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साहित्य के ‘अखाड़े’ में ‘कमज़ोर समानांतर साहित्य उत्सव’

दरअसल अगर हम पूरे आयोजन को लेकर समग्रता में विचार करें, तो यह बात समझ में आती है कि इसकी बुनियाद ही गलत रही. बीच में जिस तरह से इसके उद्देश्यों को लेक

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