पानी को तरस रहे बुंदेलखंड में पानी की तरह बह रहा है पैसा : सट्‌टा लगा रहा है बट्‌टा

विकास को परिभाषित करने के लिए आज हम जिस आधुनिक तकनीक का हवाला देते हैं, उसी आधुनिकता को आधार बनाकर

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क्रशरों का कहर: लोगों का जीना दूभर

यूं तो बुंदेलखंड के वीरों की गाथाएं एवं दंतकथाएं विश्वविख्यात हैं, लेकिन यहां के मौजूदा हालात मरता क्या न करता जैसे हैं. गड्‌ढों में तब्दील हो चुके पहाड़ और अंधाधुंध खनन बुंदेलखंड की सबसे बड़ी त्रासदी है. कभी चंदेलकालीन सरोवरों एवं देशावरी पान के लिए प्रसिद्ध बुंदेलखंड आज अपनी पहचान के लिए खनिज उद्योग का मोहताज है. जब-जब बुंदेलखंड की बदहाली का शोर उठा तो शासन-प्रशासन ने खनिज उद्योग का हवाला देकर उसे दबा दिया. बुंदेलखंड सदियों से विंध्य पर्वत श्रंखला का गढ़ माना जाता है, लेकिन अब न केवल पर्वतों का अस्तित्व संकट में है, बल्कि उनकी मौजूदगी ने यहां के किसानों एवं मजदूर तबके की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. क्रशर उद्योग को काल मानने वालों की संख्या अकेले महोबा जनपद में 20 से 25 हज़ार है.

किसी क्षेत्र की बदहाली दूर करने की बात उठे और उद्योगों का जिक्र न हो, यह मुमकिन नहीं, लेकिन जब कोई कहे कि उद्योग ही उस क्षेत्र की बदहाली का कारण है तो यह हजम करना मुश्किल होगा, पर बुंदेलखंड की ज़मीनी हक़ीक़त कुछ ऐसी ही है. झांसी, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा और महोबा में उद्योग की शक्ल अख्तियार कर चुके क्रशर लोगों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं. क्रशरों से उड़ने वाली धूल के चलते हज़ारों बीघा कृषि भूमि बंजर हो चुकी है. विस्फोट के समय पत्थर टूटकर खेतों पर गिरते हैं, नतीजा मुंह का निवाला भी छिन जाता है. रही-सही कसर क्रशरों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले वाहन फसल रौंद कर पूरी कर देते हैं. कुछ लोगों ने धूल से खेती को होने वाले ऩुकसान के बारे में ज़िला कृषि अधिकारी से जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उन्होंने यह तो माना कि पत्थरों की धूल उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर डालती है, लेकिन वह इससे भूमि के बंजर होने संबंधी सवाल का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके.

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चित्रकूट इच्‍छाधारी की जन्‍मभूमि है

मध्य प्रदेश का अविकसित कहा जाने वाला क्षेत्र अभी तक विंध्य क्षेत्र ही माना जाता था, परंतु उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के परिणाम स्वरूप इस क्षेत्र में पिछले दिनों अपराधियों तथा असामाजिक गतिविधियों में आश्यर्चजनक रूप से वृद्धि हुई है. इस क्षेत्र के चित्रकूट धाम निवासी इच्छाधारी बाबा का सेक्स रैकेट और गतिविधियां इन दिनों पूरे देश के सनातन धर्मी संतों की मान और प्रतिष्ठा पर एक बदनुमा दाग बन चुकी हैं.

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बुंदेलखंड को राज्य बनाने के नाम पर सियासत

दो दशक से बुंदेलखंड राज्य मुक्ति मोर्चा मुहिम चला रहा है. इसी के तहत चित्रकूट से पैदल यात्रा शुरू हुई. यूं तो बुंदेलखंड क्षेत्र दो राज्यों में विभाजित है-उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश, लेकिन भू-सांस्कृतिक दृष्टि से यह क्षेत्र एक-दूसरे से विभिन्न रूपों में जुड़ा हुआ है. रीति-रिवाजों, भाषा और विवाह संबंधों ने इस एकता को मजबूत कर दिया है.

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