जागरूकता दल की पांच युवतियों के साथ दुष्कर्म, खुद खौफ में है झारखंड की क़ानून व्यवस्था

पीड़िता का बयान रिकार्ड कर खूंटी के महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. इसके अनुसार पीड़िता नाटक मंडली

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दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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शिक्षा इंसान को इंसान बनाती है

मैं अपने खानदान की ऐसी पहली लड़की हूं जिसने उच्च शिक्षा प्राप्त की. मैंने हाल में स्नातक की डिग्री हासिल की है. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि सभी तरह के विरोधों के बावजूद मेरे ग़रीब माता-पिता उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए लगातार उत्साहित करते रहते हैं. मुझे अपने माता-पिता की मेहरबानी एवं अपनी ख़ुशनसीबी का उस व़क्त और ज़्यादा एहसास होता है, जब मैं अपने गांव सलामतवाड़ी, ज़िला कुपवाड़ा की अन्य अशिक्षित लड़कियों को देखती हूं.

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नीतीश जी सुशासन कहां है

बिहार को आगे बढ़ाने और संवारने का सपना न केवल नीतीश सरकार ने देखा है, बल्कि यह सपना हर एक बिहारी के दिल में पिछले छह सालों से पल रहा है. न्याय की पटरी पर तेजी से विकास की दौड़ती गाड़ी देखना एक ऐसा ख्वाब है, जिसे हर बिहारी संजोए हुए है और चाहता है कि यह जितनी जल्दी हो, हक़ीक़त का लबादा पहन आम लोगों को दिखने लगे.

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सामूहिक विवाह कार्यक्रम: अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो

कहते हैं, जिस दिन घर में बेटी पैदा होती है, उसी दिन से बाप की कमर झुक जाती है. बहुत हद तक यह बात भारतीय समाज के लिए सही भी है, क्योंकि दहेज जैसी प्रथा कब एक विकराल सामाजिक समस्या बन गई, पता ही नहीं चला.

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तथ्य फिर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं

किसी की भी संदिगध हालत में हुई मौत के पीछे कोई न कोई कारण ज़रूर होता है. अचानक हुई मौत को अनायास कहकर नहीं टाला जा सकता. अगर कारणों पर सही तरीक़े से जांच हो तो उस मौत के पीछे के कारणों से सहज़ ही पर्दा उठाया जा सकता है.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 19

नन्हीं सूफी रोज़-रोज़ की तकरार को अपनी आंख से गुज़रते देखती. आनंद का तेज़ गुस्सा देख वह सहमी सी रहती. एक बार कुछ ऐसी ख़ास घटना हो गई, जिससे दरार और बढ़ गई और शिवानी ने अपना सामान बांध मायके जाने का निश्चय कर लिया. आनंद भारती ने कभी किसी को मनाना सीखा ही नहीं था.

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महिलाओं को समान दर्जा समाज की हक़ीक़त नहीं

आज हर कोई भारतीय समाज में महिलाओं को समानता की बात करता है, लेकिन जो बातें की जा रही हैं या जिस बात की वकालत की जा रही है, हक़ीक़त उससे का़फी अलग है. पुरुष प्रधान भारतीय समाज में सामाजिक-आर्थिक प्रतिबंधों के चलते महिलाएं हाशिए पर हैं.

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