किसान क़र्ज़ माफ़ी घोटाला : सच साबित हुई चौथी दुनिया की रिपोर्ट

पहले सीडब्लूजी, 2-जी, कोयला और अब सीएजी की एक और रिपोर्ट. न तो घोटालों का सिलसिला थमने का नाम ले

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यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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देशभक्तों और ग़द्दारों की पहचान कीजिए

जब बाबा रामदेव के अच्छे दिन थे, उस समय हिंदुस्तानी मीडिया के कर्णधार उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे. आज जब बाबा रामदेव परेशानी में हैं तो मीडिया के लोग उन्हें फोन नहीं करते. पहले उन्हें बुलाने या उनके साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए एक होड़ मची रहती थी. आज बाबा रामदेव के साथ चेहरा दिखाने से वही सारे लोग दूर भाग रहे हैं. यह हमारे मीडिया का दोहरा चरित्र है.

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खतरे में भारतीय दूरसंचार क्षेत्र : चीनी घुसपैठ हो चुकी है

पूरी दुनिया टेलीकॉम क्षेत्र में भारत द्वारा की गई प्रगति की प्रशंसा कर रही है. भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क है. लेकिन विरोधाभास यह है कि दूरसंचार मंत्रालय भी आज तक के सबसे बड़े घोटाले में शामिल है, जिसे टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का नाम दिया गया. एक लंबे समय तक दूरसंचार मंत्रालय ने बहुत से घनिष्ठ मित्र बनाए, जिन्होंने मनमाने तरीक़े से इस क्षेत्र का दोहन किया.

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सुशासन का सच या फरेब

बिहार के चौक-चौराहों पर लगे सरकारी होर्डिंग में जिस तरह सुशासन का प्रचार किया जाता है, वह एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की याद दिलाता है. बिहार से निकलने वाले अ़खबार जिस तरह सुशासन की खबरों से पटे रहते हैं, उसे देखकर आज अगर गोएबल्स (हिटलर के एक मंत्री, जो प्रचार का काम संभालते थे) भी ज़िंदा होते तो एकबारगी शरमा जाते. ऐसा लिखने के पीछे तर्क है.

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यह खामोशी देश के लिए खतरनाक है

कोयला घोटाला अब स़िर्फ संसद के बीच बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का विषय हो गया है. सारे देश के लोग कोयला घोटाले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसमें पहली बार देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम सामने आया है. मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे और यह फैसला चाहे स्क्रीनिंग कमेटी का रहा हो या सेक्रेट्रीज का, मनमोहन सिंह के दस्तखत किए बिना यह अमल में आ ही नहीं सकता था.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल: काला कानून, काली नीयत

उदारीकरण का दौर शुरू होते ही जब सवा सौ साल पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून ने अपना असर दिखाना शुरू किया, तब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह मुद्दा अपनी छवि बनाने के एक अवसर के रूप में दिखा. नतीजतन, अपनी तऱफ से उन्होंने इस कानून में यथाशीघ्र संशोधन कराने की घोषणा कर दी. घोषणा चूंकि राहुल गांधी ने की थी, इसलिए उस पर संशोधन का काम भी शुरू हो गया.

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विद्वान प्रधानमंत्री विफल प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईमानदार हैं, सौम्य हैं, सभ्य हैं, मृदुभाषी एवं अल्पभाषी हैं, विद्वान हैं. उनके व्यक्तित्व की जितनी भी बड़ाई की जाए, कम है, लेकिन क्या उनकी ये विशेषताएं किसी प्रधानमंत्री के लिए पर्याप्त हैं? अगर पर्याप्त भी हैं तो उनकी ये विशेषताएं सरकार की कार्यशैली में दिखाई देनी चाहिए. अ़फसोस इस बात का है कि मनमोहन सिंह के उक्त गुण सरकार के कामकाज में दिखाई नहीं देते.

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सच का सिपाही मारा गया

सच जीतता ज़रूर है, लेकिन कई बार इसकी क़ीमत जान देकर चुकानी पड़ती है. सत्येंद्र दुबे, मंजूनाथ, यशवंत सोणावने एवं नरेंद्र सिंह जैसे सरकारी अधिकारियों की हत्याएं उदाहरण भर हैं. इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है इंजीनियर संदीप सिंह का. संदीप एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) में हो रहे घोटाले को उजागर करना चाहते थे.

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दिल्‍ली का बाबूः ईमानदारी की सज़ा

हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार उजागर करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जबकि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने के लिए कहा था.

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26 लाख करोड़ का कोयला घोटाला: यह घोटाला नहीं, महाघोटाला है

सरकार चलाने का यह एक नया मूलमंत्र है. पहले घोटाला करो और भ्रष्टाचार होने दो. अगर मामला सामने आ जाए तो सबसे पहले उसे नकार दो, दलीलें दो, मीडिया में बयान दे दो कि घोटाला हुआ ही नहीं है. और, जब घोटाले का पर्दाफाश होने लग जाए, मामला हाथ से बाहर निकल जाए, जांच शुरू हो जाए, कोर्ट में मुकदमा चलने लगे तो कह दो कि मामले की जांच हो रही है.

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भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का सपना खोखला साबित : हर तरफ़ लूट की खुली छूट

नीतीश सरकार भले ही सुशासन की दुहाई देकर भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डालने के दावे करती हो, लेकिन हक़ीक़त यह है कि भ्रष्टाचारियों को लूट की छूट मिली हुई है. सड़क से लेकर सदन तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावे किए जाने के बावजूद नित्य नए-नए घोटाले सामने आ रहे हैं. बावजूद इसके सरकार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करना शायद उचित नहीं समझती.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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राहुल को हार का डर सताने लगा है

उत्तर प्रदेश में मिली हार के बाद राहुल ने अपना दायरा सीमित कर लिया है. राहुल गांधी बात भले ही पूरे प्रदेश की करते दिखते हों, लेकिन सच्चाई यही है कि उनका सारा ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पर लगा है. उन्हें अब इस बात का डर सता रहा है कि अगर हालात नहीं बदले तो 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके लिए अपनी सीट बचाना भी मुश्किल हो जाएगा.

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बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है, लेकिन स़िर्फ धुएं के रूप में. चौथी दुनिया ने बोफोर्स कांड की एक-एक परत को खुलते हुए क़रीब से देखा है और हर एक परत का विश्लेषण पाठकों के समक्ष रखा है. अभी स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख का एक बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी ने बोफोर्स में रिश्वत नहीं ली थी.

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उत्तर प्रदेशः घोटालों के गुरुघंटाल

सामाजिक एवं राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने और खून के प्यासे लगने वाले नेताओं का असली चेहरा जनता कभी-कभी देख पाती है. सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के क़रीब लाते हैं. नेताओं की मिलीभगत के चलते उत्तर प्रदेश की पहचान आज घोटालों के प्रदेश के रूप में होती है. पिछले 20-25 वर्षों में तो घोटालों की बाढ़ सी आ गई.

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दूध की कीमत का सवालः मुनाफे में कंपनियां घाटे में किसान

अनाज पैदा करने वाले किसानों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते अक्सर देखा गया है, लेकिन ऐसा पहली मर्तबा हुआ, जब दूध की सही क़ीमत निर्धारित करने को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों एवं ग्वालों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन किया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ग्वाला गद्दी समिति एवं दूध उत्पादक किसानों की मांगों को जायज़ क़रार देते हुए टीम अन्ना ने भी इसका समर्थन किया.

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दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

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सेना के आंतरिक कार्यक्षेत्र में अनाधिकृत हस्‍तक्षेप

जिस तरह सेना के नेतृत्व में भ्रष्ट बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी से ऊर्जा और अन्य कंपनियों के हितों के लिए अमेरिकी मीडिया व्यवसायिक घरानों का मुखपत्र बन गई थी, उसी तरह भारत में भी व्यवसायिक समूहों के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों में नीरा राडिया टेप के केस के दौरान टीवी एंकर कॉर्पोरेट घरानों का रु़ख लोगों के सामने रख रहे थे.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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