जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

मध्य प्रदेश का कटनी ज़िला भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण बेशक़ीमती खनिज संपदा के प्रचुर भंडारण सहित जल संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अपने इस्पात उद्योगों हेतु आवश्यक गुणवत्ता पूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले चूना पत्थर (लाईम स्टोन) की खदानें यहां के ग्राम कुटेश्वर में स्थापित की गई थीं.

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मध्‍य प्रदेशः अवैध खनन और राजनीति का अटूट गठजोड़

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की भीतरी और बाहरी राजनीति से जुड़ा घटनाचक्र एकाएक काफी तेजी से घूमने लगा है. भाजपा के सत्ता में रहते हुए कटनी एवं जबलपुर ज़िलों के अंतर्गत भूगर्भ में मौजूद बॉक्साइड, मार्बल, आयरन और अन्य विभिन्न बेशक़ीमती खनिज संपदा का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है.

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बुंदेलखंडः फटती धरती, कांपते लोग

बुंदेलखंड में बेतरतीब ढंग से खनन और भूजल दोहन के चलते ख़तरे की घंटी बज चुकी है. हमीरपुर में सबसे अधिक 41 हज़ार 779 हेक्टेयर मीटर प्रतिवर्ष भूजल दोहन हो रहा है. महोबा, ललितपुर एवं चित्रकूट में खनन मा़फ़िया नियम-क़ायदों को तिलांजलि देकर पहाड़ के पहाड़ समतल भूमि में बदल रहे हैं.

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टाटा स्टील और झारखंड सरकार की लूट

झारखंड खनिज संपदा से भरा पड़ा है. फिर भी वहां ग़रीबी है, नक्सलवाद है, बेरोज़गारी है और भुखमरी भी. बावजूद इसके कि इस राज्य में टाटा से लेकर मित्तल ग्रुप तक का अरबों का व्यापारिक साम्राज्य कायम है. समृद्धि की कौन कहे, ज़्यादातर वाशिंदों को दो व़क्त की रोटी भी मयस्सर नहीं. वजह यह कि अरबपति औद्योगिक घराने इनकी हक़मारी कर रहे हैं, अपनी जेबें भरने की खातिर इन ग़रीबों के पेट पर लात मार रहे हैं

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झारखंड: रेल परियोजनाओं की कछुआ चाल

खनिज संसाधनों के मामले में देश के सबसे धनी सूबे झारखंड में शायद ही ऐसी कोई योजना है, जो समय पर पूरी हुई हो. एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाने वाली योजनाएं 3 से लेकर 5 साल तक खिंच जाती हैं. योजना के लिए प्राक्कलित राशि भी दोगुनी से तीन गुनी हो जाती है. राजनीतिक अस्थिरता, सुस्त एवं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी, असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप और शासन में इच्छाशक्ति का अभाव जैसे कारण इस समस्या के मूल में हैं.

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भ्रष्‍टाचार के अंधेरे से मुक्ति कब मिलेगी?

जिस तरह तकनीकों के देश जापान में सर्वाधिक भूचाल आता है, उसी प्रकार खनिजों के राज्य झारखंड में सर्वाधिक राजनीतिक जलजला आता है. इसीलिए यह सूबा निरंतर सियासी अस्थिरता का दंश झेल रहा है. राज्य गठन के 10 साल के अंदर यह तीसरा राष्ट्रपति शासन है.

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अपनी ही खनिज संपदा से बेखबर है सरकार

देश सरकार अपनी अमूल्य खनिज संपदा से इतनी बे़खबर है कि उसके पास जानकारी ही नहीं है कि राज्य के किस क्षेत्र में कहां और कितना खनिज भूगर्भ में मौजूद है, लेकिन राज्य का खनिज माफिया सरकार से ज़्यादा बा़खबर और जागरूक है. इसीलिए उसे मालूम है कि किस क्षेत्र से किस खनिज की कितनी चोरी आसानी से की जा सकती है.

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सरकारी संरक्षण में चल रहा है अवैध खनन

मध्य प्रदेश की खनिज सम्पदा पर लगातार डकैती डालने का सिलसिला जारी है. देश भर के खनिज मा़फिया से संबंधित व्यक्ति इन दिनों कटनी व जबलपुर क्षेत्र के खदान क्षेत्रों में सक्रिय हैं. यहा कायम किए गए एक आपराधिक तंत्र के भरोसे बिना रॉयल्टी चुकाये अवैध रूप से उत्खनन का सिलसिला जारी है

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बुंदेलखंड के पत्‍थर खदान मजदूरों का दर्द

गगनचुंबी इमारतों एवं सड़कों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पत्थर का सीना चाक करनेऔर नदी से बालू निकालने वाले मज़दूरों को दो जून की रोटी के बदले सिल्कोशिस नामक रोग मिल रहा है. विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश भाग के ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट आदि ज़िले पूरे भारत में पत्थरों के लिए प्रसिद्ध हैं.

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पंचायत चुनाव की कठिन डगर

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 15 जून से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर चुके हैं और उप मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके सुर में सुर मिलाकर बरसात के पहले पंचायत चुनाव करा लेने का दावा कर रहे हैं. हाल में भूरिया आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह भूरिया एक कार्यशाला में शिरकत करने रांची आए.

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हीरे और अलेक्‍जेन्‍ड्राइट की तस्‍करी जारी

राजधानी से कुछ ही दूरी पर स्थित हीरे की खदान में पिछले लंबे समय से अवैध उत्खनन का काम धड़ल्ले से जारी है. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास खनिज विभाग का ज़िम्मा भी है, इसके बावजूद सुरक्षा तंत्र इस अवैध खुदाई को रोक पाने में असक्षम है.

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अप्रवासी मजदूर बदहाली के शिकार

असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे सैकड़ों अप्रवासी मज़दूरों की जान-माल की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है. कटनी ज़िले में विभिन्न उद्योगों से जुड़े देश भर के हज़ारों मज़दूर केवल नियोक्ता के रहमोंकरम पर आश्रित हैं. ज़िला प्रशासन या किसी अन्य संस्था द्वारा इन मज़दूरों को सुरक्षा या संरक्षण देने के लिए कोई नियमावली नहीं बनाई गई है.

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रेत माफिया के कारण घडि़यालों पर संकट

खनिज और रेत माफिया मध्य प्रदेश के एक और अभ्यारण्य को समाप्त करने जा रहा है. जैव विविधता की परिकल्पना मध्य प्रदेश में अलग-अलग माफियाओं के चलते इन दिनों संकट में है. विंध्य क्षेत्र की सबसे बड़ी नदियों में शामिल की गई सोन नदी के तट पर बना घड़ियाल अभ्यारण्य राज्य शासन की उपेक्षा और अनदेखी का शिकार बन चुका है.

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