देश का लोकतंत्र और नौजवान

हमारा देश भूलने की विधा का महारथी है. किसी भी चीज़ को हम बहुत जल्दी और बहुत आसानी से भूल जाते हैं. इनमें भुलाने वाले विषय होते हैं, लेकिन वे विषय भी होते जिन्हें कभी भुलाना नहीं चाहिए, याद रखना चाहिए. यह भी कह सकते हैं कि हम अपने पुरुषार्थ को ही भूल जाते हैं. अन्ना हजारे की पूरी कहानी में कुछ ऐसा ही हुआ. अन्ना हजारे का साथ देश भर के लोगों ने दिया.

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