झारखंड की मुख्य सचिव तक पहुंची चारा घोटाले की आंच

झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा पर चारा घोटाले में लालू यादव की मदद का आरोप लगा है. 1983 बैच

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नक्सलियों से वार्ता की पहल करें केंद्र सरकार

नक्सलवाद की समस्या केंद्र की पिछली कई सरकारों के लिए परेशानी का सबब रही है. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

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शीला दीक्षित की टीम

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और गृहमंत्री के बीच कुछ अधिकारियों के स्थानांतरण के मुद्दे पर चल रहा विवाद अब

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यह देश के तंत्र के मुंह पर एक तमाचा है

हैदराबाद में दो धमाके हुए. आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की जानें गईं और अनाधिकारिक रूप से बीस से ज़्यादा

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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ख़त्म होता नक्सलियों का ख़ौ़फ

जन लोकपाल बिल पर सरकार और टीम अन्ना के बीच जारी बवाल, रिटेल में विदेशी निवेश पर सरकार, उसके सहयोगी दलों एवं विपक्ष के बीच मचे घमासान और गृहमंत्री चिदंबरम पर एक के बाद एक लग रहे आरोपों के बीच देश में कई अहम खबरें गुम सी हो गईं.

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आतंकवाद से लड़ने वाली सबसे बड़ी एजेंसी : एन आई ए का सच

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने नॉर्थ ब्लॉक में बैठे बाबुओं और नौकरशाहों को ज़रिया बनाकर देश की आंतरिक सुरक्षा को भी सियासत का खेल बना दिया है. आप इसकी त्रासद बानगी देखना चाहें तो एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर नज़र डालें.

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चिदंबरम जी, आप किसके साथ हैं?

नक्सलियों के ख़िला़फ सेना उतारने पर आमादा केंद्रीय गृह मंत्रालय नक्सली संगठनों को अरबों रुपये का फंड देने वाले उद्योगपतियों और पूंजीपतियों की लिस्ट वर्ष 2007 से दबाए बैठा है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा. हैरत की बात यह है कि नक्सलियों को फंडिंग करने वालों में सरकारी महकमे और उपक्रम भी शामिल हैं.

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मुइवा, मणिपुर और केंद्र की दोहरी नीति

पिछले दस वर्षों से शीर्ष नगा अलगाववादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएनआईएम) और केंद्र सरकार के बीच वार्ताओं का दौर चला आ रहा है. बीते अप्रैल में हुई नई दौर की वार्ता से लोगों को लगा कि इस बार दोनों पक्ष एक-दूसरे को बेहतर तरीक़े से समझ पा रहे हैं. नए वार्ताकार आर एस पांडे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाक़ात करने के बाद मुइवा से मिले थे.

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हिटलर और मुसोलिनी की राह पर मत चलिए

हमारे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बहुत बहादुर और दूरदर्शी हैं. उन्हें माओवादियों से लड़ने और उनकी बात किसी के पास न पहुंचे, इसका एक नायाब तरीक़ा मिल गया है. इन्होंने एक आदेश जारी कर कहा है कि देश का कोई भी सोचने-समझने वाला माओवादियों द्वारा उठाए गए सवालों पर बातचीत नहीं करेगा.

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दो डीजीपी की जंग में शहीद हो रहे जवान

नक्सलवाद को नेस्तनाबूद करने की ख़ातिर छत्तीसगढ़ में तैनात किए गए दो पुलिस महानिदेशक नक्सलियों को मटियामेट करने के बजाय आपस में ही धींगामुश्ती कर रहे हैं. नक्सलियों का सफाया करने की जगह उनमें इस बात की होड़ मची है कि नक्सलियों के ख़िला़फ चल रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट की डोर किसके हाथ रहे और इसका सेहरा किसके सिर बंधे.

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गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

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संभलिए, अभी संभलने का मौक़ा है

किसी भी सरकार को सरकार की तरह व्यवहार करना चाहिए. सरकार का मतलब होता है कि वह देश में रहने वालों के जीवन की, भोजन की, काम की, स्वास्थ्य की और उनके सुख-शांति से रहने की आज़ादी की गारंटी दे. जो सरकार इसे जितना ज़्यादा पूरा करती है, वह उतनी ही अच्छी सरकार मानी जाती है.

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सार-संक्षेप

मध्य प्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फे्रंडली नीति कितनी बोगस है, इसका पता इसी से चलता है कि लघु और मध्यम उद्योगों को बैंकों से ऋृण उपलब्ध कराने में राज्य सरकार का वित्त निगम सफल नहीं हो पा रहा है. जानकारी के अनुसार, राज्य में वित्त निगम द्वारा 337 उद्योगों के लिए 230 करोड़ रुपये का ऋृण स्वीकृत किया गया था, लेकिन उद्योगों को केवल 161 करोड़ रुपये ही मिल सके.

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मृत्यु दंड : अमानवीय या ज़रूरत

कैपिटल पनिशमेंट, जिसे मृत्यु दंड या फांसी के नाम से भी जाना जाता है, का मुद्दा उसके समर्थकों और विरोधियों के बीच अक्सर गर्मागर्म बहस का कारण बनता रहा है. मृत्यु दंड के ख़िला़फ तर्क देते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है, मृत्यु दंड मानवाधिकारों के उल्लंघन की पराकाष्ठा है. वास्तव में यह न्याय के नाम पर व्यवस्था द्वारा किसी इंसान की सुनियोजित हत्या का एक तरीक़ा है.

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स्‍वायत परिषद पर गोरखा मान जाएंगे?

गोरखा जन मुक्ति मोर्चे के मुखिया विमल गुरुंग अपने आंदोलन को गांधीवादी करार देते हैं, पर ज़रूरत पड़ने पर वह

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दिल्ली का बाबू: अटकलों का दौर जारी

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के प्रभावशाली पद से एम के नारायणन को सीधे पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाए जाने के बाद से अटकलबाज़ियों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा. इससे पहले भी कई बार यह चर्चा का विषय बनता रहा है. नारायणन प्रधानमंत्री जी के प्रभावशाली सलाहकार रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस बात को लेकर चिंता जताते हैं कि इस बदलाव से सबसे शक्तिशाली समझे जाने वाले कार्यालय का बेहद संतुलित स्वरूप प्रभावित होगा. वे पूछते हैं कि क्या इससे प्रधानमंत्री कार्यालय को नुक़सान उठाना पड़ेगा?

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समस्याओं को मत टालिए

कोई भी शासन करे, उसे समझ लेना चाहिए कि समस्याओं को टालना ख़तरनाक होता है. तेलंगाना एक ऐसी ही समस्या है. इससे पहले जब भाजपा ने छत्तीसग़ढ, झारखंड और उत्तरांचल बनाए थे, तभी लगने लगा था कि राज्यों के बंटवारे की मांग उठेगी और मज़बूती से उठेगी.

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राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा पर सरकार का रवैया

भारत अगले साल राष्ट्र मंडल खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. राजधानी दिल्ली में होने वाले इन खेलों के लिए हर लिहाज़ से चौकसी बरती जा रही है, क्योंकि भारत आतंकियों के लिए पहले से ही एक सॉफ्ट टारगेट बना हुआ है और मुंबई व दिल्ली समेत कई बड़े शहर उनकी हिटलिस्ट में शामिल हैं. ऐसे में सरकार सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

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