देवरिया के नारी संरक्षण गृह में वर्षों से चल रहा था यौनाचार का धंधा, धिक्कार है…

नारी संरक्षण गृहों, संप्रेक्षण गृहों और अनाथालयों में बच्चियों की दुर्दशा का ताजा अध्याय बिहार के मुजफ्फरपुर के बाद उत्तर

Read more

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

Read more

सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

Read more

टीम अन्‍ना ने दिया सबूत हर एक रक्षा सौदे के पीछे दलाल है

हथियारों के दलाल ऐसे लोग हैं, जो होते तो हैं, लेकिन दिखते नहीं. अभी कुछ समय पहले ही एक अंग्रेजी पत्रिका ने इसी विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हथियार दलालों के नाम तो नहीं बताए गए थे, लेकिन इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ कहानी कहने की कोशिश की गई थी. इस रिपोर्ट से इतना तो साफ हो गया था कि भारतीय हथियार दलालों के न स़िर्फ हौसले बुलंद हैं, बल्कि उनके रिश्ते भी बहुत ऊपर तक है.

Read more

राहुल को हार का डर सताने लगा है

उत्तर प्रदेश में मिली हार के बाद राहुल ने अपना दायरा सीमित कर लिया है. राहुल गांधी बात भले ही पूरे प्रदेश की करते दिखते हों, लेकिन सच्चाई यही है कि उनका सारा ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पर लगा है. उन्हें अब इस बात का डर सता रहा है कि अगर हालात नहीं बदले तो 2014 के लोकसभा चुनाव में उनके लिए अपनी सीट बचाना भी मुश्किल हो जाएगा.

Read more

इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

Read more

रुपयों से ख़रीदे गए रुपये

पूंजी बाज़ार वह जगह है, जहां साल भर की कमाई एकमुश्त रकम के बदले ख़रीदी या बेची जाती है. एक हज़ार रुपये में आप कितनी कमाई ख़रीद सकते हैं, यह भाव रोज़ाना बदलता रहता है. और किसी दिन एकमुश्त रकमें कम हैं तो ज़्यादा कमाई ख़रीद सकते हैं.

Read more

सीमांचलः देह के दलदल में फंसी मासूम जिंदगियां

एक ओर जहां पूरे देश में राष्ट्रीय बलिका दिवस मनाया जाता है, वहीं सीमांचल के चंद बे़खौ़फ दलालों द्वारा मासूम नाबालिक लड़कियों से अनैतिक ज़िस्मफरोशी जैसे धंधे करवाकर मानवता को कलंकित और शर्मसार किया जा रहा है.

Read more

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

हर दिन एक न एक नया घोटाला आम जनता के सामने उजागर हो रहा है. अ़फसोस की बात यह है कि यह सब ऐसे प्रधानमंत्री के शासनकाल में हो रहा है, जो स्वयं ईमानदार एवं सज्जन पुरुष हैं. जिस तरह हर दिन एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की असलियत सामने आ रही है, मन में एक सवाल उठता है कि अगर आज गांधी ज़िंदा होते तो क्या करते. शायद सत्याग्रह या फिर भूख हड़ताल के बजाय शर्म से आत्महत्या करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.

Read more

बड़े पत्रकार, बड़े दलाल

पद्मश्री बरखा दत्त और वीर सांघवी. दो ऐसे नाम, जिन्होंने अंग्रेज़ी पत्रकारिता की दुनिया पर सालों से मठाधीशों की तरह क़ब्ज़ा कर रखा है. आज वे दोनों सत्ता के दलालों के तौर पर भी जाने जा रहे हैं. बरखा दत्त और वीर सांघवी की ओछी कारगुज़ारियों के ज़रिए पत्रकारिता, सत्ता, नौकरशाह एवं कॉरपोरेट जगत का एक ख़तरनाक और घिनौना गठजोड़ सामने आया है.

Read more

उत्तर भारत बांग्‍लादेशी दुल्‍हनों का बड़ा बाजार

मां तुम मुझे अब कभी नहीं देख सकोगी. मुझे भूल जाओ. सोच लो कि तुम्हारी बेटी नज़मा अब मर गई. मैं अपने बच्चों को नहीं छोड़ सकती और वे यहां आ नहीं सकते. वे तुम्हें कभी नानी नहीं कह पाएंगे. मेरी ज़िंदगी नर्क हो गई है, पर मैं कुछ नहीं कर सकती, उक्त उद्गार हैं उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में ब्याही तहमीना नामक दुल्हन के, जो सात साल पहले अपनी मां से मिलने बांग्लादेश लौटी थी.

Read more

पश्चिम बंगाल बना दुल्‍हनों का बाजार

बंगाल के सीमावर्ती ज़िलों में ओ पार यानी बांग्लादेश से लाई जाने वाली लड़कियां कटी पतंग की तरह होती हैं, जिन्हें लूटने के लिए कई हाथ एक साथ उठते हैं. इनमें होते हैं दलाल, पुलिस, स्थानीय नेता और पंचायत प्रतिनिधि. अवैध रूप से सीमा पार से आने वाली इन लड़कियों की मानसिक हालत बलि के लिए ले जाई जा रही गाय की तरह होती है.

Read more

अनाज क्रय एवं वितरण प्रणाली में धांधली

सहकारी विपणन संघ द्वारा शासकीय समर्थन मूल्य में खरीदे जा रहे गेहूं के लेन-देन पर दलालों का साया पड़ चुका है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन माफियाओं ने कई अनियमितताएं फैला रखी हैं. परिणाम यह है कि किसान और आम उपभोक्ता शासन की समस्त नीतियों के बाद भी शोषित हैं.

Read more

नगर परिषद मोतिहारी : क्यों न सिर शर्म से झुका लें

तेईस मार्च को मोतिहारी नगर परिषद की बैठक में जो शर्मनाक घटना हुई वह शहर के इतिहास का काला अध्याय बन गई. नगर सभापति, उपसभापति और कार्यपालक पदाधिकारी के पी सिंह की मौजूदगी में नगर पार्षदों ने एक दूसरे पर कुर्सियां फेंकीं एवं मारपीट की, जिसमें कई पार्षद घायल हो गए.

Read more

महिला-बाल व्‍यापार का बढ़ता जाल

बाज़ारवाद के इस युग में मनुष्य भी बिकाऊ माल बन गया है. बाज़ार में पुरूष की ज़रूरत श्रम के लिए है, तो वहीं स्त्री की ज़रूरत श्रम और सेक्स दोनों के लिए है. इसलिए व्यापारियों की नज़र में पुरूष की तुलना में स्त्री कहीं ज़्यादा क़ीमती और बिकाऊ है. राजधानी भोपाल की 66 बालिकाएं और 70 बालक ऐसे हैं जिनका पिछले एक साल से कोई अता-पता नहीं है.

Read more

ट्रक एंट्री का गोरखधंधा

नीतीश सरकार एक ओर जहां राज्य की माली हालत एवं राजस्व की कमी का रोना रोते हुए विकास के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता और बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अधिकारी-दलाल गठजोड़ के कारण राज्य को प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है.

Read more

महिला और बाल व्यापार आदिवासी बालिकाओं की तस्‍करी

मध्य प्रदेश के बालाघाट, छिन्दवाड़ा, मण्डला, डिण्डौरी आदि आदिवासी जनसंख्या बहुल ज़िलों में आए दिन आदिवासी बालिकाओं के अचानक ग़ायब हो जाने की खबरें अब सामान्य घटना हो गई हैं. पुलिस ज़्यादातर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज़ नहीं करती और मजबूरी में यदि रिपोर्ट दर्ज की जाती है तो गुमशुदगी के मद में रिपोर्ट दर्ज़ कर उसे काग़ज़ों में ही द़फन कर दिया जाता है.

Read more