आखिर आठ दिन बाद खत्म हुई ट्रकों की हड़ताल, फिर से काम शुरू

20 जुलाई से चल रही ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार आठ दिनों बाद शुक्रवार को खत्म हो गई. इस हड़ताल

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अब टोल प्लाजा पर नहीं लगेगी वाहनों की कतार

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूलने की प्रणाली को लेकर सरकार कुछ नए बदलाव करने का फैसला लिया है. टोल पर

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बच्चों की मौत हमें कटघरे में खड़ा करती है

भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस के आस-पास उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 70 बच्चों की मौत हो गई. क्या देश

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केंद्र सरकार का तोहफा: शहर हो या गांव सभी जगह दौड़ेगी ‘बाइक टैक्सी’

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने लोगों के यातायात और उनके सुख-सुविधा, बजट को ध्यान में रख करके देशभर में

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मोदी के छोटे मंत्रिमंडल का मतलब

पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. क़रीब तीन दशकों के बाद आम चुनाव में किसी राजनीतिक

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एक चुनौतीपूर्ण समय

देश एक कठिन समय से गुज़र रहा है, मुद्दे कई हैं, जिन्हें चुनाव से पहले तक निपटाना है, लेकिन सवाल

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संघ और भाजपा मे जंग

राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष तो बन गए, लेकिन यह राजमुकुट कांटों से भरा है. सवाल यह है

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जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

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षडयंत्र के साये में भाजपा

भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को समझे बिना आने वाले समय में क्या होगा, इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. भारतीय जनता पार्टी संसद में प्रमुख विपक्षी पार्टी है और कई राज्यों में उसकी सरकारें हैं. इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी, जो 2014 के चुनाव में दिल्ली की गद्दी पर दांव लगाने वाली है, इस समय सबसे ज़्यादा परेशान दिखाई दे रही है. यशवंत सिन्हा, गुरुमूर्ति, अरुण जेटली, नरेंद्र मोदी एवं लालकृष्ण आडवाणी के साथ सुरेश सोनी ऐसे नाम हैं, जो केवल नाम नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय जनता पार्टी में चल रहे अवरोधों, गतिरोधों, अंतर्विरोधों और भारतीय जनता पार्टी पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करने वाली तोपों के नाम हैं.

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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आरएसएस का चक्रव्‍यूह

हिंदुस्तान में सदियों से संयुक्त परिवार की प्रथा चली आ रही है. इस व्यवस्था में परिवार का मुखिया जो अक्सर बुज़ुर्ग होता है, उसके ऊपर परिवार को एक रखने और उसे चलाने की ज़िम्मेदारी होती है. आम तौर पर आज भी हिंदुस्तान में ज़्यादातर घरों में पीढ़ी दर पीढ़ी बंटवारा नहीं होता. जबसे पश्चिम का प्रभाव अपने देश पर बढ़ा है, तबसे परिवारों में बंटवारे का चलन बढ़ गया है, पर यह अभी भी अपवाद स्वरूप ही है.

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संघ नहीं चाहता भाजपा मज़बूत हो

यह हमेशा विवाद का विषय रहा है कि विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करके लड़ा जाए या चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाए. ठीक उसी तरह, जैसे लोकसभा चुनाव में कुछ पार्टियां प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करके लड़ती हैं, कुछ पार्टियां ऐसा नहीं करती हैं. 2004 में भाजपा ने आडवाणी जी को प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग कहकर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था.

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नई राजनीति, पुराने नेता

एक पखवाड़े के अंदर भारतीय राजनीति में इतने झंझावात, इतने सारे उतार-चढ़ाव. ऐसा अक्सर नहीं होता, कांग्रेस पार्टी के दो-दो मुख्यमंत्रियों को एक के बाद एक अपना पद छोड़ना पड़े और संसद सप्ताहों तक लगातार बाधित होती रहे. कांग्रेस महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के इस्ती़फे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैय्या के साथ ऐसा क्यों हुआ? कहीं इसकी वजह यह तो नहीं कि दिवंगत मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन ने अपने न्यूज़ चैनल पर सोनिया गांधी का मखौल उड़ाया? अब यदि वह बग़ावत पर उतारू हो गए तो कांग्रेस क्या करेगी? वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के इस्ती़फे के मामले में भारतीय जनता पार्टी को अपनी हैसियत का अंदाज़ा हो गया. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद येदियुरप्पा अपना पद छोड़ने को राजी नहीं हुए. भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को सुशासन के बारे में अभी काफी कुछ जानने की ज़रूरत है, साथ ही पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच उन्हें अपना कद भी बढ़ाना होगा. बिहार विधानसभा चुनाव में राजग गठबंधन की एकतरफा जीत ने भाजपा को चेहरा बचाने का साधन उपलब्ध करा दिया, लेकिन पार्टी यह अच्छी तरह जानती है कि इस जीत का सारा श्रेय नीतीश कुमार को जाता है. भाजपा का इसमें कोई खास योगदान नहीं है और सच तो यह है कि चुनाव प्रचार में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल करने के इसके प्रस्ताव को नीतीश ने सिरे से खारिज कर दिया था और अब वह इसके लिए वाहवाही लूट रहे हैं.

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मांझी ही नाव डुबोए

देवभूमि उत्तराखंड के राजनीतिक परिदृश्य में फिल्मी गीत की यह पंक्ति इस समय राजनीति का हर मर्मज्ञ गुनगुना रहा है कि मांझी जब नाव डुबोए, उसे कौन बचाए. वजह यह है कि देहरादून दौरे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने एक बयान दिया था कि मिशन 2012 के खेवनहार निशंक ही होंगे.

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भाजपा और संघ की दु:ख भरी कहानी

यह कहानी न भारतीय जनता पार्टी की है और न उसे अपना राजनैतिक चेहरा मानने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की है. यह कहानी उस दर्द की है, जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सच्चा स्वयं सेवक और भारतीय जनता पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता पिछले पंद्रह सालों से भोग रहा है.

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गडकरी का हेडमास्‍टर कौन?

नितिन गडकरी, तुम्हारे स्कूल का हेडमास्टर कौन है? जैसा सवाल दागकर देवभूमि उत्तराखंड की शिक्षित जनता ने भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. देहरादून के परेड मैदान में अपेक्षा के अनुरूप जनता की मौजूदगी न देखकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक बार फिर बहक गए और उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस से सवाल कर डाला कि अ़फजल गुरु उसका जमाई लगता है क्या?

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भाजपा और सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद का ढोंग

नितिन गडकरी को जब राजनाथ सिंह के स्थान पर भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था, उसी समय दो बातें बिलकुल स्पष्ट हो गई थीं. एक तो यह कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी ऐसे नेता को भाजपा प्रमुख के पद पर आसीन करना चाहता था, जो संघ की पृष्ठभूमि का हो और संघ एवं उसकी नीतियों के प्रति वफादार रहे.

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गडकरी जी, अध्‍यक्ष की तरह दिखिए

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता का कद किसी उद्योगपति की पत्नी से छोटा हो गया है? भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी आईपीएल के मुंबई और चंडीगढ़ की टीम के मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मौजूद थे. मंच पर और भी लोग थे. जो सबसे प्रमुख अवार्ड था, उसे मिसेज मुकेश अंबानी के हाथों दिया गया और गडकरी के हाथों एक छोटा अवार्ड दिलाया गया.

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दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

उत्तराखंड राज्य के मुखिया डा. रमेश पोखरियाल निशंक पर जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है, उससे इस बात की आशंका ब़ढ जाती है कि सूबे के मुखिया का दामन बेदाग़ नहीं है. यह बात दीगर है कि रंगमंच एवं पत्रकारिता की उपज निशंक अपने दामन पर लगे दाग़ को अपनी दबंगयी से लोकतांत्रिक रास्ते से हट कर धोने का लगातार प्रयास कर रहे है.

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अब संघ के शिकंजे में है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राह पर चलेगी. भाजपा पहले भी संघ के इशारे पर ही चलती थी, लेकिन थोड़ा पर्दा था. नए अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह पर्दा भी उठा दिया है. पहले संघ के लोग कहते थे कि भाजपा के क्रियाकलापों में संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं है और भाजपा के नेता कहते थे कि संघ उनके लिए वैचारिक प्रेरणास्रोत है, भाजपा के काम में संघ की कोई दख़लअंदाज़ी नहीं है.

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अरे! मैं नितिन गडकरी हूं

भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन का मौका था. जन्मदिन की बधाई देने के लिए देश के कई नेता मौजूद थे. इस खास मौक़े पर अनूप जलोटा सभी को भजन एवं ग़ज़लें सुना रहे थे.

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हॉकी के सहारे राजनीति की कोशिश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री इन दिनों सामान्य राजनीतिक परिस्थितियों में भी असामान्य राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश बनाओ यात्रा एवं भारतीय हॉकी टीम के माध्यम से राज्य स्तर पर अपनी पकड़ मज़बूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर एक नई छवि बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है.

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नितिन गडकरी का एजेंडा

नितिन गडकरी ने भाजपा की कमान ऐसे वक्‍त में संभाली है, जब यह पार्टी कई स्‍तर पर, कई दिशाओं से बिखर रही है। बिखराव की सबसे बड़ी वजह संघ और भाजपा के रिश्‍तों को लेकर है। भाजपा पर किसका अधिकार हो, इस बात को लेकर भारतीय जनता पार्टी दो धड़ों में बंटी है।

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