अंदर की खबर! पत्नी से ज्यादा हनीप्रीत से मिलने के लिए छटपटा रहा है राम रहीम

नई दिल्ली। हरियाणा की रोहतक जेल में कैद गुरमीत राम रहीम अपने परिवार से ज्यादा हनीप्रीत से मिलने के लिए

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तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ

फ़िराक़ गोरखपुरी बीसवीं सदी के वह शायर हैं, जो जंगे-आज़ादी से लेकर प्रगतिशील आंदोलन तक से जुडे रहे. उनकी ज़ाती ज़िंदगी

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मुलायम से परेशान मुसलमान

बीते दिनों सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपने एक बयान में कहा कि उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश की

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ज़िंदगी से प्यार करती हूँ-जीना चाहती हूँ

अगर आप आयरन लेडी इरोम शर्मिला को देखकर नहीं पिघलते और आपको शर्म नहीं आती, तो फिर आपको आत्म-निरीक्षण की

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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उत्तर प्रदेश : यहां की जेलें यातना गृह हैं

राज्य की जेलों में वास्तविक क्षमता से चार गुना अधिक संख्या में रखे गए बंदी किस तरह का जीवन जीते होंगे, इसकी कल्पना भी डराती है, साथ ही यह आज़ाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए प्रश्नचिन्ह भी है.

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चीन की जेल में भारतीय कारोबारी

दक्षिणी चीन के सेंजेन स्थित पोर्ट टाउन में 22 भारतीय व्यवसायी पिछले डेढ़ वर्षों से नारकीय ज़िंदगी गुजार रहे हैं. उन पर हीरों की तस्करी का आरोप है. इन कारोबारियों के परिवारीजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और उनकी रिहाई सुनिश्चित कराए.

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वाराणसी सेंट्रल जेल से एक क़ैदी की चिट्ठी: मैं मर जाऊंगा या मार दूंगा

वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद धीरज शर्मा नामक एक युवक चौथी दुनिया को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाता है. आख़िर क्यों? दरअसल, ऐसी घटना एक व्यक्ति के मन में विश्वास और अविश्वास की एक साथ चल रही कहानी का ही परिणाम है.

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अनिल अंबानी जेल में क्यों नहीं हैं

आज के ज़माने में अमर सिंह जैसा दोस्त मिलना मुश्किल है. जिनके पास अमर सिंह जैसे दोस्त हों, उनका बाल भी बांका नहीं हो सकता है. कहां मिलते हैं ऐसे लोग, जो दोस्त के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाएं. अमर सिंह ने यही किया, सीना ठोंक कर किया. यह स़िर्फ अमर सिंह ही कर सकते हैं. जन लोकपाल बिल के नाम पर पूरा देश अन्ना हजारे का साथ दे रहा था. सरकार डरी हुई थी. राजनीतिक दल खामोश थे. नेता मीडिया से दूर भाग रहे थे.

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सूचना मांगी तो जेल भेजा

महनार में भाजपा कार्यकर्ता सुबोध राय ने अवर निबंधक की लेट लती़फी का विरोध किया तो अवर निबंधक ने उसकी अनुज्ञप्ति ही रद्द करने का प्रस्ताव ज़िला निबंधन को भेज दिया. जब सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो आवेदन के अगले दिन ही मुकदमा कर जेल भिजवा दिया.

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काल कोठरी में खत्‍म होता बचपन

कहते हैं, क़ानून अंधा होता है. इसके इस अंधेपन की वजह से कितने लोगों की ज़िंदगियों में अंधेरा छा जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण बिहार के मुंगेर ज़िले का मनोज कुमार सिंह है. यह शख्स पिछले तेरह सालों से मंडल कारा मुंगेर की काल कोठरी में उस सज़ा को भुगत रहा है, जो उसके लिए है ही नहीं.

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जेल में मौज

क्‍या कभी आपने जेल में अपराधियों को पिज़्ज़ा खाते देखा है? नहीं न, मगर दिल्ली के एक जेल में आपको ऐसा शख्स मिल जाएगा. वैसे तो हर मुजरिम को जेल का खाना-खाना पड़ता है. मगर अब अपराधी ही हाई-फाई हो तो भला खाना भी तो उसके स्टैंडर्ड का होना चाहिए.

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किस जज ने कितना लूटा

घोटालेबाज़ कर्मचारियों को संरक्षण देने और उन्हें बचाने में ग़ाज़ियाबाद के तत्कालीन ज़िला जज आर एस चौबे का नाम सबसे अव्वल है. न्यायाधीश स्तर के ऊंचे अधिकारी और घोटाला करने वाले सामान्य स्तर के कर्मचारी आशुतोष अस्थाना की मिलीभगत के तमाम काग़ज़ी प्रमाण पुलिस को भी मिले और सीबीआई को भी.

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इंसाफ़ की आवाज़ कहीं से नहीं आती

पाकिस्तान में दो साल पहले स्वतंत्रता के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद सस्ते और तात्कालिक न्याय के लिए बड़े-बड़े दावों के साथ वजूद में आने वाली स्वतंत्र न्यायपालिका से तात्कालिक न्याय की उम्मीद आज भी एक सपना ही है. न्यायपालिका की बहाली के बावजूद पाकिस्तानी अदालतों में लंबित पड़े मुक़दमों की संख्या 13 लाख से अधिक हो चुकी है.

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जेल की कहानीः तबादले के लिए कैदियों को पीटो…

नागपुर के वर्धा रोड स्थित केंद्रीय कारा में अपने गुनाहों की सज़ा काट रहे क़ैदियों को यहां के अधिकारी और कर्मचारी उन्हें बेरहमी से इस क़दर मारते-पीटते हैं कि किसी की उंगली टूट जाती है तो किसी की कमर में मोच आ जाती है. इस केंद्रीय कारा की अव्यवस्था और यहां के अधिकारियों और कर्मचारियों की काली करतूतों का पर्दा़फाश एक क़ैदी ने पत्र लिख कर किया है.

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