लाजवाब फनकार गुलज़ार

गीतकार, निर्देशक एवं पटकथा लेखक गुलज़ार को फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड-2013 के लिए चुना गया

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जॉली एलएलबी- क़ानून व्यवस्था पर कटाक्ष

फिल्म जॉली एलएलबी भारतीय न्याय व्यवस्था पर एक व्यंग है. इस फिल्म को पत्रकार से फिल्म निर्देशक बने सुभाष कपूर

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फिल्‍मों में लोक संगीत

भारत गांवों का देश है. गांवों में ही हमारी लोक कला और लोक संस्कृति की पैठ है. लेकिन गांवों के शहरों में तब्दील होने के साथ-साथ हमारी लोककलाएं भी लुप्त होती जा रही हैं. इन्हीं में से एक है लोक संगीत. संगीत हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. संगीत के बिना ज़िंदगी का तसव्वुर करना भी बेमानी लगता है. संगीत को इस शिखर तक पहुंचाने का श्रेय बोलती फिल्मों को जाता है.

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गैंग्स ऑफ वासेपुर

65वें कान्स फिल्म समारोह में निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर का जलवा छा गया. फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर में भारी भीड़ उमड़ते देखी गई. यह अनुराग की पहली ऐसी फिल्म है, जिसे आम जनता के लिए बनाया गया है.

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सरकार खिलाडि़यों से खेल रही है

कुछ दिन पहले पान सिंह तोमर नाम की एक फिल्म आई थी. फिल्म के निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने खिलाड़ी से बाग़ी बनने की एक कहानी को रूपहले परदे पर दिखाया. हिमांशु ने इस फिल्म को उन खिलाड़ियों को समर्पित किया, जिन्होंने देश के गौरव और सम्मान के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया और इसके बाद भी वे गुमनामी और बदहाली में जीने को मजबूर रहे.

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बॉलीवुड को समर्पित पंकज कपूर

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता पंकज कपूर का जन्म 29 मई, 1954 को लुधियाना में हुआ. लुधियाना में बचपन के खुशनुमा दिन बिताने के बाद पंकज कपूर ने दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का रु़ख किया.

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फ़रहान का नया लुक

आपने फिल्म करन अर्जुन का वह डायलॉग ज़रूर सुना होगा, जिसमें सलमान खान शाहरू़ख से कहते हैं भाग अर्जुन भाग, अर्जुन तू भाग… अब हो सकता है, आपको फिल्म इंडस्ट्री में एक नया डायलॉग सुनने को मिले, जिसमें बॉलीवुड के सह कलाकार निर्देशक और एक्टर फरहान अख्तर से कहेंगे, भाग मिल्खा भाग

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फरारी की सवारी

बॉलीवुड फिल्मों की रिलीज के लिए क्रिकेट के आईपीएल सीजन को सुरक्षित नहीं माना जाता है, लेकिन निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने अपनी नई फिल्म शरमन जोशी अभिनीत फरारी की सवारी को इसी दौरान प्रदर्शित करने का फैसला किया है. इसके निर्माता विधु विनोद चोपड़ा हैं, जिन्होंने 3 इडियट्स और मुन्ना भाई जैसी फिल्में बनाई हैं.

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ग़रीबों का राजेश खन्ना

कई पीढ़ी ने उन्हें खोसला का घोसला जैसी फिल्म में एक ईमानदार कलाकार की भूमिका निभाने वाले शख्स के रूप में देखा, लेकिन अपने ज़माने में ग़रीबों का राजेश खन्ना नाम से मशहूर अभिनेता नवीन निश्चल की हैसियत कहीं बड़ी थी. पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट से अदाकारी के गुर सीखने वाले नवीन इस संस्थान के पहले छात्र थे, जिन्हें स्वर्ण पदक मिला.

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राज कंवर के अंतिम संस्कार से शाहरु़ख गायब

फिल्म इंडस्ट्री को किंग ख़ान के रूप में शाहरु़ख खान जैसा दिग्गज, प्रियंका चोप़डा जैसी उत्कृष्ट अभिनेत्री और लारा दत्ता सरीखी सेंसुअल स्टार देने वाले जाने-माने निर्माता निर्देशक राज कंवर ने सिंगापुर के एक हॉस्पिटल में बीते शुक्रवार की सुबह फिल्म जगत और दुनिया को अलविदा कह दिया. का़फी दिनों से राज अपनी बीमारी का सिंगापुर में इलाज़ करा रहे थे.

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घोस्ट

मणिरत्नम, केतन मेहता एवं विशाल भारद्वाज से निर्देशन की एबीसीडी सीखने और फिल्म साथिया के दौरान शाद अली को टेक्निकल सपोर्ट देने वाली पूजा बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म घोस्ट को लेकर खासी उत्साहित हैं.

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सोनम अभय से ख़फ़ा नहीं

आपसी मनमुटाव की वजह से अलग हुए सोनम कपूर और अभय देओल एक बार फिर राजकुमार संतोषी की फिल्म में साथ नज़र आएंगे. इसे दोनों के लिए अच्छा माना जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सोनम अपने और अभय के बीच किसी भी तरह के मनमुटाव से इंकार करती हैं.

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पप्पू कांट डांस साला

फिल्म जाने तू या जाने ना का एक गीत पप्पू कांट डांस साला काफी हिट हुआ. इसी मुखड़े पर सौरभ शुक्ला ने एक फिल्म बनाई है. सौरभ शुक्ला न केवल उम्दा कलाकार, बल्कि बेहतरीन निर्देशक, संवाद लेखक, स्क्रिप्ट राइटर एवं गीतकार हैं.

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अनुष्का सही फैसलों से सफल

बॉलीवुड में नई-नई एंट्री करने वाली कुछ ही ऐक्ट्रेसेस हैं, जो बॉलीवुड में अपने सही फैसलों की वजह से अपनी पहचान बना पाई हैं. कुछ खास ही फिल्मों में करने वाली अनुष्का शर्मा ने अपनी कामयाबी की दास्तां खुद ही लिखी है.

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मिनिषा लांबा का आइटम सॉन्ग

जोकर फिल्म के निर्देशक शिरीष कुंदर ने फैसला लिया है कि वह अपनी फिल्म के लिए मिनिषा लांबा पर एक आइटम सॉन्ग फिल्माएंगे. यह सुन फिल्म की हीरोइन सोनाक्षी सिन्हा असुरक्षा की भावना से घिर गई हैं.

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शक्ल पे मत जा

निर्देशक शुभ मुखर्जी ने देश में हुए आतंकी हमलों पर एक फिल्म बनाई है, जिसका नाम है शक्ल पे मत जा. एक्टर-प्रोड्यूसर हृषिता भट्ट की इस फिल्म की शूटिंग बिना अनुमति के संसद परिसर में हो गई.

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फोर्स

निशिकांत कामत एक बेहद सुलझे हुए निर्देशक हैं, जिनकी पहली हिंदी फिल्म मुंबई मेरी जान को समीक्षकों ने काफी सराहा. इसके पहले उन्होंने मराठी में डोबिंवली फास्ट नामक फिल्म बनाई थी, जिसकी काफी प्रशंसा हुई थी. इसी फिल्म को उन्होंने तमिल में भी बनाया.

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राजकुमार संतोषी : व्यवस्था से असंतोष का सिनेमाई सफर

सलीम-जावेद के बाद अगर किसी ने युवा आक्रोश और उसके बग़ावती तेवर को केंद्र में रखकर फिल्में बनाईं तो वह हैं राजकुमार संतोषी. हालांकि राजकुमार संतोषी ने स़िर्फ एक्शन फिल्में ही नहीं बनाईं, बल्कि कॉमेडी और रोमांटिक कॉमेडी भी रुपहले पर्दे पर पेश करके वाहवाही लूटी. संतोषी की क़िस्मत पिछले कुछ समय से अच्छी नहीं चल रही है.

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हिट शो के लिए तरसते शो मैन-5 : आशुतोष क्यों नहीं खेल रहे जी जान से

आशुतोष गोवारिकर की अगली फिल्म कौन सी होगी. खबर आ रही है कि वह भगवान बुद्ध पर काम कर रहे हैं और बुद्ध के रोल के लिए वह एक्टर की तलाश में हैं. बीच-बीच में यह खबर भी आई कि वह अक्षय कुमार के साथ एक्शन फिल्म बनाना चाहते हैं. उनकी पिछली दो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रही हैं और उन्हें एक हिट की तलाश है.

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हिट शो के लिए तरसते शो मैन- 4 : संजय लीला भंसाली : कैमरे में कमाल, कहानी से कंगाल

संजय लीला भंसाली. आज के दौर के भारत के सबसे महंगे निर्देशक. सिनेमा में लाइट और कलर की जैसी समझ संजय लीला भंसाली को है, वैसी समझ आज के दौर के किसी दूसरे फिल्मकार को नहीं है. संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों में कैमरे के कमाल से विमल रॉय जैसे फिल्मकार की याद दिलाते हैं. भंसाली की हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म गुज़ारिश कामयाबी हासिल नहीं कर सकी.

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हिट शो के लिए तरसते शो मैन- 3

बेहतरीन और बेहूदा एक-दूसरे के विलोम शब्द हैं. जिसे आप बेहतरीन से परिभाषित करेंगे, उसके लिए बेहूदा शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते… और जो बेहूदा है, उसके साथ बेहतरीन शब्द नहीं जोड़ सकते. लेकिन फिल्मकार राम गोपाल वर्मा की फिल्में स़िर्फ इन्हीं दो शब्दों से परिभाषित की जा सकती हैं. या तो उन्होंने बेहतरीन फिल्में बनाई हैं या फिर बेहूदा.

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हिट शो के लिए तरसते शौ मैनः कैसे ब्‍लैक एंड व्‍हाइट हुए कलरफुल सुभाष घई

वर्ष 1993 में उस व़क्त के सबसे बड़े निर्देशक सुभाष घई की फिल्म आई खलनायक. संजय दत्त स्टारर इस फिल्म ने ख़ूब वाहवाही बटोरी, लेकिन इसकी बड़ी वजह फिल्म के साथ जुड़े विवाद रहे. चाहे वह संजय दत्त का जेल जाना रहा हो या फिर इसका गीत चोली के पीछे… फिल्मी पंडितों और दर्शकों को इसमें वह बात नज़र नहीं आई, जो सुभाष घई को उस दौर में राजकपूर का खिताब दिलाती थी.

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बॉलीवुड: सब कुछ बदल गया है

एक व़क्त था, जब हिंदी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक ही मीडिया से बातचीत करते थे और फिल्में बढ़िया कारोबार कर जाती थीं. फिल्म के प्रोमोशन का ख़र्च निर्माण का एक-दो फीसदी हुआ करता था और उसकी मार्केटिंग केवल इतनी होती थी, जितनी चर्चाएं हुआ करती थीं

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कैसा रहा बॉलीवुड का बीता साल

बॉलीवुड के लिए साल 2010 मिला-जुला रहा. 2009 की तुलना में 2010 में फिल्में ज़्यादा हिट हुईं. मुन्नी बदनाम हुई, शीला की जवानी जैसे हिट आइटम नंबर्स के साथ कई निर्माता-निर्देशकों के ड्रीम प्रोजेक्ट वाली फिल्मों की रिलीज ने इस साल को बॉलीवुड के लिए फ्रूटफुल बनाया.

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निर्माता-निर्देशक- 4: हर बदलाव अच्‍छा नहीं होता

समय के साथ चलना हम सब की मजबूरी है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम अपनी जड़ों से ही दूर हो जाएं, लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का कुछ ऐसा ही हाल है. व़क्त गुजरने के साथ बॉलीवुड में नई-नई तकनीकें आईं, दर्शकों का नया समूह जुड़ा, नए जमाने के युवा निर्माता-निर्देशक आए.

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निर्माता-निर्देशक-3

निर्माता-निर्देशकों के एकछत्र राज से बॉलीवुड आज़ाद हो चुका है. उदारीकरण के दौर का साक्षी बनकर बॉलीवुड अब ख़ुद में एक ताक़त बनकर उभर चुका है. इस बदलाव के पीछे इंडस्ट्री की आर्थिक स्थिति का बड़ा योगदान है. इससे फिल्मों के रूप-स्वरूप में भी का़फी परिवर्तन हुआ है.

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निर्माता-निर्देशक-2: उदारीकरण, अंडरवर्ल्‍ड और लालच की मार

कल का निर्माता-निर्देशक, जो कभी अभिनेताओं को अपने इशारों पर नचाता था, आज उन्हीं के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर है. इसी मुद्दे पर पिछले अंक में लिखा गया कि काले धन और तकनीक की वजह से भी निर्माता-निर्देशकों की भूमिका सिमटती चली गई और अभिनेताओं का रोल लंबा और लंबा होता गया.

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