जय शाह के मामले में RSS के सख्त तेवर, कहा जांच तो होनी चाहिए

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह इन दिनों सुर्ख़ियों में आ गये हैं. बता

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यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

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देशभक्तों और ग़द्दारों की पहचान कीजिए

जब बाबा रामदेव के अच्छे दिन थे, उस समय हिंदुस्तानी मीडिया के कर्णधार उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे. आज जब बाबा रामदेव परेशानी में हैं तो मीडिया के लोग उन्हें फोन नहीं करते. पहले उन्हें बुलाने या उनके साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए एक होड़ मची रहती थी. आज बाबा रामदेव के साथ चेहरा दिखाने से वही सारे लोग दूर भाग रहे हैं. यह हमारे मीडिया का दोहरा चरित्र है.

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किसकी मिलीभगत से चल रहा है नकली नोट का खेल

आरबीआई के मुताबिक़, पिछले 6 सालों में ही क़रीब 76 करोड़ रुपये मूल्य के नक़ली नोट ज़ब्त किए गए हैं. ध्यान दीजिए, स़िर्फ ज़ब्त किए गए हैं. दूसरी ओर संसद की एक समिति की रिपोर्ट कहती है कि देश में क़रीब एक लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में हैं. अब वास्तव में कितनी मात्रा में यह नक़ली नोट बाज़ार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसका कोई सही-सही आंकड़ा शायद ही किसी को पता हो.

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सेहत से खिलवाड़

भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.

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बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था

अब प्रणब मुखर्जी के दूसरे मंत्रियों और प्रधानमंत्री से रिश्ते की बात करें. वित्त मंत्री माना जाता है कि आम तौर पर कैबिनेट में दूसरे नंबर की पोजीशन रखता है. वित्त मंत्रालय इन दिनों मुख्य मंत्रालय (की मिनिस्ट्री) हो गया है, क्योंकि हर पहलू का महत्वपूर्ण पहलू वित्त होता है, इसलिए बिना वित्त के क्लीयरेंस के कोई भी फैसला हो ही नहीं सकता.

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ओमिता पॉल महान सलाहकार

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में उनके चार दशक पुराने राजनीतिक करियर की समीक्षा की जा रही है. देश की वर्तमान खराब आर्थिक हालत और उसमें प्रणब बाबू की भूमिका पर भी खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इस सबके बीच एक और अहम मसला है, जिस पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है. खासकर ऐसे समय में, जबकि बिगड़ी आर्थिक स्थिति को न सुधार पाने के लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा हो. यह सवाल सीधे-सीधे वित्त मंत्री के सलाहकार से जुड़ा हुआ है.

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टीम अन्‍ना ने दिया सबूत हर एक रक्षा सौदे के पीछे दलाल है

हथियारों के दलाल ऐसे लोग हैं, जो होते तो हैं, लेकिन दिखते नहीं. अभी कुछ समय पहले ही एक अंग्रेजी पत्रिका ने इसी विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हथियार दलालों के नाम तो नहीं बताए गए थे, लेकिन इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ कहानी कहने की कोशिश की गई थी. इस रिपोर्ट से इतना तो साफ हो गया था कि भारतीय हथियार दलालों के न स़िर्फ हौसले बुलंद हैं, बल्कि उनके रिश्ते भी बहुत ऊपर तक है.

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बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है, लेकिन स़िर्फ धुएं के रूप में. चौथी दुनिया ने बोफोर्स कांड की एक-एक परत को खुलते हुए क़रीब से देखा है और हर एक परत का विश्लेषण पाठकों के समक्ष रखा है. अभी स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख का एक बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी ने बोफोर्स में रिश्वत नहीं ली थी.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

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दिल्ली का बाबू: बाबुओं का राजनीतिकरण

नौकरशाही का राजनीतिकरण कोई नई बात नहीं है. सभी चुनावों के पहले ऐसा देखा जाता है. उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अपने सचिवालय के दो आईएएस अधिकारियों नवनीत सहगल एवं डी एस मिश्रा की सराहना सरकार के विकासात्मक कार्यों में उनकी भूमिका के लिए की.

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भ्रष्टाचार : सम्प्रभुता पर हमला

सामान्यत: भ्रष्टाचार को एक व्यक्ति के अपराध के रूप में देखा जाता है. इस भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कई एजेंसियां भी बनाई गईं. मसलन, हर एक विभाग में विजिलेंस डिपार्टमेंट, केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो और उनके समकक्ष विभाग, जो दोषी लोगों के खिला़फ कार्रवाई करते हैं, लेकिन सबसे ब़डा सवाल यहां यह है कि आ़खिर जब कोई मामला सामने आता है तभी इस प्रकार की सक्रियता क्यों दिखाई देती है?

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दिल्ली का बाबू: काम के बोझ के मारे

प्रवर्तन निदेशालय की जांच की गति कुछ शिथिल होती दिख रही है. इसका कारण हाई प्रोफाइल मुकदमों से निपटने का दबाव अथवा काम की अधिकता हो सकता है. निदेशालय पर हसन अली मनी लांड्रिंग, 2-जी स्पेक्ट्रम, आईपीएल, कॉमनवेल्थ और हाल में चर्चा में आए 400 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच का भार है.

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सरकार पारदर्शिता की पक्षधर नहीं है

मामला चाहे लोकपाल का हो या फिर काले धन का, दरअसल इन सबके पीछे असल मुद्दा सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का है. आज भ्रष्टाचार को लेकर देश में जो माहौल बना है, उसमें सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों में सुधार की ज़रूरत है. सरकार उल्टा सोचती है. सीबीआई को पारदर्शी बनाने की जगह उसे आरटीआई के दायरे से ही बाहर कर दिया गया.

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सोने का नहीं, जागते रहने का व़क्त है

भारत की राजनीति में संभवत: सुप्रीम कोर्ट के दख़ल से कई आश्चर्यजनक चीज़ें हो रही हैं. पहले ए राजा का जेल जाना, बाद में सुरेश कलमाडी का और फिर कनिमोझी की जेलयात्रा संकेत देती है कि कई और लोग भी इस राह के संभावित राही हैं. पर यह क्यों सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद हो रहा है?

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सरकारी लोकपाल बनाम जन लोकपाल

आखिर क्या है जन लोकपाल? क्यों सरकार जन लोकपाल को लेकर परेशान है? असल में जन लोकपाल बिल एक ऐसा क़ानून है, जो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के लिए किसी ताबूत से कम नहीं साबित होगा. पिछले 42 सालों में यह विधेयक कई बार क़ानून बनते-बनते नहीं बन पाया. यूपीए सरकार ने बिल का मसौदा तैयार तो किया, लेकिन सिविल सोसायटी के लोग और अब तो आम आदमी भी बिल के प्रावधानों से खुश नहीं है.

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बिहारः फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री का फर्जीवाड़ा

राजधानी पटना स्थित अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) अंतर्गत आने वाली विधि विज्ञान प्रयोगशाला भ्रष्टाचार और नाजायज़ कमाई का अड्डा बन गई है. इस प्रयोगशाला में नियम-क़ानूनों को ताक़ पर रखकर बिना किसी जांच के मनमाने तरीक़े से बिसरा जांच प्रतिवेदन निर्गत किए जा रहे हैं.

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रामदेव के खिलाफ संत समाज मुखर

संत समाज के प्रमुख एवं राजग सरकार में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने बाबा रामदेव को ग़रीब विरोधी बताकर उनकी परेशानी बढ़ा दी है. चिन्मयानंद कहते हैं कि रामदेव ने बीते आठ वर्षों में ग़रीबों के कल्याण के नाम पर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए, लेकिन ग़रीबों का कोई कल्याण नहीं किया.

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34वें राष्‍ट्रीय खेलः बदइंतजामी भारी पड़ी

झारखंड में पंचायत चुनावों के बाद राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन मुंडा सरकार की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ गया. कई बार आयोजन की तिथि टलने के बाद राज्य के हाथों से इसकी मेजबानी छिन जाने का खतरा भी उत्पन्न हो गया था.

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जेपीसी की साख दांव पर है

आखिरकार सरकार ने 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए 30 सदस्यीय कमेटी की घोषणा कर ही दी. यह कमेटी वर्ष 1998 से लेकर वर्ष 2009 तक के सभी संबंधित दूरसंचार सौदों की जांच करेगी, साथ ही स्पेक्ट्रम आवंटन एवं दूरसंचार लाइसेंस के मूल्यों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के फ़ैसलों और उनके परिणामों की भी.

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तथ्य फिर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं

किसी की भी संदिगध हालत में हुई मौत के पीछे कोई न कोई कारण ज़रूर होता है. अचानक हुई मौत को अनायास कहकर नहीं टाला जा सकता. अगर कारणों पर सही तरीक़े से जांच हो तो उस मौत के पीछे के कारणों से सहज़ ही पर्दा उठाया जा सकता है.

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आम आदमी और न्यायपालिका

आज हर कोई न्यायपालिका के उत्तरदायित्व की बात कर रहा है. यानी न्यायपालिका से जुड़े हर एक तंत्र को उत्तरदायी कैसे बनाया जा सके. जज इंक्वायरी एक्ट विधेयक में संशोधन की बात चल रही है, जिसमें राष्ट्रीय न्यायिक परिषद गठित करने की बात है, जो आरोपों के घेरे में आए जजों के ख़िला़फ जांच कर सके.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबू अपनी संपत्ति की घोषणा करें

वर्ष 2010 में अवैध रूप से 280 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा करने के मामले में एक आईएएस अधिकारी का नाम आने के बाद अब लगता है कि 2011 में बाबुओं को अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करने के लिए कहा जा सकता है. नीतीश कुमार बिहार में यह अभियान शुरू भी कर चुके हैं और सफल होते दिख रहे हैं.

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बोफोर्स का पूरा सच

भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे मशहूर रहे कांड का नाम बोफोर्स कांड है. इस कांड ने राजीव गांधी सरकार को दोबारा सत्ता में नहीं आने दिया. वी पी सिंह की सरकार इस केस को जल्दी नहीं सुलझा पाई और लोगों को लगा कि उन्होंने चुनाव में बोफोर्स का नाम केवल जीतने के लिए लिया था.

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सिख दंगा पीडि़तः कब मिलेगा न्‍याय

वर्ष 1984 के दंगों के शिकार सिखों को मुआवज़ा दिलाने के लिए दाखिल मूल याचिका के संवेदनशील पन्ने और सात-सात अन्य याचिकाएं अदालत से ग़ायब हैं. मूल याचिका के महत्वपूर्ण पन्ने फाड़ डालने और सात-सात सेकेंडरी रिटें ग़ायब किए जाने जैसे सनसनीखेज मामले की जांच की बात तो छोड़िए, सिखों के मुआवज़े पर जिस भी बेंच ने सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाया, वह बेंच ही ऐन फैसले के वक्त बदल दी गई.

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भ्रष्टाचार के खिला़फ हल्ला बोलें

भ्रष्टाचार. यह शब्द अब आम आदमी को चौंकाता नहीं, क्योंकि यह हमारे समाज में रोज घटित होने वाली एक घटना बन चुका है. आम आदमी यह मान चुका है कि यह एक लाइलाज बीमारी है. चूंकि हम और आप जैसे आम लोग इस बीमारी पर दुखी तो ज़रूर होते हैं, लेकिन इसका इलाज नहीं ढूंढते.

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