जहां पांडवों ने किए शिव के दर्शन

केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है. केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं.

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चार धाम यात्राः अव्‍यवस्‍था के बावजूद श्रद्धालुओं का सैलाब

देव भूमि उत्तराखंड के चार धामों के कपाट छह माह के लिए परंपरागत रूप से खोल दिए गए. सरकार ने यह यात्रा शुरू होने के पहले ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की घोषणा की थी, जो महज़ हवा हवाई सिद्ध हुई. यात्रा के पहले दिन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक हवाई मार्ग से बाबा केदारनाथ के दर्शन करने पहुंचे. यात्री सुविधाओं की कमी के संदर्भ में वह मीडिया से कन्नी काटते रहे.

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उपेक्षा की शिकार पुजारी अन्ना की राह पर

उत्तराखंड देवभूमि होने के कारण पर्यटन प्रधान राज्य के रूप में विश्वविख्यात है. इसी राज्य में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम एवं पावन केदारनाथ धाम भी हैं, जहां मोक्ष की कामना लेकर प्रति वर्ष लाखों श्रद्धालु हाजिरी लगाने आते हैं. आगामी 8 मई को पावन केदारनाथ धाम के पट श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे.

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शीतकालीन चार धाम यात्राः सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनी आय में वृद्धि के लिए शीतकालीन चार धाम यात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद राज्य के धर्माचार्य इसे धर्म विरोधी क़दम बताते हुए इसका व्यापक विरोध कर रहे हैं. देवभूमि हिमालय में आदिकाल से चार धाम यात्रा की परंपरा चली आ रही है, जिसका संचालन प्राचीन मान्यताओं के आधार पर वैदिक रीति-रिवाज से होता चला आ रहा है.

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देवभूमि के पंच केदार

देवभूमि उत्तराखंड के आस्था एवं पर्यटन के लिए विख्यात गंगोत्री यमुनोत्री, बद्री-केदारनाथ चार-धाम यात्रा की यात्रा सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों हिंदुओं में मोक्ष धाम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इन चार धाम यात्रा के मंदिरों के कपाट को जगत गुरू शंकराचार्य द्वारा शुरू की गई परंपरा के अनुरूप मात्र छ: माह के लिए खोले जाते हैं.

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बद्रीनाथ धाम: सृष्टि का आठवां बैकुंठ

ब्रह्मांड के पावनतम धामों में से एक है बद्रीनाथ धाम. कहा जाता है कि यह स्वयं भगवान विष्णु एवं नारद द्वारा सेवित है. इसी कारण सृष्टि में बद्रिकाश्रम को अष्टम बैकुंठ के रूप में मान्यता हासिल है.

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आदिशक्ति विंध्यवासिनी और विंध्य धाम

विंध्यवासिनी धाम प्रमुख शक्तिपीठों में एक है. मार्कंडेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य में कहा गया है कि जब देव-असुर संग्राम हुआ और देवता राक्षसों से पराजित होने लगे तो वे भगवान विष्णु के पास शरणागत हुए. तब भगवान विष्णु सर्वप्रथम अपने तेज को स्वयं से अलग करते हैं, फिर सभी देवता अपना-अपना तेज भाग देते हैं और उसी से आद्यशक्ति मां प्रकट होती हैं.

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महेंद्रनाथ धामः सिर्फ वादे हाथ लगे

सारण प्रमंडलीय मुख्यालय से क़रीब 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित बाबा महेंद्रनाथ की नगरी महेंद्र नाथ धाम का अपना पौराणिक एवं धार्मिक महत्व है. यहां प्रत्येक माह की त्रयोदशी के दिन हज़ारों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने आते हैं. बताते हैं कि भगवान शिव का यह भव्य मंदिर नरेश महेंद्र ने बनवाया था.

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भगवान भरोसे श्रद्धालु

बाबा वैद्यनाथ धाम में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू हो चुका है. हर बार की तरह इस साल भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बन रही है. महीने भर चलने वाले इस मेले के दौरान पूरा वैद्यनाथ धाम 24 घंटे एक समान रहता है.

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श्रावणी मेला यानी करोड़ों का कारोबार

श्रावणी मेला शुरू हो और देवघर के पेड़े की चर्चा न हो, ऐसा हो नहीं सकता. मेले में मुख्य रूप से बिकने वाली वस्तुओं में बाबा धाम का प्रसाद पेड़ा, चूड़ा, इलायची दाना, सिंदूर, चूड़ी के साथ-साथ लोहे के बर्तन एवं खिलौने काफी प्रसिद्ध हैं.

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श्रावणी मेलाः बहुत कठिन है जलार्पण की डगर

लगातार एक माह तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 26 जुलाई से शुरू हो रहा है. इस अवसर पर बाबा वैद्यनाथ धाम में शिवभक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंजता रहता है. लाखों की संख्या में कांवरिए सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर 110 किलोमीटर पैदल चलने के बाद तीन-चार दिनों में यहां पहुंचते हैं और बाबा वैद्यनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं.

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दूर हो रहे भगवान

देवभूमि उत्तराखंड के देवालयों में विराजमान नारायण आमजन से कितने दूर हो चुके हैं, यह जनता को इन पावनधामों में पहुंचने पर पता चलता है. इन धामों में दर्शन की फीस में इस वर्ष 40 प्रतिशत की सीधे की गई बढ़ोत्तरी ने भगवान और अवाम की दूरी बढ़ा दी है. इस बढ़ोत्तरी से बदरीनाथ धाम में विराजमान नारायण का दर्शन अब धनाढ्‌य ही कर पाएंगे.

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चार धाम यात्रा अव्‍यवस्‍था का शिकार

देवभूमि उत्तराखंड में धर्म एवं आस्था की मिसाल पेश कर पर्यटन को एक पहचान देने वाली चार धाम यात्रा सरकारी उपेक्षा और अव्यवस्था की भेंट चढ़ कर राम भरोसे चल रही है. इसमें प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री-गंगोत्री सहित केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते हैं.

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राष्‍ट्रीय पर्यटन मानचित्र से दूर है बैद्यनाथ धाम

द्वादश ज्योतिर्लिंग रावणेश्वर बैद्यनाथ की नगरी बैद्यनाथ धाम आज भी राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र से दूर है. सावन महीने में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने का विशेष महत्व है, इसलिए साठ लाख से अधिक श्रद्धालु स़िर्फ इसी महीने बाबानगरी आते हैं.

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चित्रकूट इच्‍छाधारी की जन्‍मभूमि है

मध्य प्रदेश का अविकसित कहा जाने वाला क्षेत्र अभी तक विंध्य क्षेत्र ही माना जाता था, परंतु उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के परिणाम स्वरूप इस क्षेत्र में पिछले दिनों अपराधियों तथा असामाजिक गतिविधियों में आश्यर्चजनक रूप से वृद्धि हुई है. इस क्षेत्र के चित्रकूट धाम निवासी इच्छाधारी बाबा का सेक्स रैकेट और गतिविधियां इन दिनों पूरे देश के सनातन धर्मी संतों की मान और प्रतिष्ठा पर एक बदनुमा दाग बन चुकी हैं.

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