राजेश खन्ना: क़िस्मत से मिली कामयाबी

हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपने सशक्त अभिनय के ज़रिये उन्होंने कामयाबी

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क्या इस समर्पण से शांति आएगी

यूं तो पूर्वोत्तर में कार्यरत अधिकतर अलगाववादी संगठन धीरे-धीरे शांति के रास्ते पर आने के लिए तैयार हो रहे हैं

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फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल फर्रु़खाबाद पहुंच तो जाएंगे, लेकिन वापस कैसे लौटेंगे. इसका मतलब या तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर पत्थर चलते या फिर गोलियां चलतीं, दोनों ही काम नहीं हुए.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

मध्य प्रदेश का कटनी ज़िला भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण बेशक़ीमती खनिज संपदा के प्रचुर भंडारण सहित जल संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अपने इस्पात उद्योगों हेतु आवश्यक गुणवत्ता पूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले चूना पत्थर (लाईम स्टोन) की खदानें यहां के ग्राम कुटेश्वर में स्थापित की गई थीं.

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ट्रेड यूनियन की आवश्यकता और इतिवृत्त

किस तरह मज़दूर पूंजीवादी उद्योगपतियों का मुक़ाबला कर सका, इसका इतिवृत्त है. यह ज़ाहिर था कि कोई स्त्री या पुरुष, जो काम करता हो, नौकरी करता हो, अकेले जाकर मालिक के साथ न बहस कर सकता है, न मुक़ाबला. मालिकों का नपा-तुला यही जवाब होता है कि अगर इस मज़दूरी और स्थिति में तुम काम नहीं करोगे तो तुम्हारे भाई दूसरे सैकड़ों करने वाले तैयार हैं.

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बहाली पर बवाल

रोज़ी-रोटी का इंतजाम युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है. यही इंतजाम अगर उन्हें अपने प्रदेश या फिर अपने शहर और गांव में मिल जाए तो क्या कहने. रेलवे और बैंक में घटती नौकरियों के दौर में नीतीश कुमार की सरकार ने प्रदेश के युवाओं को इसी तरह का सपना दिखाया.

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नौकरी करनी है तो वजन घटाओ

अगर आपका वजन ज़्यादा है तो उसे कम करना शुरू कर दीजिए, वरना आप परेशानी में फंस सकते हैं, क्योंकि ओवरवेट के कारण तुर्की एयरलाइंस ने 28 फ्लाइट अटेंडेंट्‌स को विमान से नीचे उतार दिया है और उन्हें हिदायत दी है कि वे अपना वजन जल्द से जल्द कम करें.

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मैं कौन हूं

जब भी अपने बारे में सोचा तो ख़ुद को किसी न किसी किरदार में देखा. किसी ने पूछा- आप कौन हो? जवाब में कई पहचानें थीं. मेरा नाम, रुतबा, मेरा रिश्ता या मेरा लिंग- स्त्री या पुरुष. कभी मैं पिता हूं, कभी मैं किसी कंपनी का चेयरमैन हूं. कभी बेटा हूं तो कभी स़िर्फ नाम. इनके अलावा तो कोई और पहचान है ही नहीं.

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जातिगत आरक्षण : व्यवस्थागत खामियों का प्रतिबिंब

सरकारी एवं ग़ैर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा बार-बार हमारे सामने आता रहा है. ठीक उसी दैत्य की तरह, जो हर बार अपनी राख से ही दोबारा पैदा हो जाता है. इस मुद्दे पर विचार-विमर्श की ज़रूरत है. हमें यह सोचना होगा कि क्या आरक्षण वाकई ज़रूरी है.

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बाबुओं पर नीतीश की नकेल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के करोड़पति नौकरशाहों (इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं) पर लगाम कसने की कवायद में अब अपना अगला कदम उठाने की तैयारी में हैं. उनकी यह कवायद यदि कामयाब होती है तो भ्रष्ट नौकरशाहों को न केवल अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने पर उनकी संपत्ति भी जब्त हो जाएगी.

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आस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमले की हकीकत

भारत सरकार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय छात्रों की ज़रा भी परवाह नहीं कर रही है. अगर ऑस्ट्रेलिया में रंगभेद है तो सरकार भारतीय छात्रों को पढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया क्यों जाने दे रही है? अगर ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की पढ़ाई-लिखाई अंतरराष्ट्रीय स्तर की है और भारतीय छात्र वहां से पढ़ाई के बाद नौकरी-बाज़ार में सशक्त दावेदारी पेश करते हैं, तो क्या भारत सरकार की यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती है कि वह बाहर जाने वाले छात्रों का समुचित आंकड़ा अपने पास रखे.

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