कुछ ने थामा दल का दामन, कुछ के तेवर बरकरार

मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में जार्ज के अलावा बिजेंद्र चौधरी भी निर्दलीय उम्मीदवार थे. वह भी पूर्व विधायक हैं. पिछले चुनाव

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निगाहें भ्रष्‍टाचार पर, निशाना 2014

अरविंद केजरीवाल और टीम अन्ना के बाक़ी सदस्य जब जुलाई 2012 के अनशन के लिए मांगों की लिस्ट तैयार कर रहे होंगे, तब उन्हें भी यह अहसास रहा होगा कि वे असल में क्या मांग रहे हैं? 15 दाग़ी मंत्रियों (टीम अन्ना के अनुसार), 160 से ज़्यादा दाग़ी सांसदों और कई पार्टी अध्यक्षों के खिला़फ जांच और कार्रवाई की मांग, अब ये मांगें मानी जाएंगी, उस पर कितना अमल हो पाएगा, इन सवालों के जवाब ढूंढने की बजाय इस बात का विश्लेषण होना चाहिए कि अगर ये मांगें नहीं मानी जाती हैं तब टीम अन्ना का क्या होगा, तब टीम अन्ना क्या करेगी?

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उत्तर प्रदेश और निर्दलीय उम्मीदवार : कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी वह भी मना

सूबे में गठबंधन राजनीति का दौर क्या आया, निर्दलीयों की अहमियत में चार चांद लग गए, उनका मोल लगने लगा. हालांकि निर्दलीयों के लिए ऐसा अवसर कई बार आया, जब सत्ता की दावेदारी रखने वालों ने उन्हें लालबत्ती से नवाज़ कर कैबिनेट मंत्री तक का दर्जा दिया, लेकिन पूर्ण बहुमत की सरकारों में उन्हें अहमियत नहीं मिली.

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समस्‍तीपुरः इतिहास खुद को दोहराएगा

15वें विधानसभा चुनाव में ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में खड़े दिग्गज, दबंग, बाहुबली और 127 निर्दलीय प्रत्याशियों की क़िस्मत अगले 24 नवंबर को खुलने वाली है.

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किसके दावे में कितना दम है

सीवान ज़िले में चुनाव औसतन शांतिपूर्ण संपन्न हुआ. शहरों, कस्बों और बाज़ारों के चौक-चौराहों और चौपालों पर इस बात की चर्चा ज़ोरों पर रही कि इस बार ज़िले के आठों विधान सभा क्षेत्रों में बाग़ी और निर्दलीय प्रत्याशियों की कड़ी टक्कर में किसके सिर पर विजयश्री का सेहरा होगा.

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दलीय प्रत्‍याशियों की नींद हराम

गया ज़िले के नवसृजित विधानसभा क्षेत्र वजीरगंज में बाग़ी प्रत्याशियों ने दलीय प्रत्याशियों की नींद हराम कर दी है. यदि बाग़ी अपनी उम्मीद के अनुरूप मत पा गए तो इस क्षेत्र में एक बड़ा उलटफेर हो सकता है. बाग़ी प्रत्याशियों से सबसे अधिक परेशानी राजग के भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह को हो रही है.

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चुनावी तड़काः जाना था जापान पहुंच गए…

जाना था जापान पहुंच गए चीन समझ गए ना… यह गीत अक्सर किसी न किसी हस्ती पर लागू होता रहता है. हाल में यह दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर लागू हुआ. दरअसल हुआ यह कि शीला मोहिउद्दीन नगर विधानसभा क्षेत्र में कांगे्रस प्रत्याशी की सभा में प्रचार के लिए जा रही थीं, लेकिन रास्ते में उनका हेलीकॉप्टर भटक गया.

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हराने के लिए हमनाम का सहारा

चुनाव जीतने के लिए नेता हर तरह के हथकंडे आज़मा रहे हैं, लेकिन यह हथकंडा कुछ अलग है. राघोपुर और महनार विधानसभा क्षेत्र में विरोधियों को मात देने के लिए उनके हमनाम उम्मीदवार को चुनावी अखाड़े में उतार दिया गया. राघोपुर में जद-यू प्रत्याशी सतीश यादव से मिलते-जुलते नाम वाले सतीश सिंह को शिवसेना के टिकट पर तो महनार में मुंशी लाल राय के खिला़फ निर्दलीय के तौर पर मुंशी लाल राय को ही खड़ा करा दिया गया.

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समस्‍तीपुरः आर-पार की लड़ाई में फंसे महारथी

समस्तीपुर के 10 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले मतदान के लिए सत्तारूढ़ जदयू-भाजपा गठबंधन जहां प्रमुख विपक्षी राजद-लोजपा गठबंधन से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है, वहीं कांग्रेस भी लालू-रामविलास से अलग होकर इस बार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार कर चुनावी संग्राम को त्रिकोणीय बनाने के लिए प्रयासरत है.

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सारणः चेहरे और हथकंडे दोनों पुराने

संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जय प्रकाश नारायण की जन्मस्थली सारण के दस विधानसभा क्षेत्रों में तीसरे चरण में मतदान होगा. यहां सभी दलों ने अपने मोहरे बिछा दिए हैं. नामांकन के बाद प्रत्याशी प्रचार कार्य में ज़ोर-शोर से जुट गए हैं. सभी दस सीटों पर चुनावी जंग की तस्वीर लगभग सा़फ हो चुकी है. कहीं दो के बीच सीधा टकराव है तो कहीं त्रिकोणीय संघर्ष के आसार.

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चुनावी तड़काः पियरलेस एजेंट से बने मुख्यमंत्री

राजनीति में कौन कहां कब पहुंच जाए, कहा नहीं जा सकता. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण नीतीश कुमार हैं, जो पियरलेस की एजेंटी करते-करते मुख्यमंत्री बन गए. इस बात का खुलासा उनके पुराने मित्र एवं राजद नेता राम बिहारी सिंह ने किया. नीतीश का दामन छोड़ लालू का दामन थामने के बाद राम बिहारी ने कहा कि एक ज़माने में हम और नीतीश सत्तू पीकर सोते थे और साथ में पियरलेस की एजेंटी भी करते थे.

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मोकामाः बाहुबलियों के बीच कड़ी टक्‍कर

मोकामा विधानसभा का चुनाव इस बार प्रशासन के लिए सिरदर्द बनेगा और साथ ही मतदाताओं को भी विस्मित करने वाला साबित होगा. अंडरवर्ल्ड की राजधानी के तौर पर चर्चित रहे मोकामा इलाक़े में बंदूक की गरज दिखाकर समानांतर सत्ता कायम करने वाले बाहुबलियों ने वक़्ती मजबूरी के कारण भले ही चुप्पी साध रखी थी, लेकिन शक्ति के इन पुजारियों को मुख्य परिदृश्य से ग़ायब रहना किसी सूरत में गंवारा नहीं.

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चुनावी तड़काः एक पर एक फ्री का फंडा

पर्व के मौसम में बाज़ार का फंडा राजनीति में भी लागू हो रहा है. हो भी क्यों न, चुनाव भी तो एक पर्व है. निर्दलीय विधायक विजेंद्र चौधरी इसे अच्छी तरह समझ गए. राज्यसभा में रामविलास पासवान को वोट क्या दिया, उन्हें बाज़ार का नियम भी समझा दिया.

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चुनावी तड़काः निर्दलीय उम्मीदवारों का रिकॉर्ड बनेगा

इन दिनों ज़्यादातर नए नेता बग़ावती तेवर अपना रहे हैं. कारण पूछने पर कहते हैं कि बड़े नेता तो बात सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं. क्षेत्र से दल बल के साथ आए नेताजी पटना में डेरा जमाए टिकट के लिए बड़े नेताओं की चिरौरी में दिन गुज़ार रहे हैं.

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टिकट के लिए माथापच्ची

बायसी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सुगबुगाहट तेज़ हो गई है. टिकट लेने के लिए अभी से ही माथापच्ची शुरू हो चुकी है. इस होड़ में जीते हुए उम्मीदवार से लेकर हारने वाले उम्मीदवार तक शामिल हैं. इस क्षेत्र के विधायक रुकनुद्दीन के साथ-साथ पिछले विधानसभा चुनाव में पराजय का मुंह देखने वालों एवं चुनाव लड़ने की मंशा पालने वालों की बेचैनी बढ़ गई है.

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