पेड़ पर पैसा उगाने की कला

अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले जापान की एडवरटाइजिंग एवं पीआर कंपनी डेंट्सू इंडिया कांग्रेस पार्टी और राहुल

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कब होगी न्यायालय की अवमानना?

पिछले अंक में हमने आपको आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

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बिहार: एसी-डीसी बिल : सीबीआई जांच की तलवार

पटना उच्च न्यायालय के बाद बिहार में एसी-डीसी बिल में 67 हज़ार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में गूंज रहा है. आम भाषा में समझें तो यह मामला खर्च के लिए सरकारी खज़ाने से निकाली गई राशि का हिसाब न देने का है. इसे लेकर सरकार पर घोटाले का शक किया जा रहा है.

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आरटीआई और तीसरा पक्ष

पिछले दो अंकों से हम लगातार आपको उन बिंदुओं के बारे में बता रहे हैं, जो सूचना के प्रकटीकरण में बाधा बनते हैं. अभी तक हमने आपको बताया कि कैसे न्यायालय की अवमानना और संसदीय विशेषाधिकार के नाम पर लोक सूचना अधिकारी सूचना न देने के लिए हज़ारों बहाने बनाते हैं और सूचना अधिकार क़ानून की धारा 8 का ग़लत इस्तेमाल करते हैं.

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न्यायालय की अवमानना और आरटीआई

पिछले अंक में हमने आपको आरटीआई और संसदीय विशेषाधिकार के बीच के संबंध के बारे में बताया था. हमने कुछ उदाहरणों के साथ यह बताया था कि कई बार जानबूझ कर और बिना किसी ठोस कारण के भी सूचना को सार्वजनिक किए जाने से रोकने की कोशिश की जाती है. ज़्यादातर मामलों में ऐसा होता है कि लोक सूचना अधिकारी मामला न्यायालय में विचाराधीन होने का तर्कदेकर सूचना नहीं देता, लेकिन इस प्रावधान का सबसे ज़्यादा दुरुपयोग किया जाता है.

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संसदीय विशेषाधिकार और आरटीआई के बीच क्या संबंध है

सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने वाले आवेदकों ने तीसरे पक्ष और न्यायालय की अवमानना जैसे शब्दों का कई बार सामना किया होगा, क्योंकि इन्हीं शब्दों की आड़ में कई बार सूचना देने से मना कर दिया जाता है.

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मलेशिया : इब्राहिम आरोपमुक्त नजीब को कड़ी चुनौती

मलेशिया के पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं प्रमुख विपक्षी नेता अनवर इब्राहिम को अपने पुरुष सहायक के साथ यौन संबंध बनाने के आरोप से मुक्त कर दिया गया है. कुआलालंपुर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जबिदीन मोहम्मद दियाह ने कहा, हालांकि न्यायालय को इस बात का शत-प्रतिशत भरोसा नहीं है कि मामले से संबंधित डीएनए रिपोर्ट के साथ कोई छेड़छाड़ की गई है

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चीन को करारा जवाब देना होगा

भारत का रवैया चीन के प्रति हमेशा दोस्ताना रहा है. भारत की हमेशा यही कोशिश रही है कि चीन के साथ उसके संबंध अच्छे हों. इसके लिए वह शुरू से ही सकारात्मक प्रयास करता रहा है, लेकिन चीन एक तऱफ तो भारत को अपना मित्र बताता है, वहीं दूसरी तऱफ उसकी हरकतें ऐसी होती हैं कि किसी भी तरह उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

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न्याय चक्र धनिकों द्वारा संचालित

न्यायालयों में न्याय होता है. कहा जाता है न्याय तो अंधा है, उसके लिए धनी-निर्धन सब बराबर हैं. न्याय के सामने किसी में भेदभाव नहीं होगा, पर वस्तुतः क्या यह सत्य है? पुस्तकों में जो भी क़ानून हैं वे ज़रूर सारे देश के लिए समान रूप से लागू हैं, पर उनका संचालन या नियमन किस ढंग से होता है, ज़रा ग़ौर कीजिए.

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महाराष्‍ट्रः हर्षवर्द्धन को हाईकोर्ट की फटकार

मुंबई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी ने सहकारिता मंत्री हर्षवर्धन पाटिल के होश उड़ा दिए हैं. स़िर्फ हर्षवर्धन पाटिल ही ऐसे मंत्री नही हैं. अगर आप मंत्रियों के वातानुकूलित कक्ष के पास से गुजरें तो आपको हर जगह एक जैसा अनुभव होगा. अधिकतर मंत्री विलासी प्रवृत्ति के होते हैं. उनकी इस प्रवृत्ति से आम आदमी अचंभित और हैरान-परेशान होता है, परंतु सत्ताधीशों को इस संदर्भ में कोई अफसोस नहीं होता.

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सुप्रीम कोर्ट में बदलाव ज़रूरी है

इस विषय के बारे में लिखने में एक अलग रोमांच है, इसलिए मैं बहुत सी ऐसी बातें यहां लिख सकता हूं, जो कि मैं उच्चतम न्यायालय में जजों के सामने बहस करते समय नहीं बोल सकता. जब बात होती है कि भारतीय न्यायपालिका के साथ क्या परेशानियां हैं तो हमें जवाब में हां या न कहना पड़ता है, लेकिन मेरा जवाब हां भी है और न भी. मैं उच्चतम न्यायालय में वर्ष 1979 से हूं.

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न्यायपालिका में पारदर्शिता ज़रूरी है

भारत की न्यायपालिका पर काम का बोझ बहुत है, जिसकी वजह से बहुत सारी परेशानियों ने जन्म लिया है. आज ज़रूरत इस बात की है कि हम इसका तोड़ निकालें. साथ ही ज़रूरत है कुछ और विषयों पर सोचने की, जैसे उच्च स्तर पर न्यायपालिका में पारदर्शिता. इसी से जुड़ा हुआ मुद्दा है न्यायपालिका की जवाबदेही का.

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हर समस्या का निस्तारण न्यायालय में संभव नहीं

भारत में जैसे ही कोई मुद्दा उठता है, लोग उसे ज्वलंत की संज्ञा प्रदान कर देते हैं. भारतीय न्याय व्यवस्था क्या है, इस बात पर आराम से बैठकर धैर्यपूर्वक चर्चा होनी चाहिए. मैं लोगों और खासकर न्यायाधीशों से कहना चाहता हूं कि भारतीय न्यायपालिका किसी भी ऐसी बीमारी से ग्रस्त नहीं है, जिसे लाइलाज कहा जा सकता है.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्‍य

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी- देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं.

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अतिक्रमण से क्‍लब का अस्तित्‍व खतरे में

समस्तीपुर ज़िला मुख्यालय में आज़ादी के पहले से चले आ रहे समस्तीपुर क्लब की क़ीमती ज़मीन पर किए गए क़ब्ज़े से इसकी हालत का़फी बदतर हो गई है. अंग्रेजी शासनकाल से ही शहर में यूरोपियन क्लब चलता था, बाद में जिसका नाम समस्तीपुर क्लब कर दिया गया.

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यह संसद और सर्वोच्च न्यायालय की परीक्षा है

अब फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है. साठ साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. बिना किसी प्रमाण के कोर्ट ने कहा है कि राम का जन्म वहां हुआ है, जहां बीस साल पहले बाबरी मस्जिद के गुम्बद थे. यह आस्था है और इसे अदालत ने प्रमाण के रूप में माना है. अगर जन्म स्थान कोर्ट मानता है तो कहीं उनका महल होगा, कहीं राजा दशरथ का दरबार होगा, कहीं तीनों महारानियों का निवास रहा होगा.

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आरटीआई और संसदीय विशेषाधिकार का पेंच

अभी तक हमने आपको तीसरे पक्ष और न्यायालय की अवमानना के बारे में बताया कि कैसे इन शब्दों का ग़लत इस्तेमाल करके लोक सूचना अधिकारी सूचना देने से मना कर देते हैं. इस अंक में हम आपको ऐसे ही एक और शब्द से परिचित करा रहे हैं. इस बार हम बात करेंगे संसदीय विशेषाधिकार के बारे में.

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कब होगी न्यायालय की अवमानना

पिछले अंक में हमने आपको तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि आगे से जब कभी भी आपको लोक सूचना अधिकारी की तऱफ से ऐसा जवाब मिले कि तीसरे पक्ष से जुड़े होने के कारण आपको अमुक सूचना नहीं दी सकती है, तब आप चुपचाप नहीं बैठ जाएंगे, बल्कि लोक सूचना अधिकारी को पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर यह समझाने की कोशिश करेंगे कि कैसे आपके द्वारा मांगी गई सूचना को सार्वजनिक करने से जनसाधारण को लाभ पहुंचेगा.

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बुंदेलखंड के पत्‍थर खदान मजदूरों का दर्द

गगनचुंबी इमारतों एवं सड़कों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पत्थर का सीना चाक करनेऔर नदी से बालू निकालने वाले मज़दूरों को दो जून की रोटी के बदले सिल्कोशिस नामक रोग मिल रहा है. विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश भाग के ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट आदि ज़िले पूरे भारत में पत्थरों के लिए प्रसिद्ध हैं.

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स्वर्णिम नहीं, भ्रष्टतम राज्य कहिए

मध्य प्रदेश में प्रत्येक नागरिक भ्रष्टाचार के बीच जन्म लेता है, भ्रष्टाचार के बीच ही पलता और बड़ा होता है और भ्रष्टाचार को भोगते हुए मर भी जाता है. लेकिन मरने के बाद भी भ्रष्टाचार से उसका पीछा नहीं छूटता. यह किसी दार्शनिक का चिंतन वाक्य नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश के नागरिकों का भोगा हुआ यथार्थ है.

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जुवेनाइल जस्टिस एक्ट : सरकार नहीं, अब अदालत बचाएगी बचपन

युवाओं का देश भारत. 40 फीसदी आबादी की उम्र 18 साल से कम. युवाओं के इस देश में 1 करोड़ 70 लाख बाल श्रमिक और 50 फीसदी बच्चे यौन हिंसा के शिकार भी. बाल श्रम रोकने और बच्चों की देख-रेख और संरक्षण के लिए क़ानून भी हैं. लेकिन फिर भी स्थिति बेकाबू है.

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