जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी… यानी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है. जन्म स्थान या अपने देश को मातृभूमि कहा जाता है. भारत और नेपाल में भूमि को मां के रूप में माना जाता है. यूरोपीय देशों में मातृभूमि को पितृ भूमि कहते हैं. दुनिया के कई देशों में मातृ भूमि को गृह भूमि भी कहा जाता है. इंसान ही नहीं, पशु-पक्षियों और पशुओं को भी अपनी जगह से प्यार होता है, फिर इंसान की तो बात ही क्या है.

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मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरी महबूब न मांग

फैज़ अहमद फैज़ अपनी क्रांतिकारी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं. नोबेल पुरस्कार के लिए नामित फैज़ अहमद फैज़ पर साम्यवादी होने और इस्लाम के उसूलों के खिला़फ लिखने के भी आरोप लगते रहे. उनका जन्म 11 फरवरी, 1911 को पाकिस्तान के स्यालकोट शहर में हुआ था.

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डुमरांवः शहीदों के परिजन चाय बेच रहे हैं

आज़ाद हिंदुस्तान का ख्वाब लिए हज़ारों क्रांतिकारी सपूत आज़ादी की जंग में खुशी-खुशी शहीद हो गए. इन्हीं में शामिल हैं डुमरांव के चार ऐसे शहीद, जिन्होंने गोरों की गोलियां खाकर अपने खून से आजादी की नई इबारत लिखी. इनकी शहादत पर यहां के लोगों को गर्व है, लेकिन दुभार्र्ग्य यह है कि आज़ाद देश की सरकार इन शहीदों की कुर्बानी को पूरी तरह से भूल गई है.

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स्वतंत्रता सेनानी : आजादी के बाद हक की लड़ाई

ॠषिकेश की घटना है. एक दिन सड़क के किनारे एक महिला की लाश मिली. लाश आधी सड़ चुकी थी. लोग लाश को देखकर नाक बंद कर बगल से गुज़र जा रहे थे. किसी ने पुलिस को ख़बर दी. पुलिस आई और लाश को ले गई. इस लाश का क्या हुआ यह पता नहीं लेकिन ये लाश किसकी है, यह पता करने में पुलिस को एक महीने से ज़्यादा का व़क्त लग गया. पता चला कि ये लाश बीना भौमिक की है. आज शायद ही किसी को मालूम हो कि बीना भौमिक कौन है. यह नाम उस लड़की का है जिसे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अग्नि कन्या के नाम से जाना जाता था. इस लड़की ने ही 1932 में कोलकाता यूनिवर्सिटी में बीए के कोनवोकेशन के दौरान गवर्नर स्टेनली जैक्सन पर जानलेवा हमला किया था. स्टेनली तो बच गया लेकिन इस घटना से पूरे देश में तहलका मच गया था कि एक लड़की ने गवर्नर पर हमला कर दिया. पहली बार लोगों को लगा कि नौजवानों के साथ-साथ लड़कियां भी स्वतंत्रता संग्राम में अपने साहस का परिचय दे रही हैं. गवर्नर पर हमला करने के लिए बीना भौमिक को 9 साल की सज़ा हुई. जेल से निकलने के बाद वह क्रांतिकारी बन गई.

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आज़ादी का संघर्ष और समाजवादी

समाजवादी आंदोलन की शुरुआत भारत और दुनिया में एक अर्थ में बहुत पहले हो जाती है. वह अर्थ है अनासक्ति का, मिलकियत और ऐसी चीज़ों के प्रति लगाव ख़त्म करने या कम करने का, मोह घटाने का. जबसे समाजवाद के ऊपर कार्ल मार्क्स की छाप बहुत पड़ी, तबसे एक दूसरा अर्थ सामने आ गया.

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क्रांतिकारियों का पहला धमाका

22 जून, 1897 को रैंड को मौत के घाट उतार कर भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्रथम क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून, 1869 को पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत चाफेकर के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ था. उनके दो छोटे भाई क्रमशः बालकृष्ण चाफेकर एवं वासुदेव चाफेकर थे.

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लीडर भी बनेंगी लीडर पैदा भी करेंगी

भारतीय मुस्लिम महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी हो या नहीं, इस प्रश्न पर मौलाना हज़रात ने फिर राजनीति शुरू कर दी है. प्रश्न यह नहीं कि धर्मगुरुओं ने पहली बार महिलाओं के मौलिक अधिकारों एवं भारतीय संविधान के अधिकारों की अनदेखी की है, बल्कि शायद हमारे मौलाना हज़रात इसे अपना पहला कर्तव्य समझते हैं कि महिलाओं को मूल धारा से न जुड़ने दिया जाए, जैसा कि कुछ राजनीतिक दल इसका उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं.

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शहीद स्थल बाज़ारू संस्कृति की भेंट चढ़ा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सीवान के अनेक युवा क्रांतिकारी शहीद हुए थे. उन्होंने आने वाली पी़ढी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. लेकिन, विडंबना देखिए कि उन वीर सपूतों के बलिदान को भुला कर उनके स्मारकों को बाज़ारू संस्कृति की भेंट चढ़ा दिया गया. इस काम को अंजाम दिया है सीवान नगरपालिका ने. उसने शहीद सराय परिसर को मार्केट कांप्लेक्स में तब्दील कर दिया है, जहां कई शहीदों के स्मारक हैं.

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