अब अन्ना की नहीं, आपकी परीक्षा है

अन्ना हज़ारे और जनरल वी के सिंह ने बनारस में छात्रों की एक बड़ी सभा को संबोधित किया. मोटे अनुमान के हिसाब से 40 से 60 हज़ार के बीच छात्र वहां उपस्थित थे. छात्रों ने जिस तन्मयता एवं उत्साह से जनरल वी के सिंह और अन्ना हज़ारे को सुना, उसने कई संभावनाओं के दरवाज़े खोल दिए. पर सबसे पहले यह देखना होगा कि आख़िर इतनी बड़ी संख्या में छात्र अन्ना हज़ारे और वी के सिंह को सुनने के लिए क्यों इकट्ठा हुए, क्या छात्रों को विभिन्न विचारों को सुनने में मज़ा आता है, क्या वे नेताओं के भाषणों को मनोरंजन मानते हैं, क्या छात्रों में जनरल वी के सिंह और अन्ना हज़ारे को लेकर ग्लैमरस क्रेज़ दिखाई दे रहा है या फिर छात्र किसी नई खोज में हैं?

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मेहनत रंग लाएगी, लेकिन…

जहां चाह है वहां राह है, लेकिन अपनी मंज़िल की ओर बढ़ना जितना आसान है उतना ही कठिन भी. कुछ ऐसा ही हाल है अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली) के 13 छात्रों का, जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की. मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी.

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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं.

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जेपी के शिष्य कर रहे है छात्रसंघ का दमन

छात्र राजनीति और जय प्रकाश आंदोलन का दंभ भरते हुए जेपी के कुछ शिष्य आपको संसद संसद और विधानसभा में हमेशा दिख जाएंगे. जेपी के इन होनहार शिष्यों में लालू प्रसाद यादव का नाम सबसे ऊपर है.

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सरकारी और निजी स्कूलों से हिसाब मांगे

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया. इस क़ानून ने आम आदमी को सत्ता में बैठे ताक़तवर लोगों से सवाल पूछने की ताक़त दी. व्यवस्था में लगी दशकों पुरानी ज़ंग को छुड़ाने में मदद की.

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अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए छात्रवृति योजना : मदद के नाम पर धोखा

भारत में मूल शिक्षा को मौलिक अधिकार घोषित किया गया, लेकिन अ़फसोस की बात यह है कि हमारे देश में क़ानून तो बना दिए जाते हैं, पर उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जाता. परिणामस्वरूप क़ानून होते हुए भी आम नागरिक उससे कोई फ़ायदा नहीं ले पाते. शिक्षा का भी कुछ यही हाल है.

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बिहार : युवाओं की सेना सज गई

राजनीतिक प्रयोग की धरती बिहार में पिछले दिनों एक नया प्रयोग हुआ. भले ही इस प्रयोग को अभी ज़मीनी चुनौतियों से गुज़रना है, पर इस अनूठी पहल ने यह सा़फ कर दिया कि सूबे का युवा नेतृत्व अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुका है और वह युवाओं को उनका हक़ दिलाने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है.

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मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को लूट रही है

जॉब अलर्ट के नाम पर पैसे कटने के बाद उसके इसी मोबाइल खाते से पुन: पैसे कटने शुरू हो गए. कभी दो तो कभी तीन रुपये. वह उपभोक्ता फिर परेशान हुआ. दरअसल वह उपभोक्ता अभी छात्र ही है. वह कोई व्यापारी या धनाढ्‌य व्यक्ति नहीं है जो एक-दो रुपये की कोई क़ीमत ही न समझे. उसने फिर कस्टमर केयर से संपर्क साधा. इस बार तो उसे बड़ा आश्चर्यचकित करने वाला जवाब सुनने का मिला. उसे बताया गया कि आपने करीना कपूर अलर्ट लगा रखा है.

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100 साल की उम्र में पीएचडी

यह ख़बर एक प्रेरणा है उनके लिए, जो शिक्षा को ज़रूरी नहीं समझते. कुछ लोग प्रौढ़ शिक्षा की व्यवस्था होने के बावजूद उम्र का बहाना बनाकर अशिक्षित होने की दुहाई देते हैं, लेकिन गुवाहाटी में अध्यापक, वकील एवं न्यायाधीश रह चुके सौ वर्षीय भोलाराम दास फिर से छात्र बने हैं.

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व्यवसायिक कदाचार निरोधी क़ानून की ज़रूरत

कुछ दिनों पहले की बात है, जब एक न्यूज़ चैनल पर एक रोचक, लेकिन हैरान करने वाली ख़बर देखने को मिली. लखनऊ में रहने वाली अलंकृत बारहवीं कक्षा की परीक्षा में शरीक हुई थी. बचपन से ही पढ़ाई में आगे रहने वाली अलंकृत दसवीं की बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल की टॉपर रही थी और एक बार फिर ऐसे ही रिज़ल्ट की उम्मीद कर रही थी,

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दो करोड़ रुपये में दो किताबें : सर्वशिक्षा अभियान के नाम पर लूट

सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त धनराशि का प्रदेश में किस प्रकार खुला दुरूपयोग हो रहा है, इसके लिए यही एक उदाहरण पर्याप्त है. यहां के स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए प्रत्येक स्कूल पुस्तकालय को केवल दो-दो किताबें भेजने के लिए दो करोड़ रूपया खर्च कर दिया.

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स्‍कूलों में बच्‍चों की सुरक्षा का सवाल

हाल में उड़ीसा विधानसभा में एक ऐसे मुद्दे को लेकर गहमागहमी बढ़ गई, जिसका सीधा संबंध ग़रीब आदिवासियों की बेबसी और लाचारी की आड़ में उनके शोषण से जुड़ा था. राज्य सरकार द्वारा संचालित जनजातीय विद्यालय, जो ग़रीब एवं पिछड़े आदिवासी छात्रों को शिक्षा का उजाला दिखाने के लिए खोले गए थे, उनके उत्पीड़न का केंद्र बन गए.

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सार-संक्षेप: मध्य प्रदेश-अंधेर नगरी, चौपट राजा

मध्य प्रदेश सरकार में कुछ भी अजूबा नहीं है. हाल ही में खंडवा के विकास आयुक्त कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के स्टेनों ने 32 कर्मचारियों की अवैध रूप से नियुक्ति कर उनसे लाखों रुपयों की अवैध कमाई कर ली, लेकिन मामला प्रकाश में आते ही इसे दबा दिया गया. खंडवा से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 14 नवंबर 2008 को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से संयुक्त आयुक्त के नाम से एक आदेश जारी हुआ,

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शिक्षा का अधिकार कानून का पालन असंभव

भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2010 से 6 से 14 वर्ष तक के सभी बालक-बालिकाओं के लिए शिक्षा के अधिकार की गारंटी देते हुए सभी को शिक्षित करने का एक महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी क़ानून लागू तो कर दिया है, लेकिन प्रदेश में इस क़ानून का पालन होने में अभी कुछ और साल लग सकते हैं.भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2010 से 6 से 14 वर्ष तक के सभी बालक-बालिकाओं के लिए शिक्षा के अधिकार की गारंटी देते हुए सभी को शिक्षित करने का एक महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी क़ानून लागू तो कर दिया है, लेकिन प्रदेश में इस क़ानून का पालन होने में अभी कुछ और साल लग सकते हैं.

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सफलता तलाशता विवाद

आमिर ख़ान, राजू हिरानी और विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म थ्री इडियट्स ने मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, लेकिन कमाई के साथ-साथ इस फिल्म ने अंग़्रेजी लेखकों के बीच प्रतिष्ठा पाने के लिए संघर्ष कर रहे चेतन भगत को हिंदी जगत में भी लोकप्रिय कर दिया.

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जलमनी योजना खटाई में

केंद्र सरकार के एक निर्देश पर राज्य के 900 स्कूलों के बच्चों की सेहत के लिए राज्य सरकार अचानक गंभीर हो गई है. इन छात्रों को स्वच्छ जल पिलाने के लिए सरकार ने वाटर फिल्टर लगाने की अनुशंसा को मान लिया है. इस संदर्भ में निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं.

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समान शिक्षा प्रणाली ही चाहिए

केंद्र सरकार जनता को गुमराह करने के लिए धन की कमी का हवाला देकर कारपोरेट एवं ग़ैर सरकारी संगठनों की लॉबी से सांठगांठ करने में जुटी हुई है. इससे भविष्य में ग़रीब एवं अमीर के बीच की खाई गहराने के संकेत स्पष्ट नज़र आ रहे हैं. यदि इसी तरह चलता रहा तो आने वाले समय में यह सामाजिक विषमता विद्रोह का रूप धारण कर सकती है.

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आओ बनाएं अपना मध्‍यप्रदेश बढ़ती बेरोजगारी घटते रोजगार

गरीबी और पिछड़ेपन की समस्याओं से त्रस्त मध्य प्रदेश को खुशहाल और संपन्न राज्य बनाने का सुनहरा सपना दिखाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेक इरादों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन नेक इरादों के बावजूद उनमें और उनकी सरकार में संकल्प शक्ति नहीं दिखती है, इसीलिए राज्य के विकास और जनकल्याण की तमाम योजनाएं भारी भरकम खर्च के बावजूद प्रभावशून्य और परिणामशून्य ही नज़र आती हैं.

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झूठ की बुनियाद पर भविष्य की पाठशाला

आदिवासियों के बीच शिक्षा के व्यवसायीकरण की उद्योगपतियों की कोशिश छत्तीसगढ़ में कामयाब होती जा रही है. पूंजीपति और व्यवसायी शिक्षा के सभी स्थापित मापदंडों को तोड़ते हुए पूरी तरह व्यवसायिक शक्ल देने में लगे हुए हैं. राज्य शासन इनके दबाव में शिक्षा की बुनियादी मान्यताओं को ठुकरा कर व्यवसायीकरण के इस कार्यक्रम में बराबर का सहभागी बन चुका है.

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नाज़ुक मोड़ पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध-II

नस्लवाद और भेदभाव की समस्या सभी मुल्कों और समाजों में आम बात है. पर यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि इसे ख़त्म नहीं किया जा सकता तो कम कैसे किया जा सकता है या फिर रोका कैसे जा सकता है? जहां तक सवाल ऑस्ट्रेलिया का है, समाधान को तीन स्तरों पर लागू किया जा सकता है,

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