गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत का वर्ष भर दौरा किया. भारत के ग्रामीणों की दुर्दशा देखी. उनके मुंह से वेदनापूर्ण उद्गार निकले, हमारे गांव पैमाल (तुच्छ) हो गए हैं, क्योंकि हम सच्चा अर्थशास्त्र एवं सच्चा समाजशास्त्र जानते नहीं है. बापू का यह कथन बीसवीं सदी के दूसरे दशक के गांवों को जितना [...]
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क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-
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ओडिसा के जगतसिंहपुर से लेकर हरियाणा के फतेहाबाद में ग्रामीण भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर झारखंड के कांके-नग़डी में आईआईएम के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण का लोग विरोध कर रहे हैं. इस पर सरकार का कहना है कि देश को विकास पथ पर बनाए रखने के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक है.
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हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार उजागर करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जबकि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने के लिए कहा था.
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बिहार के फारबिसगंज के भजनपुर गांव में पुलिस फायरिंग में पांच लोगों के मारे जाने की घटना को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हैरत की बात यह है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. घटना के सूत्रधार खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं जिन निर्दोष लोगों ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवा दी, उनके परिवारीजन इंसा़फ न मिलने से दु:खी हैं.
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छत्तीसगढ़ को क़ुदरत ने अपार संपदा से नवाज़ा है, जिसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो यह क्षेत्र के विकास में का़फी सहायक सिद्ध हो सकता है. इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नाममात्र विकास हो पा रहा है.
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एक बार फिर हमेशा की तरह महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में रहा. सरकार भी आम सहमति बनाने के मूड में नज़र नहीं आई. सभी राजनीतिक दल एक सुर में महिला अधिकारों की बात करते हैं, परंतु बिल पारित कराने के विषय पर बंटे नज़र आते हैं. कुछ राजनीतिक दल आरक्षण में आरक्षण की मांग कर रहे हैं.
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भारत को गांवों का देश कहा जाता है, क्योंकि यहां की अधिकतर आबादी आज भी गांव में ही निवास करती है, प्रकृति की गोद में जीवन बसर करती है और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से जीवन के साधन जुटाती है. शहरी सुख-सुविधाओं से दूर ज़िंदगी कितनी कठिनाइयों से गुज़रती है, इसका अंदाज़ा लगाना बड़े शहरों में रहने वालों के लिए मुश्किल है.
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1981 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक कुमार को रक्षा उत्पाद विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. वह पहले इसी विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रहे थे.
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1981 बैच के आईएएस अधिकारी सुरेश चंद्र पांडा को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं एफए बनाया गया है. वह विश्वपति त्रिवेदी की जगह लेंगे, जिन्हें खनिज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है.
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अज्ञानता, अंधविश्वास और जागरूकता न होना मिर्गी रोग के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, जिसके चलते आज विश्व में लगभग सात करोड़ और भारत में एक करोड़ 20 लाख लोग इस रोग से पीड़ित हैं.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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