पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की

पत्रकारिता की संवैधानिक मान्यता नहीं है, लेकिन हमारे देश के लोग पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर संसद, नौकरशाही और न्यायपालिका से जुड़े लोगों से ज़्यादा भरोसा करते हैं. हमारे देश के लोग आज भी अ़खबारों और टेलीविजन की खबरों पर धार्मिक ग्रंथों के शब्दों की तरह विश्वास करते हैं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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सर्वश्रेष्ठ पत्र लेखकों का सम्मान

चौथी दुनिया उर्दू में प्रकाशित होने वाले पत्रों में से हर सप्ताह एक सर्वश्रेष्ठ पत्र को पुरस्कृत किया जाता है. पुरस्कार के रूप में उक्त पत्र के लेखक को क़ौमी काउंसिल बराए फ़रोग उर्दू द्वारा एक हज़ार रुपये की पुस्तकें प्रदान की जाती हैं.

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यूआईडीः नागरिकों के मूल अधिकारों के साथ खिलवाड़

जब लोकपाल बिल को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हज़ारे का एक दिवसीय अनशन शुरू हुआ तो उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को जनलोकपाल बिल पर बहस करने की दावत दी, लेकिन सांसदों ने यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि इस बिल पर चर्चा करने का अधिकार केवल संसद को है, सड़क पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. क्या सरकार और हमारे नेता इस बात का जवाब दे सकते हैं कि जब संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने यूआईडीएआई के चेयरमैन नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में जारी आधार स्कीम पर सवालिया निशान लगाते हुए उसे ख़ारिज करके सरकार से उस पर दोबारा ग़ौर करने के लिए कहा है तो फिर क्यों अभी तक यह कार्ड बनने का सिलसिला जारी है.

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वाराणसी सेंट्रल जेल से एक क़ैदी की चिट्ठी: मैं मर जाऊंगा या मार दूंगा

वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद धीरज शर्मा नामक एक युवक चौथी दुनिया को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाता है. आख़िर क्यों? दरअसल, ऐसी घटना एक व्यक्ति के मन में विश्वास और अविश्वास की एक साथ चल रही कहानी का ही परिणाम है.

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आपके पत्र आपके अनुभव

इस अंक में हम अपने पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं. इन पत्रों के माध्यम से हमारे पाठकों ने कुछ सुझाव मांगे है तो अपने अनुभव को भी हमसे साझा किया है. इसके अलावा, इस अंक में हमने एक आवेदन भी प्रकाशित किया है.

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