आध्यात्मिक एकता से भारत लोकतंत्र का अग्रणी देश बन सकता है

एक सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने का काम हम भगवान या अपने देवताओं की ओर देखे बिना, इस ज़मीन और यहां के

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शिव की महिमा अपरंपार

नागेश्‍वर ज्योतिर्लिंग एक विश्‍वविख्यात प्रसिद्ध मंदिर है. यहां भगवान शिव का सातवां ज्योतिर्लिंग स्थापित है. यह मंदिर गुजरात राज्य में

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व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है

कर्नाटक में कांग्रेस भारी बहुमत से जीत गई और भारतीय जनता पार्टी हार गई. क्या इसका मतलब हम यह निकालें

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बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

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अमेरिका : मार्ग से भटकते नागरिक

संयुक्त राज्य अमेरिका की संस्कृति को मेल्टिंग पॉट संस्कृति कहा जाता है. मतलब यह कि वहां रहने वाले लोग चाहे किसी देश, समुदाय, धर्म या क्षेत्र से आए हों, लेकिन अमेरिका आने के बाद उन्हें उसी संस्कृति का हिस्सा बनकर रहना पड़ेगा, जिसे अमेरिका ने स्वीकार किया है.

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साई अंतर्यामी हैं

भारत में जितने भी योगी, साधु-संन्यासी एवं सिद्ध पुरुष हुए हैं, उनमें शिरडी के साईं बाबा का नाम सर्वोपरि है. उनके भक्तों एवं अनुयायियों की इतनी बड़ी संख्या का प्रमुख कारण है बाबा के प्रति उनका अटूट विश्वास. आज विश्व में कोई ऐसा देश नहीं है, धर्म नहीं है, जाति या वर्ग नहीं है, जिसके लोग श्री शिरडी साईं बाबा के दिव्य नाम से परिचित न हों. वह विश्व की महान आध्यात्मिक विभूति थे.

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चरमपंथ के खतरे और उदारवादी सरकार

नार्वे में एंडर्स बेहरिंग ब्रीविक ने जो किया, वैसा पहले भी कई बार किया गया है. यह कोई पहली घटना नहीं है. 50 साल पहले इसी तरह के उन्मादी दक्षिणपंथी यहूदियों और मार्क्सवादियों को बदनाम किया करते थे और अब वे मुसलमानों और मार्क्सवादियों को बदनाम कर रहे हैं . वहाबियों की तरह ओसामा बिन लादेन उन सभी लोगों से घृणा करता था, जो सुन्नी नहीं थे.

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स्वामी विवेकानंद का संदेश किसे याद है

रवींद्र नाथ टैगोर का 150वां जन्मदिन मनाने के बाद अब बारी है स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन मनाने की. दोनों बंगाल के थे, लेकिन भारत के संदर्भ में दोनों का विजन का़फी अलग था. शिकागो में हुई विश्व धर्म संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद विवेकानंद का़फी प्रसिद्ध हो गए. कदाचित वह आधुनिक भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें वैश्विक प्रसिद्धि प्राप्त हुई थी.

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पूजन और साई बाबा

मूर्ति पूजा, कर्म बंधन, कर्म मार्ग, कर्म फल और पुनर्जन्म पर बाबा की पूर्ण आस्था थी. वह गुरु भक्ति के प्रबल समर्थक थे, ध्यान योग में प्रति पल निमग्न रहते थे. उन्होंने स्वयं बारह वर्ष तक तपस्या की थी और तपस्या के प्रबल पक्षपाती थे. वेदांत के तो वह मूर्तिमान स्वरूप ही थे. चराचर सृष्टि बाबा के वश में थी.

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मन में हो विश्‍वास

एक समय तक शिरडी गांव की गिनती पिछड़े गांवों में हुआ करती थी. उस समय शिरडी और उसके आसपास के लगभग सभी गांवों में ईसाई मिशनरियों ने अपने पैर मज़बूती से जमा लिए थे. ईसाइयों के प्रभाव-लोभ में आकर शिरडी के कुछ लोगों ने भी ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था.

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यह धर्म निरपेक्षता नहीं है

भारतीय इतिहास में तुर्की की एक अहम भूमिका रही है. भारत के विभाजन के केंद्र में भी इसका नाम रहा और इसके बाद भारत द्वारा धर्मनिरपेक्षवाद अपनाए जाने के पीछे भी वजह तुर्की ही था. प्रथम विश्व युद्ध के व़क्त जब ओटोमन सुल्तान की हार हुई, तब उसे अपने खलीफा पद पर भी ख़तरा मंडराता नज़र आया.

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स्‍वर्णिम युग की पदचाप

आजकल मन में सवाल उठने लगे हैं कि जैसा परमात्मा ने वायदा किया था कि जब संसार में धर्म की अति ग्लानि होगी, जब हर पल जीवन कुंठित होता जाएगा, तब मैं आकर स्वर्णिम युग की स्थापना करूंगा. उस वायदे को पूरा करने का समय शायद आ गया है. त्राहि-त्राहि करता मनुष्य अपनों से, अपने से घबराने सा लगा है.

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चार धाम यात्राः अव्‍यवस्‍था के बावजूद श्रद्धालुओं का सैलाब

देव भूमि उत्तराखंड के चार धामों के कपाट छह माह के लिए परंपरागत रूप से खोल दिए गए. सरकार ने यह यात्रा शुरू होने के पहले ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की घोषणा की थी, जो महज़ हवा हवाई सिद्ध हुई. यात्रा के पहले दिन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक हवाई मार्ग से बाबा केदारनाथ के दर्शन करने पहुंचे. यात्री सुविधाओं की कमी के संदर्भ में वह मीडिया से कन्नी काटते रहे.

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जाकी रही भावना जैसी

दृष्टि के बदलते ही सृष्टि बदल जाती है, क्योंकि दृष्टि का परिवर्तन मौलिक परिवर्तन है. अतः दृष्टि को बदलें, सृष्टि को नहीं. दृष्टि का परिवर्तन संभव है, सृष्टि का नहीं. दृष्टि को बदला जा सकता है, सृष्टि को नहीं.

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गुरु के कर स्‍पर्श

जब सद्‌गुरु ही नाव के खिवैया हों तो वह निश्चय ही कुशलता और सरलता पूर्वक इस भवसागर के पार उतार देंगे. सद्‌गुरु शब्द का उच्चारण करते ही मुझे श्री साई की स्मृति आ रही है. ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह स्वयं मेरे सामने ही खड़े हैं और मेरे मस्तक पर उदी लगा रहे हैं. देखो, देखो, वह अब अपना वरद्हस्त उठाकर मेरे मस्तक पर रख रहे हैं.

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बाबा अंतर्यामी हैं

साई बाबा की मूर्ति पूजा, कर्म बंधन, कर्म मार्ग, कर्म फल और पुनर्जन्म पर पूर्ण आस्था थी. वह गुरु भक्ति के प्रबलतम समर्थक थे. ध्यान योग में प्रति पल निमग्न रहते थे. उन्होंने स्वयं बारह वर्ष तक तपस्या की थी और तपस्या के प्रबल पक्षधर थे. वेदांत के तो वह मूर्तिमान स्वरूप ही थे. चराचर सृष्टि साई बाबा के वश में थी. वह सर्वत्र एक ही आत्मा के दर्शन करते थे. प्रकृति तो चैतन्य के अधीन रहती है.

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जिनके लिए यह आख़िरी मौक़ा है

भारत में क्रिकेट अगर धर्म है तो विश्वकप भी महाकुंभ के आयोजन से कम नहीं होता. यह बात स़िर्फ भारत में ही नहीं, दुनिया के लगभग हर देश पर लागू होती है.

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बाबा की सीख

बाबा की हर महिमा के पीछे कोई न कोई शिक्षा ज़रूर छिपी होती है. ऐसी ही एक कहानी आपको सुनाते हैं. शिरडी में प्रति रविवार को बाज़ार लगता है. इसी दिन हेमाडपंत बाबा की चरण-सेवा कर रहे थे. शामा बाबा के बाईं ओर व वामनराव बाबा के दाहिनी ओर थे. इस अवसर पर बूटीसाहेब और काकसाहेब दीक्षित भी वहां उपस्थित थे. तब शामा ने हंसकर अण्णासाहेब से कहा कि देखो, तुम्हारे कोट की बांह पर कुछ चने लगे हुए-से प्रतीत होते हैं.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्‍य

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी- देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं.

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तुष्टिकरण और राजधर्म के तर्क

भारतीय राजनीति में तुष्टिकरण शब्द प्राय: राष्ट्रीय स्तर पर एक गर्म बहस का मुद्दा बनता दिखाई देता है. जहां देश के अन्य राजनीतिक दल भारतीय संविधान के अनुरूप अल्पसंख्यकों, दलितों एवं पिछड़ों के लिए आरक्षण अथवा सामाजिक, सामुदायिक और आर्थिक उत्थान के पक्ष में अपना मत व्यक्त करते रहते हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के हित में उठाए जाने वाले किसी भी क़दम को मुस्लिम तुष्टिकरण हेतु उठाया जाने वाला क़दम कहकर संबोधित करती है.

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शीतकालीन चार धाम यात्राः सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनी आय में वृद्धि के लिए शीतकालीन चार धाम यात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद राज्य के धर्माचार्य इसे धर्म विरोधी क़दम बताते हुए इसका व्यापक विरोध कर रहे हैं. देवभूमि हिमालय में आदिकाल से चार धाम यात्रा की परंपरा चली आ रही है, जिसका संचालन प्राचीन मान्यताओं के आधार पर वैदिक रीति-रिवाज से होता चला आ रहा है.

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साई बाबा की भिक्षा

एक बार शिरडी के साई बाबा से उनकी परमभक्त लक्ष्मी ने पूछा, बाबा अब जबकि द्वारका माई में हर समय धूनी जलती रहती है, सुबह-शाम ग़रीबों की भूख मिटाती यह रसोई क्या आपके लिए दो रोटी नहीं दे सकती?

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