बुंदेलखंड में सरकार हुई फेल तो शुरू हो गया फ्रॉडियों का खेल:- आइए, आइए नौकरी ले जाइए

मानव कल्याण विकासवादी संस्थान! आजकल बुंदेलखंड में यह नाम सुर्खियों में है. यह कथित समाजसेवी संस्था बुंदेलखंड में नौकरियां बांट

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स्मार्ट सिटी में शामिल हुआ लखनऊ, वाराणसी समेत यूपी के 13 और शहर होंगे स्मार्ट : स्मार्ट सिटी बनाम स्मार्ट पॉलिटी

2017 के विधानसभा चुनाव में प्रवेश करते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का स्मार्ट सिटी के रूप में बदलने

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अकाल से बेहाल बुंदेलखंड

बीती आठ फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड से आए लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर धरना दिया. बुंदेलखंड

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सोनिया-राजनाथ समेत कई सूरमा दिखाएंगे दम

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का चौथा चरण काफी खास होगा. इस चरण में 30 अप्रैल को कई दिग्गजों की

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हवा का रुख नहीं भांप पाने की बेचैनी

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के लिए छोटे-बड़े तमाम दल हाथ-पैर मार रहे हैं. मेरी कमीज तेरी कमीज से

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खजुराहो : अदभुत मूर्ति शिल्प का बेजो़ड नमूना

खजुराहो के मंदिरों की बात ही निराली है. यहां की मूर्तियां नृत्य और संगीत की छटा से भक्तों का मन

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उत्तर प्रदेश: रामदेव की हुंकार

दिल्ली के रामलीला मैदान हादसे से उबरने के बाद बाबा रामदेव एक बार फिर हुंकार भरने लगे हैं. भारत स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण में बाबा रामदेव का केंद्र के प्रति हमला और भी तेज हो गया है. बाबा की दूसरे दौर की यात्रा वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झांसी से शुरू हुई.

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क्रशरों का कहर: लोगों का जीना दूभर

यूं तो बुंदेलखंड के वीरों की गाथाएं एवं दंतकथाएं विश्वविख्यात हैं, लेकिन यहां के मौजूदा हालात मरता क्या न करता जैसे हैं. गड्‌ढों में तब्दील हो चुके पहाड़ और अंधाधुंध खनन बुंदेलखंड की सबसे बड़ी त्रासदी है. कभी चंदेलकालीन सरोवरों एवं देशावरी पान के लिए प्रसिद्ध बुंदेलखंड आज अपनी पहचान के लिए खनिज उद्योग का मोहताज है. जब-जब बुंदेलखंड की बदहाली का शोर उठा तो शासन-प्रशासन ने खनिज उद्योग का हवाला देकर उसे दबा दिया. बुंदेलखंड सदियों से विंध्य पर्वत श्रंखला का गढ़ माना जाता है, लेकिन अब न केवल पर्वतों का अस्तित्व संकट में है, बल्कि उनकी मौजूदगी ने यहां के किसानों एवं मजदूर तबके की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. क्रशर उद्योग को काल मानने वालों की संख्या अकेले महोबा जनपद में 20 से 25 हज़ार है.

किसी क्षेत्र की बदहाली दूर करने की बात उठे और उद्योगों का जिक्र न हो, यह मुमकिन नहीं, लेकिन जब कोई कहे कि उद्योग ही उस क्षेत्र की बदहाली का कारण है तो यह हजम करना मुश्किल होगा, पर बुंदेलखंड की ज़मीनी हक़ीक़त कुछ ऐसी ही है. झांसी, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा और महोबा में उद्योग की शक्ल अख्तियार कर चुके क्रशर लोगों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं. क्रशरों से उड़ने वाली धूल के चलते हज़ारों बीघा कृषि भूमि बंजर हो चुकी है. विस्फोट के समय पत्थर टूटकर खेतों पर गिरते हैं, नतीजा मुंह का निवाला भी छिन जाता है. रही-सही कसर क्रशरों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले वाहन फसल रौंद कर पूरी कर देते हैं. कुछ लोगों ने धूल से खेती को होने वाले ऩुकसान के बारे में ज़िला कृषि अधिकारी से जन सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो उन्होंने यह तो माना कि पत्थरों की धूल उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर डालती है, लेकिन वह इससे भूमि के बंजर होने संबंधी सवाल का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके.

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पान किसानों पर मौसम की मार

लबों की शान बने बुंदेली पान की खेती उत्तर प्रदेश के ललितपुर, झांसी एवं महोबा और मध्य प्रदेश के सागर, छतरपुर एवं टीकमगढ़ आदि जनपदों में होती है. उत्पादन नगरी पाली ललितपुर में पान की खेती करने वाले किसान आज सरकारी उदासीनता और मौसम की बेरुख़ी के कारण उजाड़ ज़िंदगी जीने को अभिशप्त हैं.

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