पत्थर भी ब्रह्म स्वरूप

सृजनकर्ता ने सृष्टि की रचना में तीन चीज़ों को मिलाया- अविनाशी आत्मा (या आत्म तत्व), नश्वर माया और जुड़ने या बिछुड़ने वाली कला. सृष्टि के हर अंग-प्रत्यंग में ये तीनों अनिवार्य रूप से उपस्थित रहते हैं. यानी आत्मा, सृष्टि के समस्त पदार्थों में विराजमान है.

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