7 लाख पद रिक्त, भर्ती में 89 फीसदी कमी : फिर भी बेरोजगारों के लिए देश आगे बढ़ रहा है

केंद्र से कांग्रेस सरकार के पटाछेप का एक कारण ये भी था कि वो बेरोजगारी खत्म नहीं कर सकी. नई

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अनुराधा बनीं एएस

1981 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा गुप्ता को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. वह इसी मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रही थीं.

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जनगणना के साथ नज़रिया बदलने की जरुरत

पच्चीस फीट ऊंची रस्सी पर चलता एक इंसान, सड़क के किनारे करतब दिखाता एक बच्चा. शहर के किनारे तंबू डाले कुछ परिवार. आज यहां, कल कहीं और. बिस्तर के नाम पर ज़मीन, छत आसमान. महीने-दो महीने पर शहर बदल जाता है और शायद ज़िंदगी के रंग भी, लेकिन यह कहानी सैकड़ों सालों से बदस्तूर जारी है. यह कहानी है भारत के उन 6 करोड़ घुमंतू और विमुक्त जनजातियों की, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में यायावर कहते हैं.

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वे आजादी के बावजूद आजाद नहीं थे

हिंदुस्तान की एक बड़ी आबादी के बीच एक तबक़ा ऐसा भी है, जिसे आज़ादी के अरसे बाद भी मुजरिमों की तरह पुलिस थानों में हाज़िरी लगानी पड़ती थी. आ़खिरकार 31 अगस्त, 1952 को उसे इससे निजात तो मिल गई, लेकिन उसे कोई खास तवज्जो नहीं दी गई. नतीजतन, उसकी हालत बद से बदतर होती चली गई.

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यह गूजर नहीं किसान आंदोलन है

भारतीय लोकतंत्र का यह अजीब चेहरा है. देश के किसानों को जब भी कोई बात सरकार तक पहुंचानी होती है, उन्हें आंदोलन करना पड़ता है. वहीं देश के बड़े-बड़े उद्योगपति सीधे मंत्रालय जाकर नियम-क़ानून बदल कर करोड़ों का फायदा उठा लेते हैं.

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फ्लोरेंस नाइटिंगल की विरासत

कई सालों तक मुख्यभूमि से दूर अंडमान के छोटे से टापू पर घने जंगल में आदिम जनजातियों के लोगों के साथ रहने के बाद शांति टेरेसा लाकरा अब धाराप्रवाह ओंगी भाषा बोलती हैं. फिलहाल वह ओंगी लोगों के साथ नहीं रहतीं, लेकिन पोर्ट ब्लेयर स्थित जी बी पंत अस्पताल के ट्राइबल वार्ड में इलाज के लिए आने वाले ओंगी जब शांति को देखते हैं तो उनके चेहरे पर ख़ुशनुमा मुस्कान तैर जाती है.

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पहाडी़ कोरबाः जन सुविधाओं से बेद़खल

हज़ारों पहाड़ी कोरबा आदिवासी इन दिनों अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं. करोड़ो रुपये की विकास योजना के बावजूद राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाली इस जनजाति के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपना जीवन यापन कर रहे हैं. सरकारी स्तर पर इनके संरक्षण के लिए कोई भी प्रयास ईमानदारी से नहीं किया जा रहा.

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भूख ने एक और आदिवासी परिवार लीला

केंद्र एवं राज्य सरकार इस बात का दावा करती रही है कि देश में भूख और तंगहाली के कारण कोई मौत नहीं होती. लेकिन मंडला ज़िले के राष्ट्रीय मानव कहे जाने वाले बैगा जनजाति के एक दंपत्ति ने पांच बच्चों के भरण पोषण और भूख से तंग आकर, अपने आप को आग के हवाले कर दिया. मौके के गवाह रहे लोगों का कहना है कि दंपत्ति ने भूख से तंग आकर अपनी जान दी.

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कोरकू बोली का शब्‍दकोष और व्‍याकरण तैयार

मध्य प्रदेश के आदिवासियों की भाषा और बोली का़फी समृद्ध और सक्षम मानी जाती है. इस अलिखित भाषा और आदिवासी बोलियों में ज्ञान-विज्ञान और कथा साहित्य का अनंत और अति प्राचीन भंडार मौजूद है. लेकिन आधुनिकता की आंधी में इन भाषाओं और बोलियों पर दूसरी भाषाओं और बोलियों का ज़ोरदार प्रभाव आक्रमण की तरह घातक सिद्ध हो रहा है.

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