तकसीम चौक प्रदर्शन : तुर्की को कमज़ोर करने का षड्यंत्र

तकसीम चौक का विरोध प्रदर्शन पश्‍चिमी मीडिया की नज़र में भले ही मिस्र, लीबिया एवं ट्यूनीशिया की क्रांति जैसा रहा

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क्रांति की राह पर यमन

लीबिया, ट्यूनीशिया और मिस्र में सत्ता के विरुद्ध जनता का आंदोलन सफल रहा. तीनों देशों के तानाशाहों को पराजित होना पड़ा, लेकिन आंदोलन अभी थमा नहीं है. अगली बारी यमन की है. यमन में भी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष हो रहा है. राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता से बेदखल करने के लिए खूनी जंग चल रही है. सऊदी अरब से इलाज कराकर अब्दुल्ला सालेह की वापसी के बाद हिंसा-प्रतिहिंसा का दौर फिर शुरू हो गया है.

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सेना मुग्ध, जनता क्षुब्ध

पहले ट्यूनीशिया, फिर मिस्र के बाद लीबिया में मोअम्मर गद्दा़फी के तानाशाही शासन के विरुद्ध जन विद्रोह भड़का तो लगा कि अब गद्दा़फी का हश्र भी ट्यूनीशिया और मिस्र के शासकों की तरह होगा, लेकिन यहां की कहानी लगातार बदलती जा रही है.

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अरब देशों में परिवर्तन का दौर

मिस्र और ट्यूनीशिया का हालिया घटनाक्रम सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आया. शायद ही किसी को यह उम्मीद रही होगी कि इन देशों में अचानक जनाक्रोश का विस्फोट हो जाएगा, परंतु ज़मीनी हक़ीक़त जानने-समझने वाले लोगों के लिए इन दो देशों में हुई जनक्रांति अनापेक्षित नहीं थी.

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मिस्र का सत्‍ता परिवर्तनः तानाशाही नहीं चलेगी

मिस्र के इतिहास में 11 फरवरी, 2011 का दिन उस समय दर्ज हो गया, जब देश की सत्ता पर 30 वर्षों तक क़ाबिज रहने वाले 82 वर्षीय राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को भारी जनाक्रोश के चलते राजधानी काहिरा स्थित अपना आलीशान महल अर्थात राष्ट्रपति भवन छोड़कर शर्म-अल-शेख़ भागना पड़ा. तमाम अन्य देशों के स्वार्थी, क्रूर एवं सत्तालोभी तानाशाहों की तरह मिस्र में भी राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अपनी प्रशासनिक पकड़ बेहद मज़बूत कर रखी थी.

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पश्चिम एशिया में क्रांतिः लोकतंत्र के लिए मुसलमान

जब भी किसी देश में लोग सड़कों पर बेरोज़गारी, महंगाई, ग़रीबी या किसी अन्य मांग को लेकर सरकार के खिला़फ लामबंद होते हैं तो उसे आंदोलन कहा जाता है. लेकिन जब कोई आंदोलन विद्रोह का रूप ले लेता है, जब किसी आंदोलन का मक़सद सत्ता परिवर्तन होता है तो उसे क्रांति कहते हैं.

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ट्यूनीशिया की ट्यून समझें

अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में अफ़रातफरी का माहौल है. पूरे देश में आपातकाल लागू है. जनता के दबाव में कुर्सी छोड़ने के बाद राष्ट्रपति ज़ैनुल अबेदीन बेन अली अपने परिवार के साथ देश छोड़कर भाग गए हैं. ट्यूनीशियाई जनता अभी भी संतुष्ट नहीं है

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