कई देशों में सत्ता परिवर्तन कर चुका है सीआईए

भारत में फोर्ड फाउंडेशन द्वारा पोषित और संचालित  संगठनों और उससे जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं को बड़ी इज्जत दी जाती है.

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जननायक को समझने की कोशिश

पत्रिका परिषद साक्ष्य का यह नया अंक है. बिहार विधान परिषद की यह अनियतकालीन वैचारिक-साहित्यिक पत्रिका तक़रीबन पंद्रह वर्षों से

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उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

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रसायनों का ज़्यादा इस्तेमाल नुक़सानदेह है

जब भी देश के विकास की बात होती है, तो उसमें हरित क्रांति का ज़िक्र ज़रूर होता है. यह ज़िक्र लाज़मी भी है, क्योंकि हरित क्रांति के बाद ही देश सही मायने में आत्मनिर्भर हुआ. देश में कृषि की पैदावार बढ़ी, लेकिन हरित क्रांति का एक स्याह पहलू और भी है, जो अब धीरे-धीरे हमारे सामने आ रहा है.

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एयर कंडीशनर वाला पौधा

केरल में एक ऐसे पौधे का पता चला है, जो भीषण गर्मी में भी अपने पत्तों से पानी की बूंदें टपकाता रहता है. इस पौधे को घर की छत पर लगाना खासा फायदेमंद हो सकता है. पौधे के कई औषधीय गुण भी हैं. बेल वाले इस पौधे को मलयालम में थिपाचा कहा जाता है.

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पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर टकराव

भारत का समाजवादी लोकतंत्र प्रतिनिधित्व की राजनीति में अच्छी तरह रचा-बसा है. यहां विशेषज्ञों की सभा और समिति के बारे में आमतौर पर यह माना जाता है कि वे स्थितियों को बेहतर ढंग से समझते हैं. बनिस्बत उनके जो ऐतिहासिक तौर पर सत्ता प्रतिष्ठान में निर्णायक भूमिका रखते हैं. यह सब एक प्रक्रिया के तहत होता है. इसमें प्राथमिकताएं सुनिश्चित होती हैं, योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है और विकास के रास्ते तैयार किए जाते हैं.

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इंडिया इन ट्रांजिशनः अलंग के लिए आईएमओ की शिप डंपिंग पॉलिसी : यूरोप का दोहरा रवैया

अभी वैश्विक स्तर पर यह मुहिम चल रही है कि पर्यावरण के नुक़सान को किस तरह से कम किया जाए. विकसित देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति का़फी गंभीर हैं. लेकिन उनकी कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है. जिस तरह से जहाज़ तो़डने के लिए दक्षिण एशिया की बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे तो ऐसा ही लगता है.

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राज कुमार निदेशक बने

1989 बैच के आईडीएसई अधिकारी राज कुमार को शहरी विकास मंत्रालय में निदेशक बनाया गया है. वह अशोक कुमार सरोहा की जगह लेंगे.

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दूध पीजिए नहीं, पहनिए

जर्मनी में दूध से बने हुए कपड़े जल्द ही बाज़ार में आने वाले हैं. ये त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हैं. जर्मन डिज़ाइनर की इस नई रचना को अवॉर्ड भी दिया गया है. 28 साल की आंके डोमास्के ने दूध से कपड़े तैयार किए हैं.

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राजीव जेएस बने

1982 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव शर्मा को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है.

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दिल्‍ली का बाबूः जयंती और जंगल में सुधार

वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन को मंत्रालय संभाले अभी करीब दो महीने हुए हैं, लेकिन उन्होंने विभाग के भ्रष्ट बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. उन्होंने इस बीच तीन वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. वन विभाग के महानिरीक्षक सी डी सिंह, जो वन सलाहकार समिति (एफएसी) में भी थे, का तबादला कर दिया गया.

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लद्दाख का बदलता पर्यावरण

प्रदूषण वायु, जल और धरती की भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं का एक ऐसा अवांछनीय परिवर्तन है, जो जीवन को हानि पहुंचा सकता है. दुनिया भर में हो रहे तथाकथित विकास की प्रक्रिया ने प्रकृति एवं पर्यावरण के सामंजस्य को झकझोर दिया है. इस असंतुलन के चलते लद्दा़ख जैसे सुंदर क्षेत्र भी प्रदूषण जैसी समस्या से प्रभावित हुए हैं.

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छत्तीसगढ़ः हवाओं में प्रदूषण का ज़हर

छत्तीसगढ़ ने राज्य बनने के बाद पिछले दस सालों में खूब तरक्क़ी की है. आज छत्तीसगढ़ की कई योजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के पीडीएस सिस्टम को सभी राज्यों में लागू करने की सलाह दी है, लेकिन दूसरी ओर प्रदूषण के मामले में भी छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे अव्वल नंबर पर पहुंचता जा रहा है.

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सूरमा देश का पहला वनग्राम बनाः अब बाघ और इंसान साथ रहेंगे

उत्तर प्रदेश के खीरी ज़िले का सूरमा वनग्राम देश का ऐसा पहला वनग्राम बन गया है, जिसके बाशिंदे थारू आदिवासियों ने पर्यावरण बचाने की जंग अभिजात्य वर्ग द्वारा स्थापित मानकों और अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित वन विभाग से जीत ली है. बड़े शहरों में रहने वाले पर्यावरणविदों, वन्यजीव प्रेमियों, अभिजात्य वर्ग और वन विभाग का मानना है कि आदिवासियों के रहने से जंगलों का विनाश होता है, इसलिए उन्हें बेदख़ल कर दिया जाना चाहिए.

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भारत में जापान से ज्‍यादा खतरनाक भूकंप आ सकते हैं

जापान में सुनामी से हुई तबाही पूरी दुनिया ने देखी. कुछ लोगों ने टेलीविज़न पर तो कुछ लोगों ने अपनी आंखों से. भारत में इस तरह के भयंकर मंज़र अभी तक देखे नहीं गए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में इस तरह की तबाही नहीं आ सकती है. दरअसल हम लोग ग़फलत में जी रहे हैं.

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बीटी बीज यानी किसानों की बर्बादी

संप्रग सरकार की जो प्रतिबद्धता किसान और खेती से जुड़े स्थानीय संसाधनों के प्रति होनी चाहिए, वह विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रति दिखाई दे रही है. इस मानसिकता से उपजे हालात कालांतर में देश की बहुसंख्यक आबादी की आत्मनिर्भरता को परावलंबी बना देने के उपाय हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः अवज्ञा की सज़ा

हिमाचल प्रदेश में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीषा श्रीधर पर लगे अवज्ञा के आरोप का मुद्दा इन दिनों यहां के बाबुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. राज्य सरकार ने 1984 बैच की इस अधिकारी के खिला़फ जांच शुरू कर दी है.

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सशर्त क्लियरेंस से नहीं थमेगा विनाश

यह बात कितनी महत्वपूर्ण है और इसकी फिक्र किसे है कि पिछले सत्र के दौरान भारतीय संसद ने एक अलग ही इतिहास रचा. पिछले सत्र के दौरान लोकसभा ने महज़ 7 घंटे ही काम किया. यह सब कुछ ऐसे समय के बाद हुआ, जब पर्यावरण और कृषि से जुड़े कुछ अत्यंत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे.

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आगराः जल संकट और सरकारी भ्रष्‍टाचार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश आज जल संकट की ज़बरदस्त मार झेल रहा है. यहां आज पीने और कृषि दोनों के लिए पानी की कमी है. जब पीने को पानी नहीं रहेगा और न ही कृषि के लिए, तो जनजीवन का क्या होगा? आज इसी सवाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता दो-दो हाथ कर रही है.

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निन्‍यानबे मेगावाट विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य

आदिकाल से बाबा केदारनाथ के चरणों से निकल कर हिमालयी पर्यावरण को सिंचित करने वाली मंदाकिनी नदी की धारा पर सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना को ग्र्रहण लगाकर नदी की धारा बदलने से जनाक्रोश भड़क उठा है.

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न्‍याय के लिए हम कहां जाएं

कुछ ही दिन पहले की बात है, जब सुबह-सुबह मेरे पास एक फोन आया. गुजरात के मुंद्रा समुद्र तट से मेरे एक मित्र ने फोन किया और एक ऐसा सवाल किया, जिसका जवाब हमें पहले ही मिल गया होना चाहिए था. कच्छ के मुंद्रा तटीय क्षेत्र की पारिस्थितिकीय संरचना वैसे ही कमज़ोर हो चुकी है, इसके बावजूद इस इलाक़े में 300 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट को ग़लत तरीक़े से एन्वॉयरोंमेंटल क्लियरेंस दे दिया गया. स्थानीय मछुआरे समुदायों ने इसके विरोध में अपनी सारी ताक़त लगा दी, लेकिन मेरे मित्र ने सूचना दी कि प्लांट को लेकर काम शुरू किया जा रहा है. उसने मुझसे यह भी पूछा कि मामले की अगली सुनवाई कब होनी है. मैंने उसे यह समझाने की भरपूर कोशिश की कि हम आज असहाय होकर क्यों रह गए हैं, लेकिन मेरा अंदाज़ा है कि ऐसी परिस्थितियों से रूबरू लोगों को समझाना खासा मुश्किल होता है, खासकर यदि वे ऐसी परियोजनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हों. मैं उसे यह कैसे समझा सकती थी कि थर्मल प्लांट को पर्यावरणीय क्लियरेंस दिए जाने के ख़िला़फ जिस संस्थान में मामला दर्ज किया गया है, वह अब अस्तित्व में ही नहीं है. फिर उन्हें यह भी कैसे समझाया जा सकता है कि पुराने निकाय की जगह जिस नए निकाय का गठन किया जाना है और जहां इस मामले की सुनवाई होनी है, उसका गठन अभी तक नहीं किया गया है.

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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण और पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी विवादों को सही समय पर निपटाने के लिए आख़िरकार हमारे देश में भी अलग से पर्यावरण अदालत की स्थापना हो गई है. पिछले दिनों पर्यावरण और वन राज्यमंत्री जयराम रमेश ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के गठन की जब औपचारिक घोषणा की तो भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जहां पर्यावरण संबंधी मामलों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यायाधिकरण होते हैं.

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पैनासोनिक का इकोज कूल अभियान

युवाओं को पर्यावरण के प्रति सचेत करने के लिए पैनासोनिक ने इकोज कूल नामक एक कार्यक्रम चलाया है. इस कार्यक्रम के तहत देश भर के क़रीब 100 स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा. यह कार्यक्रम दिल्ली और चंडीगढ़ में क्रमश: 14 सितंबर और 7 अक्टूबर को शुरू हुआ और फरवरी 2011 तक चलेगा.

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साउथ ब्‍लॉकः मलय दूरसंचार में

लंबी प्रतीक्षा और खोज का सिलसिला आख़िरकार आईएएस अधिकारी मलय श्रीवास्तव के नाम पर जाकर ख़त्म हुआ. दूरसंचार विभाग में संयुक्त सचिव का पद पिछले दो महीने से खाली था. मलय को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया. वह 1990 बैच के अधिकारी हैं.

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