सत्ता के पूर्ण विकेंद्रीकरण से संभव है : पार्टीविहीन लोकतंत्र

गांधी और जेपी की सोच पार्टीविहीन लोकतंत्र को कभी उभरने नहीं दिया गया, क्योंकि अगर ऐसा होता, तो आज जो

Read more

गांव को उचित सत्ता से वंचित क्यों रखा जाए?

यह आक्षेप अक्सर लगाया जाता है कि गांवों को स्व-शासन के अधिकार देने पर अन्याय, अत्याचार बढ़ेंगे और ग़लतियां भी

Read more

अपनी पंचायत का लेखा-जोखा मांगें

स्वराज, लोक स्वराज या गांधी का हिंद स्वराज आख़िर क्या है? गांधी जी का सपना था कि देश का विकास पंचायती राज संस्था के ज़रिए हो. पंचायती राज को इतना मज़बूत बनाया जाए कि लोग ख़ुद अपना विकास कर सकें. आगे चलकर स्थानीय शासन को ब़ढावा देने के नाम पर त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था लागू भी की गई.

Read more

गंगादेवी पल्‍ली में बही विकास की गंगा

आंध्र प्रदेश के वारंगल ज़िले की मचापुर ग्राम पंचायत का एक छोटा सा क्षेत्र था गंगादेवी पल्ली. ग्राम पंचायत से दूर और अलग होने के चलते विकास की हवा या कोई सरकारी योजना यहां के लोगों तक कभी नहीं पहुंची. बहुत सी चीजें बदल सकती थीं, लेकिन नहीं बदलीं, क्योंकि लोग प्रतीक्षा कर रहे थे कि कोई आएगा और उनकी ज़िंदगी संवारेगा, बदलाव की नई हवा लाएगा.

Read more

सोड़ा गांवः फिर से सजने लगी चौपाल

भारत में लोकतंत्र का अर्थ लोक नियुक्त तंत्र बना दिया गया है, जबकि इसे लोक नियंत्रित तंत्र होना चाहिए था. संविधान द्वारा तंत्र संरक्षक की भूमिका में स्थापित है, जबकि उसे प्रबंधक की भूमिका में होना चाहिए था. ज़ाहिर है, संरक्षक लगातार शक्तिशाली होता चला गया और धीरे-धीरे समाज को ग़ुलाम समझने लगा.

Read more

बेवल का प्रयोगः ग्रामसभा की ताकत साबित हुई

दिल्ली और मुंबई में हमारी सरकार, लेकिन हमारे गांव में हम ही सरकार. यानी हमारा गांव हमारी सरकार. एक अच्छे लोकतंत्र की इससे सच्ची परिभाषा शायद दूसरी नहीं हो सकती. गांधी जी का भी यही सपना था. रामराज, सुराज या स्वराज या कहें पंचायती राज.

Read more