गंगा बचाओ अभियान : लौटा द नदिया हमार

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित लंगट सिंह कॉलेज में बीते दिनों गंगा समाज के प्रतिनिधियों, साहित्यकारों, कलाकारों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, समाजशास्त्रियों, संस्कृतिकर्मियों,

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अखिलेश राज की रणनीति – आतंकियों पर नरम सत्याग्रहियों पर गरम?

सरकार को जनता का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उसे मुसीबतों से बचाने के लिए रणनीति एवं योजनाएं बनाना उसी की

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जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन

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मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-

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प्रकृति से जु़डी है हमारी संस्कृति

इंसान ही नहीं दुनिया की कोई भी नस्ल जल, जंगल और ज़मीन के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती. ये तीनों हमारे जीवन का आधार हैं. यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि उसने प्रकृति को विशेष महत्व दिया है. पहले जंगल पूज्य थे, श्रद्धेय थे. इसलिए उनकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए मंत्रों का सहारा लिया गया. मगर गुज़रते व़क्त के साथ जंगल से जु़डी भावनाएं और संवेदनाएं भी बदल गई हैं.

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हाथियों का हत्‍यारा कौन

नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जनपद खीरी के दुधवा नेशनल पार्क में पिछले दिनों बिजली के हाईटेंशन तारों के कारण एक साथ तीन हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना में सबसे हृदय विदारक मौत उस गर्भवती हथिनी की हुई, जिसकी कोख से अपरिपक्व बच्चा बिजली के तेज़ झटके लगने के कारण मां के पेट से बाहर आ गया.

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कोस्का: खुद खोज ली जीवन की राह

देश भर के जंगली क्षेत्रों में स्व:शासन और वर्चस्व के सवाल पर वनवासियों और वन विभाग में छिड़ी जंग के बीच उड़ीसा में एक ऐसा गांव भी है, जिसने अपने हज़ारों हेक्टेयर जंगल को आबाद करके न स़िर्फ पर्यावरण और आजीविका को नई ज़िंदगी दी है, बल्कि वन विभाग और वन वैज्ञानिकों को चुनौती देकर सरकारों के सामने एक नज़ीर पेश की है.

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सूरमा देश का पहला वनग्राम बनाः अब बाघ और इंसान साथ रहेंगे

उत्तर प्रदेश के खीरी ज़िले का सूरमा वनग्राम देश का ऐसा पहला वनग्राम बन गया है, जिसके बाशिंदे थारू आदिवासियों ने पर्यावरण बचाने की जंग अभिजात्य वर्ग द्वारा स्थापित मानकों और अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित वन विभाग से जीत ली है. बड़े शहरों में रहने वाले पर्यावरणविदों, वन्यजीव प्रेमियों, अभिजात्य वर्ग और वन विभाग का मानना है कि आदिवासियों के रहने से जंगलों का विनाश होता है, इसलिए उन्हें बेदख़ल कर दिया जाना चाहिए.

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कैलेंडर में कश्मीरा

पहले बिपाशा बसु, फिर मंदिरा बेदी और अब कश्मीरा शाह टॉपलेस हो गईं. यस बॉस, पप्पू पास हो गया, जंगल और सिटी ऑफ गोल्ड जैसी फिल्मों से लोगों के बीच जगह बनाने वाली कश्मीरा बॉलीवुड में बी ग्रेड अभिनेत्री के तौर पर जानी जाती हैं.

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कलम का सच्चा सिपाही

आलोक तोमर के निधन की ख़बर समूचे मीडिया जगत में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई. एक पत्रकार साथी ने जैसे ही मुझे बताया कि कलम के सिपाही आलोक तोमर सदा के लिए सो गए तो मुझे सहसा विश्वास ही नहीं हुआ.

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अपने बूते जिंदा हैं आदिवासी

कैमूर पर्वत श्रृखंला भारत की प्राचीनतम पर्वतमालाओं में से है, जहां पर सोन, घाघरा, कर्मनाशा आदि नदियां बहती हैं. वनों से आच्छादित इस क्षेत्र में आदिवासियों का वास रहा है. लेकिन मुगलों व अंग्रेजों के दख़ल के बाद से इस इला़के के आदिवासियों का जीना दूभर हो गया.

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कार्बेट नेशनल पार्कः धनवानों की थाप पर नाच रहे हैं वनाधिकारी

विश्वप्रसिद्ध जिम कार्बेट नेशनल पार्क की सीमा पर बने होटल रिसार्ट में वन एवं वन्य क़ानून की तमाम पाबंदियों को तार-तार कर जंगल में मंगल मनाने वाले धनवानों का जमावड़ा लगा हुआ है. धनवानों के धन की थाप पर वनाधिकारी नाच रहे हैं, और यह सब कुछ इस नेशनल पार्क में क्र्रिसमस के दिन से न्यू ईयर तक होगा.

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शेर को मिला सवा…

अभी तक आपने शेर को सवा शेर मिलने वाली घटनाएं सुनी होंगी, लेकिन इस बार शेर को सवा कुत्ता मिल गया, जिसने उसे दौड़ा-दौड़ाकर मारा. घटना अमेरिका की है. हुआ यह कि चाड स्ट्रेंज ने अमेरिका के साउथ डकोटा राज्य में स्थित पारिवारिक फ़ॉर्म पर अपने पालतू कुत्ते द्वारा ज़ोर-ज़ोर से भौंकने की आवाज़ सुनी.

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रक्षक की सुरक्षा का सवाल

शेर और बाघों को प्रकृति का वरदान माना जाता है, जिन्हें प्रकृति ने जंगल की रक्षा का दायित्व सौंपा है. अफसोस कि आज जंगल का वही रक्षक स्वयं सुरक्षित नहीं है. उसे सबसे अधिक क्षति मानव ने पहुंचाई. उत्तराखंड में बाघों का 11 हज़ार वर्ष पुराना इतिहास खासा समृद्धशाली है.

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जल, जंगल और जमीन बचाने की मुहिम

राज्य के 250 स्वयंसेवी संगठनों ने एक नई जल नीति बनाकर निशंक सरकार को उसका मसौदा सौंप दिया है. संगठनों का कहना है कि अगर सरकार पहाड़ के पानी को बचाना चाहती है तो उसे जल, जंगल एवं ज़मीन के संदर्भ में जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नीति बनानी और लागू करनी होगी.

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हाथी अब साथी नहीं, आफत बने

जंगलों की बेतहाशा कटाई के कारण वन्यजीवों के लिए भोज्य सामग्री और पेयजल का अभाव हो गया है. नतीजतन भूख और प्यास से बेहाल पशु जंगल से निकलकर बस्तियों में चले आते हैं. और अपने स्वभाव के अनुरूप जान-माल का नुक़सान पहुंचाते हैं. लोग वन्यपशुओं को भगाने के लिए ढोल-नगाड़े से लेकर पटाखों तक का प्रयोग करते हैं, जिसके चलते खौ़फ से ये पशु इधर-उधर भागते हैं.

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वनाधिकार मान्‍यता कानून का दुरूपयोग

वनाधिकार मान्यता क़ानून के अब तक के क्रियान्वयन के अनुभव बताते हैं कि अब भी आदिवासियों और वनों में रहने वाले कबिलाई लोगों को अन्याय से मुक्ति दिलाने की कोशिशें हो रही हैं. विगत डेढ़ सौ सालों में सरकार ने वन विभाग को जंगलों का मालिक बनाने की पुरज़ोर कोशिशें की, परंतु उनकी खिला़फत होती रही.

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सार–संक्षेपः सुंदरी, ब्लैकमेलिंग और अ़फसरशाह

प्रदेश के नौकरशाह तमाम प्रकार के भ्रष्टाचार में तो लिप्त हैं ही, पर अ़फसरों का एक वर्ग सुरासुंदरी के मोह में भी फंसा हुआ है. एक मामला हाल ही में उजागर हुआ है. राजधानी भोपाल के समीप औबेदुल्लागंज में पुलिस के आतंकवादी निरोधक दस्ते ने जबलपुर के एक ऐसे गिरोह को पकड़ने में सफलता पाई है, यह गिरोह सुंदर लड़कियों को अ़फसरों के पास भेजकर उनके अंतरंग संबंधों को खुफिया कैमरे में क़ैद कर अश्लील फिल्में बनाता था.

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जंगल के राजा पर संकट

विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में शेरों की संख्या घटकर केवल 89 बची है. वर्ष 1993 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से बढ़ने वाली यह संख्या अब तक के सबसे कम संख्यांक तक पहुंच रही है. कान्हा प्रबंधन भी शेरों की गणना से मीडिया को दूर रखना चाहता है. इससे यह संकेत मिलता है कि, मध्य प्रदेश जैसा विशाल राज्य अपने टाइगर रिजर्व को संरक्षित रख पाने में कहीं-न-कहीं असफल रहा है.

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वैश्विक पर्यावरण की सुरक्षा

यदि मानवजनित गतिविधियां अपनी मौजूदा गति से जारी रहीं तो औद्योगिक युग से पहले के मुक़ाबले औसत वैश्विक तापमान में सात डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो जाएगी. तापमान में यह वृद्धि 15000 साल पहले, आख़िरी हिमयुग (आइस एज) के बाद पृथ्वी के तापमान में आई वृद्धि से भी ज़्यादा है.

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तस्करों के निशाने पर बेज़ुबान

उत्तर प्रदेश में इन दिनों वन्यजीव तस्करों की तूती बोल रही है. वन भूमि पर अवैध क़ब्ज़े किए जा रहे हैं. जंगल सिमट रहे हैं तो जानवर शहर की ओर निकल आने को बाध्य हैं. और, तस्कर यही चाहते हैं कि जानवर कब उनकी निगाह में आएं और कब उन्हें निशाना बनाया जाए.

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