कैग की रिपोर्ट ने खोली गंगा स़फाई को लेकर मोदी सरकार की पोल : कसम गंगा की खाते हैं निर्मल नहीं बनाएंगे

2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद जब मोदी सरकार ने गंगा सफाई को लेकर एक अलग मंत्रालय बनाया,

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रामेश्‍वरम की महिमा

रामेश्‍वरम हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है. यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग बारह

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जब तोप मुक़ाबिल हो : असंवेदनशील है उत्तराखंड सरकार

बारिश आ रही है और नदियां उफान पर हैं, लेकिन मंत्रियों, राजनेताओं और अफसरों को इसकी कोई चिंता नहीं है.

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जब तोप मुकाबिल हो : उत्तराखंड की मदद हर भारतीय का कर्तव्य है

उत्तराखंड की आपदा क्या दैवीय आपदा है? क्या यह भगवान की नाराज़गी का परिणाम है, या यह गंगा मां के

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कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

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उत्तराखंडः पूर्णानंद दिलाएंगे निगमानंद के हत्यारों को सजा

धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा और पर्यावरण की रक्षा की मांग को लेकर शहादत देने वाले युवा संत निगमानंद की समाधि की मिट्टी अभी सूखी भी नहीं थी कि मातृ सदन के दूसरे युवा संत स्वामी पूर्णानंद सरस्वती ने अपने गुरुभाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने और गंगा रक्षा के संकल्प के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया. गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन अब तक दो शहादत दे चुका है.

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संत निगमानंद की मौत पर राजनीति

गंगा को बचाने के लिए जान देने वाले संत निगमानंद की मौत पर राजनीति शुरू हो गई है. इस मामले को लेकर जहां प्रदेश की निशंक सरकार पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं, वहीं संत के परिवार वालों ने मातृ सदन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं. संत के परिवार वालों का कहना है कि निगमानंद पर अनशन का दबाव था.

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अब तो मां का दूध भी जहर हो गया है

देश की नदियों की हालत बेहद खराब है. इनमें गंगा, यमुना, दामोदर, सोन, कावेरी, नर्मदा एवं साही आदि शामिल हैं. गंगा जैसी पवित्र नदी भी प्रदूषण की शिकार होकर दुनिया की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में शामिल हो गई है. इसका 23 फीसदी जल प्रदूषित हो चुका है.

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गंगोत्री में ही गंगा मैली

हर धर्म की अपनी मान्यताएं-परंपराएं होती हैं. आस्था को विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता, किंतु ऐसा भी नहीं कि उसमें कोई तर्क न हो. यदि धर्म न हो तो समाज में समरसता, भाईचारा और उल्लास देखने को न मिले.

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भागीरथी में कम होता जल प्रवाह

देवभूमि हरिद्वार में गंगा का अभी से बुरा हाल हो गया है. गंगा की अविछिन्न आपूर्ति धारा में गंगाजल का प्रवाह न होने से धर्म नगरी में श्रद्धालुओं द्वारा बनाए गये दर्जन भर से अधिक घाट अभी से जलविहीन हो गये है.

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नसों में घुल रहा है आर्सेनिक का जहर

आर्सेनिक के विष से अकेले उत्तर प्रदेश की जनता ही जानलेवा बीमारियों का शिकार नहीं रही है बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल में इसका कहर और अधिक है. चिकित्सकों की मानें तो आर्सेनिक युक्त पानी लंबे समय तक पीने से कई भयंकर बीमारियां शरीर को दबोच लेती हैं. त्वचा का कैंसर हो सकता है.

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पारस की बंध गई पोटली

खगड़िया ज़िले के बेहद पिछड़े विधानसभा क्षेत्र अलौली में अंतत: 33 वर्षों के बाद लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की पोटली बंध ही गई. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के अनुज पारस ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जनता उन्हें सिर आंखों पर बिठाने के बजाए ज़मीन पर पटक देगी. दरअसल हार से बचने के लिए उन्होंने अपने चहेते रामचंद्रा सदा को जदयू का टिकट यह सोचकर दिलवाया था कि उन्हें मुसहर समाज के तीन-तीन प्रत्याशियों के खड़े रहने से जीतने में मदद मिलेगी. हुआ उल्टा. महादलित समाज के लोगों ने एकजुट होकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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फिर बहेंगी खून की नदियां

नदियों की कोख से निकली ज़मीन पर मालिकाना हक़ जताने के लिए वैसे तो कोसी और फरकिया की धरती पर वर्षों से खून की होली खेली जाती रही है, लेकिन इस बार जिस अंदाज़ में नरसंहार की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है, उससे ऐसी आशंका है कि बिहार के खगड़िया ज़िले में बीते वर्ष घटित अमौसी नरसंहार की घटना कहीं छोटी न पड़ जाए.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबइल- 39

बक्सर गंगा के किनारे बसा है. इसीलिए गंगा यहां के लोगों के जीवन में हर तरह से रची-बसी है. गंगा इस इलाक़े की जीवनदायिनी है. बक्सर में उद्योग-धंधे तो हैं नहीं. गंगा के कारण इलाके की ज़मीन बेहद उपजाऊ है. खेती-किसानी मुख्य पेशा है. आजादी के बाद एक टेक्सटाइल मिल लगी थी.

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गंगा के नाम पर राजनीति

निशंक सरकार एवं उसकी पुलिस योग गुरु बाबा रामदेव के सामने नतमस्तक है. देवभूमि में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की महज़ खानापूर्ति की जा रही है. इस बात का खुलासा हरिद्वार की कनखल पुलिस द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने वाले 150 अज्ञात आंदोलनकारियों के ख़िला़फ दर्ज की गई प्राथमिक सूचना रिपोर्ट से हुआ.

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खतरे में गंगा की डॉल्फिन

भागलपुर के पास बना विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य सुल्तान गंज से कहलगांव तक 50 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है. यह एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां गंगा की विलुप्त हो रही डॉल्फिनों को संरक्षित और बचाने की पहल की गई है.

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गोमुख से गंगासागर एक पदयात्रा पर एक संन्‍यासी

यदि यह पदयात्रा किसी नेता या अभिनेता की होती अथवा कोई रथयात्रा हो रही होती तो मीडिया इसकी पल-पल की जानकारी दे रहा होता, किंतु यह यात्रा एक संन्यासी कर रहा है, लिहाज़ा इसकी कहीं कोई चर्चा नहीं हो रही.

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ओ गंगा बहती हो क्‍यों

गंगा प्रतीक है एक सभ्यता की, हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक. इसी से मिलकर बनती है गंगा-जमुनी संस्कृति. करोड़ों लोगों के जीवन की आशा है गंगा. उनकी रोजी और रोटी का सहारा भी है गंगा. लाखों वर्ग किलोमीटर खेतों की प्यास भी बुझाती है गंगा. लेकिन अब गंगा का पानी पीने तो दूर, नहाने लायक़ भी नहीं रहा.

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गंगा तेरा पानी अम़ृत

गंगाजल को सात समंदर पार बेचने की अपनी अति महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने गंगा स्वायत्तशासी प्राधिकरण का ऐलान करके प्रति वर्ष कम से कम पांच सौ करोड़ रुपये जुटाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है. सरकार का मानना है कि इस काम से होने वाली आय को गंगा की सा़फ-स़फाई के लिए ख़र्च किया जाएगा.

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निशंक सरकार और गंगा प्रेम का पाखंड

महाकुंभ 2010 के सकुशल संपन्न होने के बाद उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रियों के साथ हरिद्वार स्थित मालवीय द्वीप में बैठक कर मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने गंगा एवं पर्यावरण को बचाने की अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया. लेकिन, उन्होंने महाकुंभ में बड़े पैमाने पर हुए सरकारी धन के दुरुपयोग के सवाल को आज भी अनुत्तरित छोड़ दिया.

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महाकुंभ तो हमेशा ऐसे ही भरता रहेगा

14 से 19 अप्रैल 2010 के कुंभनगर हरिद्वार में भगदड़, गंगा में डूबने और ऐसे ही अन्य कारणों से 45 लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं. 22 अप्रैल तक यानी कुंभ निबट जाने के एक सप्ताह बाद भी 500 से अधिक लोग लापता हैं. इन पांच सौ लोगों को उनके परिजन हरिद्वार के थानों, घाटों, आश्रमों, अखाड़ों, होटलों, धर्मशालाओं, स्टेशन-बस अड्डों, पार्किंगों एवं गलियों-बाज़ारों में ढूंढ-ढूंढ कर थक चुके हैं.

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चरण वंदना करके निबट गया महाकुंभ

जैसे-तैसे आख़िर निबट ही गया उत्तराखंड का पहला महाकुंभ! घोर असुविधाओं और शासन-प्रशासन एवं पुलिस द्वारा बाबा लोगों की चरण वंदनाओं के भरोसे-सहारे ही संपन्न हो गया 2010 का महाकुंभ. सच तो यह है कि आलोक ने आनंदपूर्वक संतों के चरण गहे और निशंक हो गए.

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मनमोहन ने बंद कराई गंगा परियोजना : संतों के सामने कांग्रेस भाजपा से ज्‍यादा नतमस्‍तक

गंगा की अविरल जल धारा को बनाए रखने के मामले में संतों के कहने पर कांग्रेस की यूपीए सरकार भाजपा से भी आगे निकल गई है. अब वह मानने लगी है कि अगर गंगा की धारा से ज़्यादा छेड़छाड़ की गई तो उत्तराखंड का विकास हो कि न हो, पर्यावरण पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

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