अहमदनगर के किसानों ने लिया निर्णय: खेत नहीं जोतेंगे, उपज नहीं बेचेंगे

संजय अस्थाना : चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष में खेती-किसानी पर राष्ट्रीय विमर्श के बीच महाराष्ट्र में अहमदनगर के किसानों ने

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पूर्वी चंपारणः महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, जनसंघर्ष और नेतागिरी

संघर्ष ज़मीन तैयार करता है और फिर उसी ज़मीन पर नेता अपनी राजनीतिक फसल उगाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बने संघर्ष मोर्चा के साथ. चंपारण की जनता केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिन-रात एक करके संघर्ष करती है और जब दिल्ली आती है अपनी बात केंद्र तक पहुंचाने, तो वहां मंच पर मिलते हैं बिहार के वे सारे सांसद, जो संसद में तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन जनता के बीच भाषणबाज़ी का मौक़ा भी नहीं छोड़ते.

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केंद्रीय विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने की मांगः चंपारण एक बार फिर आंदोलन की राह पर

महात्मा गांधी के नाम पर कसमें खाकर दुबली होने वाली कांग्रेस सरकार उनके नाम पर एक अदद केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने को तैयार नहीं है, जो कि बापू की कर्मभूमि चंपारण के मोतिहारी में प्रस्तावित है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल का अड़ियल रवैया उसकी स्थापना में बाधक बन रहा है. सिब्बल के ताजा बयान ने केंद्रीय विश्वविद्यालय का सपना संजोए चंपारणवासियों के अरमान में पलीता लगा दिया है.

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पूर्वी चंपारणः अब महफूज नहीं हैं मोर

जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर कल्याणपुर प्रखंड के मनी छपरा पंचायत का माधोपुर गोविंद गांव. क़रीब पांच दशक पहले यहां के किसान स्वर्गीय चंद्रिका सिंह सोनपुर मेले से मोर के दो जो़डे खरीदकर लाए थे. तब से आज तक इस गांव में लगभग 500 मोरों की बोली गूंज रही है.

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चंपारण के ऐतिहासिक स्‍थलः झूठे वादों की मार से बेहाल

वर्ष 2010 बीत गया और चंपारण के मुद्दे जस के तस रहे. विकास यात्राएं हुईं, नई सरकार का गठन भी हुआ, लेकिन सत्याग्रही भूमि पर मुद्दों का समाधान नहीं हुआ. चंपारण को खास पहचान देने वाले स्थलों का जीर्णोद्धाधार तक नहीं हुआ है.

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पूर्वी चंपारणः फसल पर नील गायों का कहर

प्रतिवर्ष बाढ़ और सुखाड़ जैसी आपदा से लहूलुहान किसान वन विभाग की लापरवाही की वजह से भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. नीलगायों की बढ़ती संख्या से फसलों की बर्बादी इस कदर बढ़ गई है कि किसानों के चेहरे मायूस हो गए हैं.

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चंपारणः ठोक बजाकर वोट देंगे मुसलमान

विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. चौपड़ पर बिसात सजाने में राजनीतिक दलों के प्रधान जुट गए हैं. इस चुनाव में जहां नीतीश कुमार की अग्निपरीक्षा होगी, वहीं लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने वापसी की चुनौती भी. इन सबके बीच चंपारण की मुस्लिम राजनीति सर्वाधिक असरकारक साबित होगी और यहां के मुस्लिम मतदाताओं का रुझान बिहार की तकदीर और भविष्य की राजनीति की कथा लिखेगा.

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विकास के नाम पर छले गए चंपारणवासी

गांधी की कर्मभूमि और वाल्मीकि की तपोभूमि चंपारण से न्याय रथ यात्रा निकालकर बिहार में सुशासन की सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार ने अन्य नेताओं की तरह ही विकास के नाम पर चंपारण को सिर्फ छलने का काम किया है. चंपारण में विकास की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन स़िर्फ काग़ज़ और शिलान्यास पट पर.

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फिजी बनने का सपना अधूरा रह गया

चंपारण गन्ना पैदा करने के मामले में अब काफी पीछे हो गया है. नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद यहां के किसान सपना देखने लगे थे कि गन्ना उत्पादन में चंपारण फिर से फिजी बन जाएगा, लेकिन अफसोस की बात यह कि उनका सपना हक़ीक़त में नहीं बदल सका.

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नेपाल से चल रहा अपराध का धंधा

बिहार सरकार अपराधियों को पकड़ने और खत्म करने का दावा अपने सुशासन में चाहे जितना कर ले, लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही बयां करती है. वास्तविकता यह है कि शातिर अपराधी आज भी अपने ठिकानों को सुरक्षित रखते हुए मौक़ा पाते ही घटना को अंजाम देने से बाज नहीं आते.

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उपेक्षा की आग में झुलसते अग्नि पीडि़त

पश्चिम चंपारण ज़िले में आगजनी की घटनाओं ने लगभग दस हज़ार लोगों को बेघर कर इन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है. सरकार ने सहयोग के नाम पर मात्र बाईस सौ पचास रुपये देकर अपना पल्ला झाड़ लिया. वहीं सांसद और विधायक बिहार सरकार से पैकेज मांगने के नाम पर अपनी जिम्मेदारी का इतिश्री पूरा कर लिया है.

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नौतन विधानसभा क्षेत्र : मतदाताओं का मन टटोलने में जुटे नेता

कांग्रेस का ग़ढ माने जाने वाले पश्चिम चंपारण के नौतन विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां ब़ढने लगी है. आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में सभी नेता जोर-शोर से लगे हैं. यह क्षेत्र राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय का कार्यक्षेत्र रहा है. यहीं से कुख्यात दस्यु सरगना भागड़ यादव ने अपने भाई सतन यादव को विधायक बनाने में कामयाबी हासिल की थी.

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कैसे बरकरार रहेगी मीना बाजार की रौनक

पश्चिमी चंपारण के मुख्यालय बेतिया स्थित मीना बाज़ार देश का संभवत: पहला ऐसा बाज़ार है, जिसके प्रांगण में एक साथ 2400 दुकानों का जमावड़ा है. हाल में यह बाज़ार सु़र्खियों में था. क्योंकि अफवाह फैली थी कि मीना बाज़ार उजड़ जाएगा. इस संबंध में कई तरह की बातें की जा रही थीं.

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चंपारण देगा ग्‍लोबल वार्मिंग का समाधान

ग्‍लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर रियो डी जेनेरियो से ले कर कोपेनहेगन तक की बैठक में राष्ट्र प्रमुख अपनी-अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि उनकी यह चिंता अब तक किसी ठोस समाधान के रूप में नहीं बदल सकी है. इस विश्व-व्यापी समस्या का एक शुरुआती लेकिन ठोस समाधान निकाला है बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के विरेंद्र कुमार सिन्हा ने.

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स़िर्फ आबादी नहीं आधी शक्ति है हम

महिला बिल पास होने पर चंपारण की महिलाओं में जगा आत्मविश्वास देखते ही बनता है. मैंने जब एक घंटे पहले की एक ग़रीब प्रसूति को इंटरमीडिएट की परीक्षा में कराहते हुए शामिल होते हुए देखा तो मुझसे रहा न गया. मैंने स्वयं उसे परीक्षा डेस्क से हटाकर वहीं क्लास रूम में आराम करने की व्यवस्था की और उसे गर्म पानी व चाय पीने को दिया.

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गांधी जी और बटक मियां

लंदन से दक्षिण अफ्रीका लौटते व़क्त राष्ट्रपिता गांधी ने जो संवाद लिखा था, वह बाद में हिंद स्वराज के नाम से पुस्तकाकार भी छपा. इस पुस्तक के प्रकाशन के सौ साल पूरे होने पर बुद्धिजीवियों के बीच जमकर बहस-मुहाबिसा हुआ. हिंद स्वराज का प्रकाशन आंशिक और पूर्ण रूप से पत्र-पत्रिकाओं में हुआ और नई पीढ़ी को एक बार फिर से राष्ट्रपिता गांधी को जानने-समझने का अवसर मिला.

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गन्ना किसान मिल मालिकों के चंगुल में

यह वही चंपारण है, जहां कभी गांधी जी ने भूमिहीन एवं ग़रीब किसानों को भय से मुक्ति और राहत दिलाने के लिए मशाल जलाई तथा उसे देश के कोने-कोने में ले गए थे.

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केसरिया बौद्घ स्तूप पर खतरा!

दुनिया भर के पर्यटक विश्व के सबसे ऊंचे बौद्घ स्तूप का दीदार करने पूर्वी चंपारण स्थित केसरिया ज़रूर आते हैं, लेकिन उसकी दुर्दशा देखकर उन्हें यकीन ही नहीं होता है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के साथ ऐसी लापरवाही भी हो सकती है. इतना ही नहीं, जब सैलानी सिर कटी बुद्घ की मूर्ति और स्तूप की दीवारों में उभरी दरारें देखते हैं तो वे अवाक रह जाते हैं.

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