पितृपक्ष मेला-2018 आधी-अधूरी तैयारी के बीच तीर्थयात्री करेंगे पिंडदान

पितरों के प्रति श्रद्धा निवेदित करने और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए प्रतिवर्ष गया में पितृपक्ष मेला लगता है. लेकिन

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शरीर में पानी की कमी होने पर नजर आते है ये संकेत

सभी जानते है कि पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. सर्दी हो या गर्मी किसी भी मौसम

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अगर ऐसे पीते हैं पानी तो बदल डाले ये आदत, हो जाएगी किडनी खराब

ज्यादा से ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है. शरीर में पानी की कमी की वजह से शरीर में

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सोने से पहले पानी पीने के फायदे जानेगे तो आज से ही हो जाएंगे शुरू

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : पानी पीना सेहत के लिए लाभदायक होता है. सही मात्र में पानी पीने से हमारे

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

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गर्मियों में त्वचा की देखभाल कैसे करें : सनस्क्रीन

ऐसे तो इसकी आवश्यकता पूरे वर्ष पड़ती है, लेकिन इसका इस्तेमाल गर्मियों में अधिक किया जाता है. अपनी त्वचा का

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केजरीवाल का असहयोग आंदोलन : …ताकि राजनीति जनता के लिए हो

बिजली और पानी के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों दिल्ली के सुंदरनगरी इला़के

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

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भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.

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शेखावाटी के किसानों को मोरारका फ़ाउंडेशन की देन: कम पानी और मिट्टी के बिना खेती कैसे करें

पानी हमारे जीवन की मूल्यवान वस्तु है. जल के बिना हम जीवन का तसव्वुर भी नहीं कर सकते. आज विश्व के हर कोने में पानी का अभाव होने लगा है. पानी के स्रोत तेजी से घटते जा रहे हैं. यह समस्या इतनी जटिल होती जा रही है कि अब लोग यह तक कहने लगे हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर होगा.

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पीलिया और मकोय की पत्ती

अगर आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है.

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लद्दाख का बदलता पर्यावरण

प्रदूषण वायु, जल और धरती की भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं का एक ऐसा अवांछनीय परिवर्तन है, जो जीवन को हानि पहुंचा सकता है. दुनिया भर में हो रहे तथाकथित विकास की प्रक्रिया ने प्रकृति एवं पर्यावरण के सामंजस्य को झकझोर दिया है. इस असंतुलन के चलते लद्दा़ख जैसे सुंदर क्षेत्र भी प्रदूषण जैसी समस्या से प्रभावित हुए हैं.

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मैली हो गई पतित पावनी सरयू नदी

अयोध्या-खिफैज़ाबाद शहरों को अपने आंचल में समेट, युगों-युगों से लोगों को पुण्य अर्जन कराती सरयू नदी की कोख भी अब मैली हो चली है. सरयू का पवित्र जल तो दूषित हुआ ही, भूजल में भी हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ती जा रही है. दोनों शहरों के क़रीब दो दर्जन इंडिया मार्का हैंडपंपों में नाइट्रेट, आयरन आदि तत्वों की अधिकता पाई गई है.

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मरती नदियां, उजड़ता बुंदेलखंड

चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.

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सदी की सबसे बड़ी खोज का दावाः पानी से चलेगी गाड़ी!

भविष्य की सबसे शानदार कल्पनाओं में से एक है पानी से गाड़ी का चलना. लेकिन जिस तरह से ऊर्जा को लेकर मारामारी मची है, उसे देखते हुए यह कल की कल्पना से ज़्यादा आज की ज़रूरत महसूस होती है. सोचिए, कितना अच्छा हो कि पूरी दुनिया की इस ज़रूरत को हम पूरा करें. क्या ऐसा मुमकिन है? आज पूरी दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट के दौर से गुज़र रही है.

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एलजी का नया वाटर प्यूरिफायर

इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्‌स की जानी मानी कंपनी एलजी ने अपना नया वाटर प्यूरिफायर लांच किया है. यह काफी एडवांस्ड तकनीक से बना है जो पानी को अति शुद्ध करने में मददगार साबित होगा. यह गुणों में बेहतर तो है ही साथ ही परंपरागत वाटर प्यूरिफायर की अपेक्षा ज़्यादा ख़ूबसूरत भी है.

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पानी पर सबका हक़ है

जल ही जीवन है. वाक़ई पानी के बिना ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन अ़फसोस की बात यह है कि जहां एक तऱफ करोड़ों लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, वहीं इतने ही लोग ज़रूरत से ज़्यादा पानी का इस्तेमाल करके इसे बर्बाद करने पर आमादा हैं. जब हम पानी पैदा नहीं कर सकते तो फिर हमें इसे बर्बाद करने का क्या हक़ है?

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महाराष्‍ट्र सरकार का कारनामाः अब प्यासे मरेंगे अमरावती के किसान

नागपुर से 150 किलोमीटर दूर अमरावती ज़िले का माजरी गांव बंजर है. राजस्थान के खेतों में यहां से ज़्यादा हरियाली है. गांव वाले बताते हैं कि यहां की खेती भगवान भरोसे है. वैसे अमरावती ज़िले के इस इलाक़े में अपर वर्धा डैम का पानी पहुंचता है, लेकिन माजरी जैसे कई गांव हैं, जहां नहर का पानी नहीं पहुंचता.

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घटता पानी, बढ़ती प्यास

बेतवा, शहजाद, केन, धसान, मंदाकिनी, यमुना, जामनी, एवं सजनाम जैसी सदा नीरा नदियां होने के बावजूद पानी के लिए तरस रहे लोगों के दर्द को समझना बड़ा कठिन है. बुंदेलखंड में जल युद्ध होने से कोई रोक नहीं सकता.

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गंगा मैली हो गई

एक तऱफ सरकार नदियों की स़फाई और उनके पुनरुद्धार के लिए अरबों रुपये ख़र्च कर रही है, वहीं दूसरी तऱफ नदियों को मिटाने वाले तमाम काम भी अंजाम दिए जा रहे हैं. विकास के नाम पर हम प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ः फ्लोरेसिस ने पांव पसारे, सरकार बेखबर

बस्तर अंचल के संभाग मुख्यालय जगदलपुर से 47 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य ग्राम बाकेल की आबादी 25 हज़ार है. दूषित पानी की आपूर्ति के चलते इस गांव के 72 लोग फ्लोरेसिस नामक ख़तरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, पीड़ितों में महिलाओं और बच्चों की संख्या ज़्यादा है.

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