जैसे ही यह खबर आई कि डाओ कंपनी को भी लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाया गया है, भारत में इस बात को लेकर भोपाल गैस पी़ड़ित संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया, लेकिन एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भारत सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई भी बयान नहीं आया है.
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