स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन मुद्दों पर बोल सकते हैं पीएम मोदी   

नई दिल्ली। बतौर प्रधानमंत्री, पीएम मोदी चौथी बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले के प्राचीर से देश को संबोधित

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प्राथमिक शिक्षा : छह दशक हालत जस की तस

हमारे देश में हर नागरिक को प्राइमरी स्तर तक शिक्षा प्रदान करने की ज़िम्मेदारी सरकार की है. चौदह साल तक की आयु के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने 2009 में राइट टू एजुकेशन एक्ट भी पास किया.

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बीपीएल पर फिक्सिंग का साया

संदेहास्पद गतिविधियों में लिप्त होने के कारण एक पाकिस्तानी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) पर मैच फिक्सिंग के बादल मंडराने लगे हैं. पाकिस्तान के साजिद ख़ान को मीरपुर में चटगांव किंग्स और बारिसाल बर्नर्स के बीच खेले गए मैच के दौरान खिलाड़ियों के क्षेत्र में जाने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया.

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क्या है सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकार अधिनियम हर नागरिक को अधिकार देता है कि वह सरकार से कोई भी सवाल पूछ सके, कोई भी सूचना ले सके, किसी भी सरकारी दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रति ले सके, किसी भी सरकारी दस्तावेज़ की जांच कर सके, किसी भी सरकारी काम की जांच कर सके और किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री का प्रमाणित नमूना ले सके.

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आपके सवाल, समस्या और समाधान

चौथी दुनिया का आरटीआई अभियान जन-जन तक पहुंच रहा है, इसका सबूत हैं पाठकों के पत्र. हमारे पाठक और आम जन अपनी समस्याएं अब हमसे बांटने लगे हैं. यह अच्छी बात है कि देश का आम नागरिक अब जागरूक हो रहा है, सतर्क है और सवाल पूछ रहा है.

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हाथी, चूहा और कांग्रेस

हाथी जंगल का राजा था. उसका वजन एक टन और लंबाई 15 फीट थी. जंगल के अन्य जानवरों को उसकी बात माननी पड़ती थी. वह जंगल में उपद्रव करता और जो दिखाई पड़ता, उसे नष्ट कर देता था. वह एक चूहे के सामने आया.

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भारत ने भी तो बीस कैदी छोडे थे

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आस़िफ अली ज़रदारी ने अपने यहां की जेल में 27 वर्ष से बंद भारतीय नागरिक गोपाल दास को रिहा कर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है. इसलिए उनके द्वारा इस रिहाई के एवज में शुरू की गई वाहवाही लूटने की कोशिश का कोई औचित्य नहीं है.

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रेमंड को माफी अवाम को मंजूर नहीं

अमेरिकी दूतावास कर्मी रेमंड डेविस की गोली से जब दो पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे तो कट्टरपंथियों ने यह कहते हुए चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया था कि यदि अमेरिका के दबाव में रेमंड की रिहाई हुई तो मुल्क में हुकूमत के विरुद्ध आग भड़क उठेगी, लेकिन रेमंड इस्लामी शरीयत के मुताबिक़ ब्लड मनी देकर रिहा हो गया.

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मुसलमान अपनी लड़ाई भारतीय नागरिक बनकर लड़ें: मदनी

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव एवं सांसद महमूद मदनी एक सुलझे हुए नेता हैं. वह स़िर्फ मुस्लिमों की बात नहीं करते, बल्कि पूरे देश के विकास और ख़ुशहाली की बात करते हैं. पिछले दिनों चौथी दुनिया उर्दू की संपादक वसीम राशिद ने विभिन्न मुद्दों पर उनसे एक लंबी बातचीत की.

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असम ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है

असम में किसी भी समय कश्मीर जैसी विस्फोटक स्थिति उत्पन्न हो सकती है. वहां पर यह नारा एक बार फिर ज़ोर पकड़ रहा है कि असम स़िर्फ असमी भाषियों का हैं. मैंने अभी हाल में असम की यात्रा की. मुझे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जाने का अवसर मिला. चार दिवसीय असम प्रवास के दौरान मैंने कम से कम एक हज़ार ऐसे लोगों से मुलाक़ात की, जो अपने हाथ में एक काग़ज़ लिए हुए थे.

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विश्‍व चैंपियन का सम्‍मान करना सीखिए

विश्वनाथन आनंद, शतरंज की दुनिया का एक ऐसा नाम जिसे सारी दुनिया सम्मान की नज़रों से देखती है और जिसकी उपलब्धियों से हर भारतीय गौरवान्वित महसूस करता है. लेकिन ताज्जुब की बात तो यह है कि देश के मानव संसाधन विकास मंत्रालय को यह नहीं पता कि आनंद भारतीय हैं या नहीं.

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पीईडब्‍ल्‍यू ग्‍लोबल एटीट्यूड्स सर्वे रिपोर्टः अमेरिका पाकिस्‍तान का दुश्‍मन है

अमेरिका चाहे जितनी कोशिश करे, लेकिन आम पाकिस्तानी नागरिक उसे अपना दुश्मन ही मानता है. देश में हर दस में से छह नागरिक अमेरिका को दुश्मन की नज़र से देखते हैं. विश्व की एकमात्र महाशक्ति वॉर अगेंस्ट टेरर में पाकिस्तान को अपना सबसे अहम सहयोगी भले ही मानता हो, लेकिन अधिकांश पाकिस्तानी इस युद्ध के ही खिला़फ हैं.

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भारत में नया बांग्‍लादेश गढ़ रहे हैं घुसपैठिए

बंगाल में एक फीलगुड कहावत है, ए पार बांग्ला, ओ पार बांग्ला. आम जनता की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री एवं राज्य के दूसरे बड़े नेताओं को यह कहावत उचरते सुना जाता रहा है. संकेत सा़फ है, ओ पार बांग्ला के निवासी भी अपने बंधु हैं. भाषा एक है, संस्कृति एक है, फिर घुसपैठ को लेकर चिल्ल-पों काहे की. राज्य में भाजपा के अलावा कोई भी दूसरी पार्टी इस मुद्दे को नहीं उठाती.

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पाकिस्‍तान का जिन्‍ना कहीं खो गया है

कुछ दिनों पहले मुझे अर्देशिर कोवासजी का एक आलेख ब्रिंग बैक जिन्नाज पाकिस्तान पढ़ने का मौक़ा मिला, जिसमें उन्होंने राष्ट्र के प्रति जिन्ना के उदारवादी विचारों की चर्चा की थी. कोवासजी का यह दावा है कि यदि पाकिस्तान जिन्ना के बताए रास्ते पर चलता तो देश की सामाजिक दशा मौजूदा हालात से कहीं अलग होती. लेकिन मैं उन्हें बताना चाहूंगी कि जिन्ना के पाकिस्तान की तलाश करते-करते कहीं हम पाकिस्तान के जिन्ना को ही न खो दें.

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सरकार, जनता और मानवाधिकार का भ्रम

भारतीय लोकतंत्र में लोक और तंत्र के बीच जो गहरी खाई है, उससे न स़िर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास हुआ है, बल्कि लोगों के गरिमामय जीवन जीने के लिए ज़रूरी अधिकारों मसलन मानवाधिकार का भी हनन हुआ है. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है और इसमें सरकारी मशीनरी की संलिप्तता भी कम नहीं है. महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) और अफसपा जैसे क़ानून बना कर सरकार आम आदमी को क्या संदेश देनी चाहती है, यह समझ से परे है.

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नाज़ुक मोड़ पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध-II

नस्लवाद और भेदभाव की समस्या सभी मुल्कों और समाजों में आम बात है. पर यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि इसे ख़त्म नहीं किया जा सकता तो कम कैसे किया जा सकता है या फिर रोका कैसे जा सकता है? जहां तक सवाल ऑस्ट्रेलिया का है, समाधान को तीन स्तरों पर लागू किया जा सकता है,

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