सपा-बसपा का गठबंधन राजनीतिक वजूद बचाने की क़वायद है, जनता को तो फिर मिलना है झुनझुना

उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उप चुनावों से एकजुट हो रहीं विपक्षी पार्टियों के सामने भाजपा की हार

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गुजरात विधानसभा चुनाव पटेलों को पटाने में जुटी पार्टियां

गुजरात में रणभेरी बज चुकी है. पक्ष और विपक्ष की सेनाएं आमने-सामने हैं. सत्ता के लिए शुरू हुए इस महासमर

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: बसपा का ब्राह्मण-दलित कार्ड

कभी बहुजन समाज पार्टी का नारा होता था-तिलक, तराज़ू और तलवार, इनको…बसपा दलितों को बताने से नहीं चूकती थी कि ब्राह्मणों के कारण आज भी दलित आर्थिक और सामाजिक रूप से हाशिये पर खड़े हैं.

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सारा माल लूटकर सरकार कहती है मुसलमान दलितों से भी पिछडे़ हैं

भारत पर मुसलमानों ने लगभग 800 सालों तक शासन किया. इस दौरान कहीं पर उन्होंने क़िले बनवाए तो कहीं सरायख़ाने, कहीं मस्जिदें बनवाईं तो कहीं बाव़िडयां. इन मुस्लिम बादशाहों की गंगा-जमुनी तहज़ीब से भला कौन वाक़िफ़ नहीं है.

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मायावती सरकार के चार साल पूरेः दलित खुश नहीं

वर्ष 2007 में चौथी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाली मायावती का आग़ाज़ जितना अच्छा था, अंजाम उतना ही ख़राब लग रहा है. उनकी सरकार के चार साल पूरे हो गए हैं, अगले साल चुनाव है, लेकिन उनके पास कोई ऐसी उपलब्धि नहीं है, जिसके बल पर वह जनता से वोट मांग सकें. इन चार सालों में मायावती अर्श से फर्श पर आ गई हैं.

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दलित मुस्लिमों और ईसाइयों को अनुसूचित जाति का दर्जा मिला

दलित मुसलमानों और ईसाइयों को अनुसूचित जाति के दायरे में शामिल करने की लड़ाई दिनोदिन लंबी होती जा रही है. रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को 4 साल होने को आए, लेकिन आज भी यूपीए सरकार इस रिपोर्ट की स़िफारिशों को अमल में लाने को लेकर कश्मकश में है, जबकि संसद के अंदर और बाहर दोनों ही जगहों पर सरकार पर रंगनाथ मिश्र आयोग की स़िफारिशें लागू करने का ज़बरदस्त दबाव है. हाल ही में एक बार फिर इस मांग को लेकर मुंबई स्थित कैथोलिक सेक्युलर फोरम, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला और उनसे मांग की कि दलित मुसलमानों और ईसाइयों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए उन्हें जल्द से जल्द अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान किया जाए.

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दलित उद्यमिता का संकल्‍प

सांगली से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर कावधे महान्का ताल्लुका में देवानंद लोंधे का हिंगन गांव है. वह लंबे समय तक अपने गांव से बाहर रहे. कई वर्षों तक देश से भी बाहर रहे. अच्छी नौकरी थी, लेकिन उसके बावजूद दिल में तड़प हमेशा अपने गांव लौटने की बनी रही.

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सोनभद्रः फर्जी मुठभेड़- आदिवासी और दलित निशाने पर

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में 6 वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फर्ज़ी करार देते हुए, उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया. सोनभद्र की अदालत द्वारा सुनाए गए इस फैसले ने स़िर्फ रनटोला मुठभेड़ ही नहीं बल्कि तमाम मुठभेड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

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कांग्रेस और भाजपा का दलित प्रेम

वोट बैंक की राजनीति के कारण आज दलित वर्ग का महत्व इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया हैं क्योंकि बहुजन समाज पार्टी ने हिंदी भाषी राज्यों के दलितों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफलता पाई है. कई क्षेत्र में बसपा के झंडे तले दलितों के गोलबंद होने से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलितों से नाराज हैं, लेकिन मजबूरी में दलित प्रेम का दिखावा कर रही हैं.

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राहुल के सामने चुनौतियों का पहाड़

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह उत्तर प्रदेश में राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं. पहले दलितों की बस्ती में चौपाल लगाकर सुर्खियां बटोरने वाले राहुल ने आजकल कांग्रेस संदेश यात्राओं के माध्यम से पार्टी को मज़बूती प्रदान करने का अभियान छेड़ रखा है. इन यात्राओं को विधानसभा चुनाव 2012 के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है.

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जातिगत जनगणना क्यों उचित है

जब संसद में लालू यादव और मुलायम सिंह यादव ने यह मांग उठाई कि राष्ट्रीय जनगणना में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए तो देश में थोड़ी चिंता हुई. संसद में भाजपा से जुड़े अनंत कुमार ने तो लालू यादव पर हमला ही बोल दिया तथा उन्हें देशद्रोही जैसा साबित करने की कोशिश की. जो लोग देश में जाति व्यवस्था के ख़िला़फ हैं, उन्हें लगा कि कहीं इससे जाति व्यवस्था को बढ़ाने में मदद न मिले.

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दलित, अल्पसंख्यक सशक्तीकरण का दस्तावेज़

एक जमाने में पत्रकारिता समाज के उन लोगों के साथ खड़ी होती थी, जो वंचित और शोषित कहे जाते थे और पत्रकार उनके हक़ के लिए खड़े हो जाते थे. पिछड़ों और दलितों को न्याय दिलाने की पत्रकारिता अब समाचार माध्यमों से विलुप्त होती दिख रही है. टेलीविज़न ने इस तरह की पत्रकारिता का बड़ा नुक़सान किया.

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कर्पूरी स्‍मृति भवन को कर्पूरी की प्रतिमा का इंतजार

समाजवादी चिंतक, ग़रीबों के मसीहा, गुदड़ी के लाल एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली कर्पूरी ग्राम में आज भी लोग पेयजल की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इंदिरा आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, कन्या विवाह योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का सही से क्रियान्वयन नहीं हुआ है.

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कोटा नहीं तो कैसे उठेंगे पिछड़े मुसलमान?

जैसा कि सरकार द्वारा नियुक्त की गई अनेक कमेटियां, जिनमें सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग सबसे प्रमुख हैं, पहले ही बता चुकी हैं कि देश की मुस्लिम जनसंख्या विकास के अधिकांश सामाजिक-आर्थिक मापदंडों पर सबसे निचले पायदान पर खड़ी है. मुस्लिम समुदाय के अंदर पिछड़ी जातियां, जो कुल जनसंख्या की क़रीब 80 प्रतिशत हैं, की हालत सबसे ज़्यादा ख़राब है.

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सिर छिपाने के लिए छत तो दो भाई

पूर्वी कोसी तटबंध के किनारे बसे मसोमात नगिया देवी का घर भी उजड़ गया. अस्थाई झोपड़ी भले ही तत्काल उसे सिर पर छत होने का एहसास करा रही हो, लेकिन वह जगह भी उसे खाली करनी पड़ेगी. पूर्वी कोसी तटबंध पर हो रहे पुनर्निर्माण के चलते चंदेल मरीचा गांव की नगिया मसोमात ही नहीं, बल्कि मोहम्मदपुर के विकलांग ललित यादव, सुपौल ज़िले के लालकन पट्टी के कारी सादा एवं विशुनदेव पासवान के सामने भी सिर छिपाना एक बड़ी समस्या बन चुकी है.

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दलित चिंतन को मिटाने की मुहिम

मध्यकाल के रचनाकारों में कबीर का अध्ययन और मूल्यांकन सबसे जटिल और चुनौती भरा रहा है. साहित्य के इतिहासकारों और आलोचकों के अलावा दूसरे विषयों के विद्वानों ने भी कबीर के अध्ययन में रुचि ली है. कबीर का एक विमर्श लोक में भी बराबर चलता रहा है. वहां भी लंबी परंपरा है.

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सार–संक्षेप : मछलियों की पचास प्रजातियां विलुप्त

मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली पवित्र नदी नर्मदा में प्रदूषण का स्तर घातक स्थिति में पहुंच चुका है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण और छोटे-बड़े बांधों से पानी में ठहराव के कारण कई स्थानों पर मछलियों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है. यह जानकारी नर्मदा समग्र बांद्राभान (होशंगाबाद) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव में आए विशेषज्ञों ने दी.

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सियासी तैयारियों का केंद्र बन रहा है उत्‍तर प्रदेश

राजनेताओं की अचानक बढ़ी चहलक़दमी से उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. दरअसल यह तैयारी आने वाले 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए है. कांग्रेस ने तो लोकसभा चुनाव के बाद ही राहुल गांधी के नेतृत्व में मिशन 2012 पर काम शुरू कर दिया था, लेकिन बसपा ने 15 मार्च 2010 की महारैली में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को आने वाले समय में एकजुट होकर कांग्रेस, समाजवादी और भारतीय जनता पार्टी के कथित दुष्प्रचार से सतर्क रहने की हिदायत देते हुए तैयारी का संकेत दिया है.

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रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट एक लड़ाई संसद से सड़क तक

भारतीय राजनीति में अब ऐसे मुद्दे कम ही देखने-सुनने को मिलते हैं, जिन पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपे. लेकिन, जब चौथी दुनिया में रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट छपी तो सबसे पहले संसद में इस मुद्दे पर आवाज उठी. हंगामा हुआ. संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई. चौथी दुनिया ने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वाह किया तो बदले में राज्य सभा ने चौथी दुनिया के संपादक को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेज दिया.

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दोस्तों ने जॉर्ज को बचाने की अपील की

जॉर्ज फर्नांडिस. एक ऐसा नाम, जो ग़रीब मज़दूरों, दलितों, समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों, मानवाधिकारों और हर तरह के अन्याय के खिला़फ संघर्ष में पिछले क़रीब तीन दशकों से हमेशा सबसे आगे रहा, आज खुद अपनी ज़िंदगी के लिए संघर्ष को मजबूर है. अथवा यूं कहें कि ज़िंदगी नहीं, जॉर्ज अपनी मौत के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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बंगाल के मुसलमानों को दिखी उम्‍मीद की किरण

आख़िरकार बंगाल सरकार ने संसद में रखी गई रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला कर ही लिया. यह फैसला उस समय हुआ है, जब विपक्षी लहर को मोड़ने के लिए माकपा उठ खड़ी हुई है, जिसे बांग्ला में घुरे दाड़ानो कहा जाता है.

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रक्षक से भक्षक बन गई यूपी पुलिस

कुछ वर्ष पहले वाराणसी में एक डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह ने मा़फियाओं से पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्ती़फा दे दिया था. विभाग की कलई खोलने वाले इस पुलिस अधिकारी को राजधानी में देर रात घर का दरवाज़ा तोड़कर गिरफ़्तार किया गया.

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