लंदन में गांधी जी की प्रतिमा

गांधी जी की यह प्रतिमा उनकी 1931 वाली उस तस्वीर के आधार पर बनाई जा रही है, जिसमें वह 10

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राष्ट्रीय संकट का निवारण कैसे हो

यह संघर्ष राष्ट्र के वर्तमान संकट से उबरने की अनुक्रिया का एक अविच्छिन्न भाग होगा. यह संघर्ष स्थानीय, क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय

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आत्म-शुद्धि और संगठन सफलता की कसौटियां हैं

आज सस्ते कच्चे माल और महंगे पक्के माल से ग्रामीणों का कैसा शोषण हो रहा है! एक किलो रुई की

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संगठन और आंदोलन

अत: किसान और मज़दूर, दोनों का हित इसी में है कि कृषि से उत्पादित वस्तुओं का वाजिब दाम मिले और

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गोरे अंग्रेज गए, काले आ गए?

किसानो  का शोषण शुरू हुआ. साहूकारों के हाथ में बड़े-बड़े खेतों के चक आए. उधर कई किसान भूमिहीन हो जाने

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ग्रामसभा के अधिकार!

हमने देखा कि पंचायती राज की वर्तमान योजना के अंतर्गत आज जो पंचायतें हैं, वे गांधी जी की कल्पना की

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हक़ से मांगें पंचायत के ख़र्च का हिसाब

गांधी जी का सपना था कि देश का विकास पंचायत राज संस्था के ज़रिए हो. पंचायती राज को इतना मज़बूत

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समस्या और उसका निराकरण

राजनीतिक पार्टियों में अच्छे लोग नहीं हैं, यह बात नहीं है, पर सवाल अच्छे लोगों का नहीं, बल्कि नीतियों एवं

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ग्राम सभा को मज़बूत बनाएं

स्वराज की अवधारणा असल में पंचायती राज संस्था की नींव पर ही टिकी है यानी जितनी सशक्त पंचायती राज संस्था होगी, उतनी ही ज़्यादा संभावना ग्राम स्वराज के मज़बूत होने की बनेगी. गांधी जी भी चाहते थे कि शासन की सबसे छोटी इकाई यानी पंचायती राज के ज़रिए ही गांवों का विकास हो.

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यह धर्म निरपेक्षता नहीं है

भारतीय इतिहास में तुर्की की एक अहम भूमिका रही है. भारत के विभाजन के केंद्र में भी इसका नाम रहा और इसके बाद भारत द्वारा धर्मनिरपेक्षवाद अपनाए जाने के पीछे भी वजह तुर्की ही था. प्रथम विश्व युद्ध के व़क्त जब ओटोमन सुल्तान की हार हुई, तब उसे अपने खलीफा पद पर भी ख़तरा मंडराता नज़र आया.

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