बल्कि उनकी जीवनशैली भी समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करती नज़र आती है.

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कांग्रेस को सबक़ लेनी चाहिए

कांग्रेस को सीख लेनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस सीख लेगी, इसमें संदेह है. क्योंकि उत्तर प्रदेश में इतनी करारी हार के बाद भी उत्तराखंड में कांग्रेस ने राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचय दिया. उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत महत्वपूर्ण नाम है. वहां कांग्रेस को ज़िंदा रखने में हरीश रावत का बहुत बड़ा योगदान रहा है. पूर्व में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला, लेकिन जब मुख्यमंत्री बनाने का व़क्तआया तो नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बना दिया गया.

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बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी.

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दिल्‍ली का बाबूः सूचना आयोग के बाबू

आरटीआई कार्यकर्ताओं को हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि अधिकारियों को ही सूचना आयुक्त क्यों बनाया जाता रहा है. 2005 में केंद्रीय सूचना आयोग का गठन किया गया, लेकिन उस समय से देखा जाए तो कई सूचना आयुक्त यहां तक कि मुख्य सूचना आयुक्त भी सिविल सेवा के अधिकारी रहे हैं.

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दावों और वायदों का कारोबार

एक राजनीतिक अनुमान के हिसाब से मध्यावधि चुनाव भी दूर नहीं है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने यात्राओं की योजनाएं इस तरह बनाईं कि वह उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय हो सके और देश भर में कार्यकर्ताओं के बीच एक संदेश जा सके, पर भाजपा इसमें कितनी सफल हुई है, इसका आकलन तो उसे ही करना होगा.

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केरलः टिकट बंटवारे पर कांग्रेस में बवाल

केरल में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की स़िफारिश पर 25 युवा कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर बवाल मच गया है. टिकट की दावेदारी जता रहे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बग़ावत कर दी है.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्‍य

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी- देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं.

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सच के सिपाही को धमकी

सवाल पूछना जनता का अधिकार है और यह अधिकार संविधान देता है, लेकिन सवाल पूछना कभी-कभी कितना तकलीफदेह हो सकता है, यह पिछले साल हुईं आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्याओं से साफ पता चलता है. कार्यकर्ताओं की हत्या, परेशान करने और धमकी देने के मामले तो लगभग हर महीने सामने आते रहते हैं.

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भाजपा का सम्‍मान जदयू का अपमान

बिहार की जनता ने जदयू-भाजपा गठबंधन को भारी बहुमत से सत्ता की चाबी सौंपी तो देश-दुनिया के लोगों ने सूबे के लोगों की राजनीतिक चेतना की तारी़फ की. कहा गया कि लोगों ने बिहार की ज़रूरत को समझा और विकास के लिए जातिपात से ऊपर उठकर एकजुट होकर मतदान किया.

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मेरी आवाज सुनो

अभी कुछ दिन पहले ही बिहार के एक प्रमुख दैनिक समाचारपत्र ने अपने पहले पन्ने पर दो तस्वीरें छापीं. पहली तस्वीर उस मौक़े की थी, जब नीतीश कुमार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी पी ठाकुर के निवास पर नाश्ते के लिए गए थे और दूसरी तस्वीर नवादा में कांग्रेस के सम्मेलन में हुई कथित मारपीट की थी.

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गडकरी जी, अध्‍यक्ष की तरह दिखिए

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता का कद किसी उद्योगपति की पत्नी से छोटा हो गया है? भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी आईपीएल के मुंबई और चंडीगढ़ की टीम के मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मौजूद थे. मंच पर और भी लोग थे. जो सबसे प्रमुख अवार्ड था, उसे मिसेज मुकेश अंबानी के हाथों दिया गया और गडकरी के हाथों एक छोटा अवार्ड दिलाया गया.

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