भटगांव उपचुनावः भाजपा जीती या रमन सिंह सरकार?

छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं नक्सल प्रभावित ज़िले सरगुजा के भटगांव विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के परिणाम ने जहां मुख्यमंत्री रमन सिंह और रणनीति बनाने में माहिर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का क़द बढ़ा दिया है, वहीं अंतर्विरोधों, गंभीर मतभेदों और कलह से जूझती कांग्रेस की बदतर स्थिति भी उजागर कर दी है.

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रेलवे भर्ती में छत्तीसगढि़यों की उपेक्षा

रेलवे में कर्मचारियों की भर्ती और विवादों के बीच चोली-दामन जैसा रिश्ता है, इसलिए कोई भी भर्ती बिना विवाद पूरी नहीं हो पा रही है. दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे में चार साल पहले गैंगमैन के 3016 पदों पर भर्तियां की गई थीं, जिसमें 4500 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था.

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छत्तीसगढ़ः जनता से दूर होती कांग्रेस

दस साल पहले अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ में एक बार अजीत प्रमोद जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रह चुकी है. चुनावों में सत्ता से जनता द्वारा बेदख़ल की गई कांग्रेस में संगठन के नाम पर अब स़िर्फ नेता ही दिख रहे है. पार्टी में जो कार्यकर्ता दिख रहे हैं, वे कार्यकर्ता कम इन नेताओं के अनुयायी ज़्यादा हैं.

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अस्तित्‍व की लड़ाई लड़ते पहाड़ी कोरवा

छत्तीसगढ़ प्रदेश में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवाओं की संख्या 10 हज़ार से ज़्यादा है. उनके विकास के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसके बाद भी पहाड़ी कोरवा अभी तक विकास की मुख्य धारा से अलग-थलग हैं.

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संविदा नियुक्ति में अफसरों का खेल

डॉ. रमन सिंह ने जब पहली बार मुख्यमंत्री का पद संभाला था तो उन्होंने अपने प्रारंभिक वक्तव्यों में नीति और नीयत की बात कही थी कि उनकी सरकार की नीयत साफ-सुथरी और नीति स्पष्ट रहेगी. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ सरकार का नेतृत्व संभाले सात साल होने वाले हैं.

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नक्‍सलवाद, मीडिया और पुलिसः मीडिया को धमकी हद में रहो

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता आज़ाद की मुठभेड़ के नाम पर आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा की गई हत्या के बाद अमन एवं इंसाफ़ के पैरोकार सदमे और गुस्से में हैं. इनमें बहुतेरे माओवादियों के हिंसा के रास्ते पर उंगली भी उठाते रहे हैं, लेकिन उससे पहले सरकारों की जनविरोधी नीतियों और उसके प्रतिरोध के बर्बर दमन को ज़रूर कठघरे में भी खड़ा करते रहे हैं.

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गैरजिम्‍मेदार मीडिया ताक पर साख

ऐसे ढेर सारे उदाहरण देश के सामने हैं जो यह संकेत देते हैं कि मानव अधिकार और देश हित की समझ को लेकर मीडिया या तो बिल्कुल नासमझ है या हिंदुस्तान की एकता और सामाजिक तानेबाने को तहस-नहस करने की साज़िश में लगी शक्तियों के साथ मिलीभगत का हिस्सा है.

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सांप और आदमी साथ-साथ रहते हैं

सांप एक ऐसा जानवर है जिसका नाम सुनकर ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जिसे अनायास देखकर लोगों के मुंह से अक्सर चीख निकल जाती है. मगर, एक ऐसा गांव भी है जहां के निवासी इसी सांप के साथ रहते हैं. यह प़ढकर आप सोच में पड़ जाएंगे,

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छत्तीसग़ढ में बन रहा है नया जाटलैंड

देश में संभवत: यह पहली बार हो रहा है कि किसी राज्य में दूसरे राज्य के लोग बलपूर्वक कृषि भूमि को बड़े पैमाने पर हथियाने के प्रयास में सफल हो रहे हों. जी हां, छत्तीसगढ़ में एक जाटलैंड प्रभाव में आने के लिए तैयार है. हरियाणवी किसानों का एक बड़ा समूह महानदी एवं अन्य छोटी नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर बलपूर्वक ज़मीनें खरीददता जा रहा है.

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बेरोज़गारों को ठगने में लगे हैं नेता और अफसर

छत्तीसगढ़ के राजनेता अधिकारी और शक्तिशाली कर्मचारी इन दिनों नौकरियों के नाम पर बेरोज़गारों से जबरन वसूली कर रहे हैं. आदिवासियों और बेरोजगारों को विभिन्न पदों पर नियुक्ति देने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल की जा रही है. इसके बाद भी नियुक्ति पत्र गायब हैं.

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आदिवासी लड़कियों की तस्‍करी जारी

जशपुर ज़िले की 97 ग्राम पंचायतों के 258 गांवों की लगभग 3180 लड़कियां घर से लापता हैं. आशंका है कि इन्हें दलालों द्वारा बेच दिया गया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाक़ों में मानव तस्करी का व्यवसाय अनवरत जारी है और सरकार इसके विरुद्ध आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी क़ानून को सख्ती से लागू कर पाने में असफल रही है.

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जल संकट और फर्जी टेंडर

छत्तीसगढ़ में पीने के पानी का संकट जन आंदोलन का कारण बनता जा रहा है. जल ग्रहण क्षेत्र विस्तार के लिए मुख्यमंत्री सहित कई प्रभावशाली व्यक्तियों के श्रमदान की नौटंकी के बाद भी 100 करोड़ के सालाना बजट वाले कोरबा नगर निगम में जल वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगा लगातार बह रही है.

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मोंगरा बांध का पानी किसके लिए?

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले का अंबागढ़ चौकी ब्लॉक. पारा 46 डिग्री को छू रहा था. चिलचिलाती धूप में छह लोगों की टोली पांगरी नामक छोटे से सुदूर आदिवासी गांव से मोंगरा बांध से जुड़े सवाल लेकर सात दिन के पैदल स़फर पर रवाना हुई. प्रचार के लिए किसी ढोल-नगाड़े के बग़ैर और बेहद अनौपचारिक अंदाज़ में. यह सफ़र मोंगरा गांव पहुंच कर ख़त्म हुआ.

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सार-संक्षेप: मध्य प्रदेश-अंधेर नगरी, चौपट राजा

मध्य प्रदेश सरकार में कुछ भी अजूबा नहीं है. हाल ही में खंडवा के विकास आयुक्त कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के स्टेनों ने 32 कर्मचारियों की अवैध रूप से नियुक्ति कर उनसे लाखों रुपयों की अवैध कमाई कर ली, लेकिन मामला प्रकाश में आते ही इसे दबा दिया गया. खंडवा से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 14 नवंबर 2008 को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से संयुक्त आयुक्त के नाम से एक आदेश जारी हुआ,

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श्रमिकों के लिए केवल तीन प्रतिशत कल्‍याण राशि उपलब्‍ध

श्रमिकों के कल्याण के लिए उपलब्ध फंड का उपयोग नहीं किया जा रहा है. जो राशि इनके कल्याण के लिए आती है वह किसी और की जेब में जा रही है और यह सब इसलिए क्योंकि राज्य सरकार ने उसके लिए ज़रूरी राज्य सलाहकार समिति का गठन नहीं किया है. छत्तीसगढ़ सरकार के अलावा स्वयं केंद्र की सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाए जाने वाली योजनाओं केवल औपचारिकता बनाकर रखना चाहती है.

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क्रोकोडाइल पार्क परियोजना रामभरोसे

छत्तीसगढ़ में विकास के नाम पर करोड़ों रुपयों की योजनाओं का भूमि-पूजन एक दिन में तो कर लिया जाता है, परंतु उसके क्रियान्वयन में कई साल लग जाते हैं. राज्य सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैये के कारण कई योजनाएं घोषणा होने के बाद भी लगातार दम तोड़ रही हैं. इनमें से ही एक महत्वपूर्ण योजना क्रोकोडाइल पार्क बनाने से संबंधित है.

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किसानों की आत्‍महत्‍या जारी

मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार भले ही किसान को खुशहाल बनाने और खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाने का प्रचार कर रही है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि राज्य के किसानों की हालत का़फी ख़राब है. हालात ये है कि ग़रीबी तथा ऋण से परेशान होकर किसान आत्महत्या भी कर रहे हैं.

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नक्सल समस्या : राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की ज़रूरत

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में नक्सली हमले में एक साथ 76 लोगों की मौत ने देश में लगातार गंभीर बनती जा रही इस समस्या की ओर फिर से ध्यान खींचा है. नक्सलियों की बढ़ती ताक़त, उनके प्रभाव क्षेत्र में विस्तार और मारक क्षमता के मद्देनज़र यह ज़रूरी है कि हम इस समस्या की गंभीरता पर नए सिरे से विचार करें.

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गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

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आंखों देखा नक्‍सलवाद

विदेशी हथियारों से लैस नक्सलवादी समूहों के पास सरकार से अधिक मज़बूत सूचनातंत्र है. गहराई तक जानें तो, इन नक्सलवादी समूहों के पास पैसा, हथियार, योजना सभी कुछ उम्मीदों से कहीं ज़्यादा है. लेकिन, ये समूह जन विश्वास और जन आस्था धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं. उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के मध्य पड़ने वाले कुछ ऐसे भूभाग हैं जहां से नक्सलवादियों को लगातार गुज़रना पड़ता है.

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ग़ैर-जमानती वारंट के बाद भी अधिकारी बहाल

राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाना वैसे ही मुश्किल हो रहा है. उस पर जो मामले अदालत में चल रहे हैं, उनके दोषियों पर कोई कार्रवाई न कर प्रशासन अप्रत्यक्ष रूप से अपराधियों को संदेश दे रहा है कि क़ानून से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है.

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बीस करोड़ की कोयला चोरी पकड़ी गई

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार तो मानो राज्य प्रशासन की पहचान बन गया है. ऐसा लगता है कि हर सरकारी विभाग चोरी और घोटालों में ही पनप रहा है. इस बार बारी है कोयला विभाग की.

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जलमनी योजना खटाई में

केंद्र सरकार के एक निर्देश पर राज्य के 900 स्कूलों के बच्चों की सेहत के लिए राज्य सरकार अचानक गंभीर हो गई है. इन छात्रों को स्वच्छ जल पिलाने के लिए सरकार ने वाटर फिल्टर लगाने की अनुशंसा को मान लिया है. इस संदर्भ में निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं.

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हीरे और अलेक्‍जेन्‍ड्राइट की तस्‍करी जारी

राजधानी से कुछ ही दूरी पर स्थित हीरे की खदान में पिछले लंबे समय से अवैध उत्खनन का काम धड़ल्ले से जारी है. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास खनिज विभाग का ज़िम्मा भी है, इसके बावजूद सुरक्षा तंत्र इस अवैध खुदाई को रोक पाने में असक्षम है.

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दिल्‍ली का बाबू : सतर्कता आयोग का नया नुस्खा

ऐसा लगता है कि नौकरशाही में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अब खुद ही मोर्चा संभाल लिया है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भ्रष्ट अधिकारियों के यहां आयकर विभाग के छापों की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब आयोग के एक नए फैसले ने उनकी चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है.

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सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

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राष्‍ट्रीय पक्षी मोर संकट में

प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय पक्षी मोर पर संकट मंडराने लगा है. मोर को क़ैद करके उसे शोभा की वस्तु बना लेने का चलन इन दिनों राज्य में गति पकड़ रहा है. वन विभाग कामला इस ओर ध्यान देने के लिए तैयार नहीं है. परिणाम यह है कि मोर इन दिनों संकट में हैं.

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नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र ब़ढते जा रहे हैं

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति अच्छी होने के लाख दावे करे, लेकिन इस हकीकत को सरकार छिपा नहीं सकी है कि राज्य में उग्रवादी नक्सली संगठन अपने पांव पसार रहे हैं. इसी कारण उनका प्रभाव क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है. सन्‌ 2000 में मध्य प्रदेश के पुनर्गठन की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद राज्य में केवल बालाघाट ज़िला ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार के गृह विभाग ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें मंडला, डिंडोरी, सीधी और सिंगरौली जिलों को भी नक्सल प्रभावित मानने का प्रस्ताव भेजा है.

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जनसंख्‍या के आधार पर आदिवासी आरक्षण की मांग

छत्तीसगढ़ राज्य में जनसंख्या के अनुपात में आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए मुसीबत बन गया है.

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के झण्डे तले राज्य के 18 आदिवासी संगठनों ने हाल ही रायपुर में अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर जनमत जागृत करने की जो मुहिम छेड़ी, उसका नतीजा यह हुआ कि भारतीय जनता पार्टी के कई नेता आदिवासी एकता का राग अलापने लगे थे और वे भी राज्य में आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग के पक्ष में खड़े हो गए.

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खेतों में उद्योग स्थापना से असंतोष

छत्तीसगढ़ के केवल एक ज़िले में लाखों एकड़ कृषि भूमि सस्ते दामों में खरीद कर बाहर से आए उद्योगपतियों ने राज्य के कृषि उत्पादन कार्यक्रम को न स़िर्फ प्रभावित किया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र और उसकी अर्थव्यवस्था को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है. प्राकृतिक संसाधनों के विकास के नाम पर अनाधिकृत दोहन का सर्वश्रेष्ठ प्रमाण आज समूचे विश्व में केवल इसी ज़िले में देखने को मिलता है.

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