रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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बिजली संकट से हाहाकार

मुरादाबाद में बिजली कटौती के विरोध में लोगों ने रेल मार्ग बाधित कर दिया, वहीं सहारनपुर में महिलाएं सड़क पर उतर आईं. मेरठ के सरधना में लोग अपने प्रतिष्ठान बंद कर विधायक संगीत सोम के साथ मढ़ियाई बिजलीघर के सामने बैठ गए और 10 घंटे तक मेरठ-सरधना मार्ग जाम रखा. बाग़पत ज़िले के बड़ौत में जेई एवं एसएसओ को बंधक बना लिया गया.

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उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

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माया को मिटाने की मुहिम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जब शपथ ग्रहण की थी तो उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया था कि उनकी सरकार बदले की भावना से काम नहीं करेगी. बसपा शासनकाल की वे परियोजनाएं पूरी की जाएंगी, जो अधूरी हैं. अखिलेश युवा एवं ऊर्जावान हैं, उनकी कार्यशैली लोगों ने पहले कभी देखी-समझी नहीं, यही वजह थी उनकी बातें लोगों को अच्छी लगीं.

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जल संसाधन मंत्रालयः एनपीसीसी में यह क्‍या हो रहा है

जल, थल और नभ, भ्रष्टाचार के कैंसर ने किसी को नहीं छोड़ा. जहां उंगली रख दीजिए, वहीं भ्रष्टाचार का जिन्न निकल आता है. बड़े घोटालों की बात अलग है. ऐसे सरकारी संगठन भी हैं, जिनके बारे में अमूमन आम आदमी नहीं जानता और इसी का फायदा उठाकर वहां के बड़े अधिकारी वह सब कुछ कर रहे हैं, जिसे संस्थागत भ्रष्टाचार की श्रेणी में आसानी से रखा जा सकता है.

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अब क्या?

दिल्ली में कुछ दिन पहले भूकंप के झटके आए. लेकिन इससे भी बड़ा झटका एक दिन बाद आया. यह झटका उत्तर प्रदेश की राजनीति से संबंधित था. राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार को अपनी रणनीति की असफलता बताकर इसकी ज़िम्मेदारी ली. ऐसा पहली बार हुआ है कि नेहरु-गांधी परिवार के किसी व्यक्ति ने ग़लती स्वीकार की है.

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बालश्रम खत्म किया जा सकता है

भारत में 14 साल तक के बच्चों की आबादी पूरी अमेरिकी आबादी से भी ज़्यादा है. कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.6 फीसदी हिस्सा 14 साल से कम उम्र के बच्चों का है. प्रत्येक दस बच्चों में से 9 काम करते हैं. ये बच्चे लगभग 85 फीसदी पारंपरिक कृषि गतिविधियों में कार्यरत हैं, जबकि 9 फीसदी से कम उत्पादन, सेवा और मरम्मती कार्यों में लगे हैं.

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झारखंड: रेल परियोजनाओं की कछुआ चाल

खनिज संसाधनों के मामले में देश के सबसे धनी सूबे झारखंड में शायद ही ऐसी कोई योजना है, जो समय पर पूरी हुई हो. एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाने वाली योजनाएं 3 से लेकर 5 साल तक खिंच जाती हैं. योजना के लिए प्राक्कलित राशि भी दोगुनी से तीन गुनी हो जाती है. राजनीतिक अस्थिरता, सुस्त एवं भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी, असामाजिक तत्वों का हस्तक्षेप और शासन में इच्छाशक्ति का अभाव जैसे कारण इस समस्या के मूल में हैं.

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पास्‍को परियोजनाः राष्‍ट्रीय वन संपदा की खुली लूट

उड़ीसा के जगतसिंहपुर में 50 हज़ार करोड़ रुपये निवेश करने वाली दक्षिण कोरिया की कंपनी पोहंग स्टील (पास्को) के आगे केंद्र और राज्य सरकार ने अपने घुटने टेक दिए हैं. पल्ली सभा (ग्राम परिषद) के विरोध के बावजूद बीती 18 मई को पोलंग गांव में भूमि अधिग्रहण के लिए पुलिस भेज दी गई है. इससे नंदीग्राम और सिंगुर की तरह पोलंग में भी ख़ूनी संघर्ष का माहौल तैयार हो चुका है.

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महाराष्‍ट्र सरकार का कारनामाः अब प्यासे मरेंगे अमरावती के किसान

नागपुर से 150 किलोमीटर दूर अमरावती ज़िले का माजरी गांव बंजर है. राजस्थान के खेतों में यहां से ज़्यादा हरियाली है. गांव वाले बताते हैं कि यहां की खेती भगवान भरोसे है. वैसे अमरावती ज़िले के इस इलाक़े में अपर वर्धा डैम का पानी पहुंचता है, लेकिन माजरी जैसे कई गांव हैं, जहां नहर का पानी नहीं पहुंचता.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्या

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी-

देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं. सरकारी इमारतों, बांधों एवं अन्य परियोजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन के अवसर पर हिंदू कर्मकांड किए जाते हैं.

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वाईब्रेंट गुजरात का मिथक

इन दिनों यह मान्यता बहुत तेजी से फैल रही है (या फैलाई जा रही है) कि गुजरात अत्यंत द्रुत गति से प्रगति कर रहा है, वहां शांति एवं सौहार्द का राज है, अल्पसंख्यक ख़ुशहाल हैं और वह जल्दी ही देश का सबसे उन्नत राज्य बन जाएगा. शाइनिंग इंडिया की तर्ज़ पर एक नया शब्द गढ़ा गया है, वाईब्रेंट गुजरात.

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निन्‍यानबे मेगावाट विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य

आदिकाल से बाबा केदारनाथ के चरणों से निकल कर हिमालयी पर्यावरण को सिंचित करने वाली मंदाकिनी नदी की धारा पर सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना को ग्र्रहण लगाकर नदी की धारा बदलने से जनाक्रोश भड़क उठा है.

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बुंदेलखंडः केन-बेतवा नदी को जोड़ने की योजना

बुंदेलखंड में जल्द ही नदियों को जो़डने की परियोजना शुरू होने वाली है. उत्तर प्रदेश का जनपद बुंदेलखंड खनिज संपदा से भरपूर होने के बाद भी अति पिछड़ेपन से जूझ रहा है. यहां की धरती से लगभग 40,000 कैरेट हीरा निकाला जा चुका है और लगभग 14,00,000 कैरेट हीरे का भंडार मौजूद है.

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मगधः आंगनवाड़ी केंद्रों में बंदरबांट

मगध प्रमंडल में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिये बाल विकास परियोजना के तहत सरकार की ओर से चलाए जा रहे अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति का़फी दयनीय है. सारी सामग्री और तमाम सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद भी आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर नहीं बदली.

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पानी कब बनेगा चुनावी मुद्दा?

देश भर में रोज़गार मुहैया कराने वाली अति महत्वाकांक्षी परियोजना मनरेगा की सफलता प्रचार माध्यमों द्वारा गाए जाने के बावजूद गांवों से पलायन थमा नहीं है. पेयजल मिशन का यशोगान इस चुनावी माहौल में पवित्र ॠचाओं से कम सात्विक नहीं लगा, मगर इस साल भी गांव-शहर पानी की कमी से आतंकित ज़रूर रहे.

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हरीश रावत के बयान पर बिफरे निशंक

भारत सरकार के श्रम राज्य मंत्री एवं देवभूमि हरिद्वार के सांसद हरीश रावत के काशीपुर में औद्योगिक पैकेज पर दिये बयान ने उत्तराखंड की राजनैतिक ताप बढ़ा दी है. रावत ने अपने बयान में यह आरोप लगाया था कि राज्य के मुख्यमंत्री की जिद के चलते यह पैकेज प्रधानमंत्री द्वारा 2013 तक नही बढ़ाया जा सका,

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न्‍याय के लिए हम कहां जाएं

कुछ ही दिन पहले की बात है, जब सुबह-सुबह मेरे पास एक फोन आया. गुजरात के मुंद्रा समुद्र तट से मेरे एक मित्र ने फोन किया और एक ऐसा सवाल किया, जिसका जवाब हमें पहले ही मिल गया होना चाहिए था. कच्छ के मुंद्रा तटीय क्षेत्र की पारिस्थितिकीय संरचना वैसे ही कमज़ोर हो चुकी है, इसके बावजूद इस इलाक़े में 300 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट को ग़लत तरीक़े से एन्वॉयरोंमेंटल क्लियरेंस दे दिया गया. स्थानीय मछुआरे समुदायों ने इसके विरोध में अपनी सारी ताक़त लगा दी, लेकिन मेरे मित्र ने सूचना दी कि प्लांट को लेकर काम शुरू किया जा रहा है. उसने मुझसे यह भी पूछा कि मामले की अगली सुनवाई कब होनी है. मैंने उसे यह समझाने की भरपूर कोशिश की कि हम आज असहाय होकर क्यों रह गए हैं, लेकिन मेरा अंदाज़ा है कि ऐसी परिस्थितियों से रूबरू लोगों को समझाना खासा मुश्किल होता है, खासकर यदि वे ऐसी परियोजनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हों. मैं उसे यह कैसे समझा सकती थी कि थर्मल प्लांट को पर्यावरणीय क्लियरेंस दिए जाने के ख़िला़फ जिस संस्थान में मामला दर्ज किया गया है, वह अब अस्तित्व में ही नहीं है. फिर उन्हें यह भी कैसे समझाया जा सकता है कि पुराने निकाय की जगह जिस नए निकाय का गठन किया जाना है और जहां इस मामले की सुनवाई होनी है, उसका गठन अभी तक नहीं किया गया है.

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यूनिक आइडेंटिफिकेशन: आधार पर आशंकाएं

यूपीए सरकार ने देश के सभी निवासियों को एक विशिष्ट पहचान नंबर यानी यूनिक आइडेंटिफिकेशन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हाल में पश्चिमी महाराष्ट्र के आदिवासी इलाक़े तेंभली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 आदिवासियों को 12 अंकों वाले विशिष्ट पहचान नंबर की योजना आधार सौंप कर इसकी शुरुआत की.

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माइनिंग एक्‍ट में बदलावः यह सिर्फ सरकार का दिखावा है

माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में बदलाव के लिए मंत्रीस्तरीय समिति की स़िफारिशें सरकार के इरादों की पोल खोलकर रख देती हैं. खनन कंपनियों के मुना़फे का 26 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र एवं स्थानीय वाशिंदों के विकास के लिए अलग रखने का प्रस्ताव हो या डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन का गठन संबंधी सुझाव, गहराई में जाकर देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार आदिवासियों और ग़रीब किसानों का हितैषी होने का केवल दिखावा भर करना चाहती है.

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पॉस्को परियोजना: घपलेबाज़ी की अंतहीन कहानी

उड़ीसा में 54000 करोड़ के निवेश से स्टील प्लांट लगाने को प्रयासरत पॉस्को कंपनी की अनैतिक कार्रवाइयों की लिस्ट का़फी लंबी है. प्लांट के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस में घपलेबाज़ी की बात अभी पुरानी भी नहीं हुई थी कि एक और मामला सामने आ गया. स्थानीय लोगों के प्रतिरोध का समर्थन कर रहे सिविल सोसायटी समूहों ने यह खुलासा किया कि पॉस्को ने खनन कार्य के लिए क्लियरेंस नहीं लिया है.

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रांची-कोडरमा रेल परियोजनाः भूमिगत आग और भू-धसान के खतरे से बेखबर सरकार

झारखंड की सबसे बड़ी रेल परियोजना पर भूमिगत आग और भू-धसान का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन रेल मंत्रालय एवं झारखंड सरकार के कानों पर जू नहीं रेंग रही. आज़ादी के बाद से ही झारखंड के सबसे पुराने ज़िले हज़ारीबाग को रेल लाइन से जोड़ने की ज़ोरदार मांग उठती रही है, क्योंकि हज़ारीबाग देश का अकेला प्रमंडलीय मुख्यालय है, जो रेल लाइन से अभी तक जुड़ा नहीं है.

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पॉस्‍को परियोजनाः विरोध और स्‍वीकृतियों का इतिहास

कई बार कुछ खास तारीखें इतिहास में अहम बनकर रह जाती हैं. 28 जुलाई, 2010 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मौजूदा दौर की सबसे ज्यादा विवादित रही औद्योगिक परियोजनाओं में से एक के प्रस्तावित स्थल पर अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य वनवासियों के फॉरेस्ट राइट्‌स एक्ट 2006 के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया.

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बैकफुट पर निशंक सरकार

उत्तराखंड सरकार ने विवादित जल विद्युत परियोजना रद्द कर दी है. सरकार के इस फैसले से विपक्ष खासा नाराज़ है. इसके पहले विपक्ष ने सदन के अंदर और बाहर आरोप लगाया था कि 54 जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन में मुख्यमंत्री निशंक एवं उनकी सरकार के हाथ भ्रष्टाचार में सने हुए हैं.

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मशान जलाशय परियोजना अधर में

पश्चिम चंपारण के रामनगर में स्थित मशान नदी पर इस जलाशय परियोजना का निर्माण कार्य ब्रिटिश काल से ही चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है. त्रासदी यह कि इसमें पानी के सिवाय सब कुछ है. विकास और विश्वास का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

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सार-संक्षेप: बिरला अस्पताल पानी के विवाद में उलझा

पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे सतना शहर में पलायन ज़ोरों पर है. पानी की एक-एक बूंद के लिए खूनी संघर्ष हो रहे हैं पर नगर निगम सतना शहर के प्रभावशील संस्थान को सात रुपये प्रति हज़ार लीटर की दर से पानी बेचने का सौदा कर चुका है. बिरला अस्पताल देश के प्रसिद्ध औद्योगिक परिवार से संबंद्ध है.

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उत्तराखंड में बिजली संकट गहराया

देश की अति महत्वाकांक्षी टिहरी बांध परियोजना में लगातार गिरते जलस्तर से किसी भी क्षण विद्युत उत्पादन ठप होने की आशंका बढ़ती जा रही है. इस बांध में अब विद्युत उत्पादन के लिए मात्र छह मीटर जल शेष रह गया है. जानकारों का मानना है कि अब तो सब कुछ मानसून पर ही निर्भर है.

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प्रजातंत्र जीतेगा या कमलनाथ

उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाले उत्तर-दक्षिण गलियारे का भविष्य केंद्रीय मंत्री कमलनाथ की जिद के कारण खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है. व्यक्तिगत लाभ के लिए व्यास नदी की धारा को मोड़ने वाले कमलनाथ अब विशेषज्ञों द्वारा स्वीकृत उत्तर-दक्षिण गलियारे को अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा की ओर मोड़ना चाहते हैं.

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महेश्‍वर नर्मदा जल परियोजनाः केंद्र और राज्‍य आमने-सामने

महेश्वर नर्मदा जल परियोजना को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में तनातनी चल रही है. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर इस पर आगे काम बंद करने के निर्देश दिए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भड़क उठे. उन्होंने प्रधानमंत्री को मध्य प्रदेश के विकास के प्रति अनुदार और संवेदनहीन बताया. लेकिन, सच्चाई मुख्यमंत्री को भी मालूम है.

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