एफडीआई की मंज़ूरी जनता के साथ धोखा है

देश के ख़ुदरा बाज़ार में एफडीआई की मंजूरी किसानों, मज़दूरों एवं छोटे व्यापारियों के लिए फ़ायदेमंद नहीं है, फिर भी

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आईसीएआर-बीकानेरी बीटी कॉटन- बीज नहीं बचा, तो किसान कैसे बचेगा?

आखिर क्या-क्या बचाएं? जल, जंगल, ज़मीन, आकाश या पाताल. बहरहाल, अब बीजों की बारी है. आज किसान मल्टीनेशनल कंपनी के

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यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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पटना गांधी मैदान से शुरू होगी परिवर्तन की लड़ाई

भारतीय लोकतंत्र के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण है. लोगों का इस व्यवस्था से भरोसा उठने और उसके नतीजे के तौर पर जनता के सड़क पर उतरने की घटनाएं लगातार जारी हैं. दामिनी वाली घटना में जिस तरह से युवा लगातार दिल्ली और देश के बाक़ी हिस्सों में आंदोलन कर रहे हैं, इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है.

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जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. राजनीतिक दलों और देश के महान नेताओं की कृपा से यह खतरा हमारी चौखट पर दस्तक दे रहा है, लेकिन वे देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं.

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उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

अन्ना हजारे कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए उड़ीसा दौरे पर गए. उनकी अगवानी करने के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर हज़ारों लोग मौजूद थे, जो अन्ना हजारे जिंदाबाद, भ्रष्टाचार हटाओ और उड़ीसा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के नारे लगा रहे थे. अन्ना ने कहा कि हमारा काम बहुत बड़ा है और किसी को भी खुद प्रसिद्धि पाने के लिए यह काम नहीं करना है.

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अन्ना हजारे नेता नहीं, जननेता हैं

शायद जयप्रकाश नारायण और कुछ अंशों में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद देश के किसी नेता को जनता का इतना प्यार नहीं मिला होगा, जितना अन्ना हजारे को मिला है. मुझे लगा कि अन्ना हजारे के साथ कुछ समय बिताया जाए, ताकि पता चले कि जनता उन्हें किस नज़रिए से देखती है और उन्हें क्या रिस्पांस देती है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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जनता को चिढ़ाइए मत, जनता से डरिए

शायद सरकारें कभी नहीं समझेंगी कि उनके अनसुनेपन का या उनकी असंवेदनशीलता का लोगों पर क्या असर पड़ता है. फिर चाहे वह सरकार दिल्ली की हो या चाहे वह सरकार मध्य प्रदेश की हो या फिर वह सरकार तमिलनाडु की हो. कश्मीर में हम कश्मीर की राज्य सरकार की बात इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि कश्मीर की राज्य सरकार का कहना है कि वह जो कहती है केंद्र सरकार के कहने पर कहती है, और जो करती है वह केंद्र सरकार के करने पर करती है.

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यह जनता की जीत थी

संजय सिंह अन्ना के सहयोगी हैं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अहम कार्यकर्ता भी. 26 अगस्त को जब दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं और आम जनता की भिड़ंत हुई, तब उसके कई दिनों बाद पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई सहयोगियों के खिला़फ मामले दर्ज किए. गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है.

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संसद ने सर्वोच्च होने का अधिकार खो दिया है

भारत की संसद की परिकल्पना लोकतंत्र की समस्याओं और लोकतंत्र की चुनौतियों के साथ लोकतंत्र को और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए की गई थी. दूसरे शब्दों में संसद विश्व के लिए भारतीय लोकतंत्र का चेहरा है. जिस तरह शरीर में किसी भी तरह की तकली़फ के निशान मानव के चेहरे पर आ जाते हैं, उसी तरह भारतीय लोकतंत्र की अच्छाई या बुराई के निशान संसद की स्थिति को देखकर आसानी से लगाए जा सकते हैं.

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आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

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अन्‍ना की हार या जीत

अन्ना हजारे ने जैसे ही अनशन समाप्त करने की घोषणा की, वैसे ही लगा कि बहुत सारे लोगों की एक अतृप्त इच्छा पूरी नहीं हुई. इसकी वजह से मीडिया के एक बहुत बड़े हिस्से और राजनीतिक दलों में एक भूचाल सा आ गया. मीडिया में कहा जाने लगा, एक आंदोलन की मौत. सोलह महीने का आंदोलन, जो राजनीति में बदल गया. हम क्रांति चाहते थे, राजनीति नहीं जैसी बातें देश के सामने मज़बूती के साथ लाई जाने लगीं.

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निगाहें भ्रष्‍टाचार पर, निशाना 2014

अरविंद केजरीवाल और टीम अन्ना के बाक़ी सदस्य जब जुलाई 2012 के अनशन के लिए मांगों की लिस्ट तैयार कर रहे होंगे, तब उन्हें भी यह अहसास रहा होगा कि वे असल में क्या मांग रहे हैं? 15 दाग़ी मंत्रियों (टीम अन्ना के अनुसार), 160 से ज़्यादा दाग़ी सांसदों और कई पार्टी अध्यक्षों के खिला़फ जांच और कार्रवाई की मांग, अब ये मांगें मानी जाएंगी, उस पर कितना अमल हो पाएगा, इन सवालों के जवाब ढूंढने की बजाय इस बात का विश्लेषण होना चाहिए कि अगर ये मांगें नहीं मानी जाती हैं तब टीम अन्ना का क्या होगा, तब टीम अन्ना क्या करेगी?

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बिहार : भूमिहीन किसानों के साथ धोखाधड़ी

सुशासन में क्या किसानों एवं ग़रीबों को लूटा जाता है, सामान्य तौर पर तो ऐसा नहीं माना जाता है, पर कुछ तथ्य एवं दस्तावेज़ बताते हैं कि बिहार में यही हो रहा है. भूमिहीन किसानों को पावर टिलर काग़ज़ों पर दे दिया जाता है और बदले में उसे बैंक का नोटिस पहुंचा दिया जाता है. सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते दलाल मरे हुए लोगों के नाम पर जाली काग़ज़ात पेश कर और फर्ज़ी हस्ताक्षर कर फसल क्षतिपूर्ति की राशि निकाल रहे हैं.

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जनता को अखिलेश से बहुत उम्मीदें हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दो फैसलों पर उनकी आलोचना हो रही है. पहला फैसला उत्तर प्रदेश में शाम सात बजे केबाद बाज़ारों और मॉल को बिजली न देना और दूसरा फैसला, जिसमें उन्होंने विधायकों को विकास निधि से कार खरीदने की अनुमति दी थी. मुख्यमंत्री के ये दोनों फैसले आलोचना का विषय ज़रूर बनते, लेकिन मुख्यमंत्री ने दोनों ही फैसलों को लागू होने के 24 घंटे के अंदर वापस ले लिया.

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सीरिया : गृह युद्ध के आसार

सीरिया की समस्या बढ़ती जा रही है. हिंसा और प्रतिहिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. अरब लीग के विशेष दूत को़फी अन्नान की शांति योजना भी सफल होती दिखाई नहीं दे रही है. को़फी अन्नान ने कहा है कि सीरिया गृह युद्ध की ओर बढ़ रहा है.

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