दिल्ली का बाबू : क्यों बदला मन?

गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आजकल देश भर में रैलियों को संबोधित करने

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किश्तवाड़ दंगा : कैसे पटेगी सांप्रदायिकता की खाई

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में पिछले दिनों ईद के दिन निकले जुलूस के दौरान उपद्रव और नमाज़ पढ़ते लोगों पर पथराव

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जब तोप मुक़ाबिल हो : अब पार्टी उम्मीदवार नहीं, जन उम्मीदवार

लोकसभा चुनावों के बाद की स्थिति की बात करें, तो कांग्रेस का नेता कौन होगा, यह तय है. राहुल गांधी

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बंद हो कमोडिटी एक्सचेंज

कमोडिटी एक्सचेंज को अर्थशास्त्री सट्टा बाज़ार मानते हैं, क्योंकि वहां लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ खिलवाड़ किया जाता है.

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किसानों की मूल समस्याओं की उपेक्षा

पिछले दिनों वर्ष 2013-14 का बजट वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पेश किया. मीडिया से लेकर अर्थशास्त्रियों की पैनी नज़र

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इस बार का बजट लोकलुभावन नहीं होगा

देश की तरक्क़ी आम जनता को हाशिए पर रखकर नहीं हो सकेगी, इसलिए वित्त मंत्री चिदंबरम को आम लोगों को

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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. इससे भी बड़ा परिचय उनका यह है कि वह सांसद हैं. ऐसे-वैसे सांसद नहीं, बल्कि संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. वह देश में क़ानून बनाने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली केंद्र हैं.

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सरकार की यह कैसी लाचारी है

गृह मंत्री पी चिदंबरम प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और उनके पिछलग्गू बने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल गृहमंत्री. पी चिदंबरम ने अपनी मंशा में कामयाब होने की खातिर ज़रिया बनाया है देश की ख़ु़फिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी को. गृह मंत्री पी चिदंबरम प्रधानमंत्री बनने को इस क़दर उतावले हैं कि उन्हें न तो अपनी पार्टी, न सरकार की परवाह है और न देश की आंतरिक सुरक्षा की.

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दिल्‍ली का बाबूः गुजरात सरकार की नई परेशानी

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपीए सरकार के बीच तकरार होती रहती है. एक नया विवाद तब सामने आया, जब गुजरात के पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि वह गुजरात में डीजीपी नियुक्त करने के लिए हस्तक्षेप करें. गुजरात में पिछले सितंबर से डीजीपी का पद खाली पड़ा है.

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आतंकवादः भगवा, हरा या काला?

क्‍या आतंकवाद पर कोई लेबिल चस्पा किया जा सकता है? क्या आतंकवाद को किसी रंग से जोड़ा जा सकता है, विशेषकर किसी ऐसे रंग से, जो समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हो? इस बहस की शुरुआत हुई केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के एक वक्तव्य से.

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कांग्रेस के युवराज का नया राजनीतिक पैंतरा

क्‍या राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के ख़िला़फ अभियान छेड़ दिया है? स्पष्ट शब्दों में कहें तो कांग्रेस के युवराज, जिन्हें उनके कई समर्थक भगवान कृष्ण के आधुनिक अवतार के रूप में देखते हैं, ने कहीं कांग्रेस-नीत सरकार के स्थापित सत्ता केंद्रों को चुनौती देना शुरू तो नहीं कर दिया है? ऐसा सत्ता केंद्र, जिसके शीर्ष पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके गृह मंत्री पी चिदंबरम बैठे हुए हैं.

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विदेशों में नोट छपाई का गलत फैसला: चिदंबरम और आरबीआई ने देश को धोखे में रखा

हज़ारों करोड़ रुपये का तेलगी स्टांप पेपर घोटाला इस बात का सबूत था कि स्टांप पेपर छपाई की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकारी मशीनरी कितनी लापरवाह थी. तेलगी द्वारा छापे गए स्टांप पेपर नकली थे, इसकी पहचान कर पाने में सालों लग गए थे.

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दो डीजीपी की जंग में शहीद हो रहे जवान

नक्सलवाद को नेस्तनाबूद करने की ख़ातिर छत्तीसगढ़ में तैनात किए गए दो पुलिस महानिदेशक नक्सलियों को मटियामेट करने के बजाय आपस में ही धींगामुश्ती कर रहे हैं. नक्सलियों का सफाया करने की जगह उनमें इस बात की होड़ मची है कि नक्सलियों के ख़िला़फ चल रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट की डोर किसके हाथ रहे और इसका सेहरा किसके सिर बंधे.

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गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

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दिल्‍ली का बाबू : शीर्ष पुलिस अधिकारी मुश्किल में

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्रालय एक बार फिर टकराव के रास्ते पर हैं. आंतरिक सुरक्षा पर गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रशंसा करने के बावजूद मोदी के साथ गृह मंत्रालय के तल्ख रिश्तों में कोई कमी नहीं आई है.

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जो बोलेगा, सो झेलेगा

हिंदी के मशहूर लेखक एवं नाटककार मुद्राराक्षस बेहद गुस्से में थे. आक्रामक मुद्रा और तीखे स्वरों में लगभग चीखते हुए उन्होंने सवाल किया कि यह देश किसका है, किसके लिए है. हत्यारे, लुटेरे, बलात्कारी, दलाल, तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं. मुसलमानों का क़त्लेआम कराने वाला आदमी गुजरात का मुख्यमंत्री है. बाल ठाकरे मुसलमानों की हत्या किए जाने की लगातार अपील करता है और केंद्रीय मंत्री बेशर्म होकर उसके दरवाज़े मत्था टेकने पहुंच जाता है. लेकिन जो इस देश और देश की जनता को बचाने के लिए जुटते हैं, उन्हें देशद्रोही की कतार में खड़ा कर दिया जाता है.

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जन सुनवाई का सामना क्यों जरूरी?

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल नरसिंहन ने कभी नहीं चाहा कि केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम सात जनवरी की दंतेवाड़ा जन सुनवाई में हिस्सा लें. इस बात का गवाह है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा गया उनका वह पत्र, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से यह कहा कि गृहमंत्री जैसे अति विशिष्ट शख्स के दौरे से माओवादियों के ख़िला़फ जारी अभियान में रुकावट पैदा होगी.

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तेलंगाना की नाकामयाबी

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बीती 9 दिसंबर को एक अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग पर सरकार की स्वीकृति की घोषणा की थी. इस घोषणा ने राजनीतिक भूचाल ही खड़ा कर दिया. राज्य को बांटने के मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े विधायकों ने विरोध में सामूहिक तौर पर पद से त्यागपत्र दे दिया.

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इंसाफ की आवाज पर पाबंदी

चिंता यह कि ऑपरेशन ग्रीन हंट की धमक ने आदिवासियों को आतंक और असुरक्षा के गहरे अंधेरे में धकेल देने का काम किया है. नतीजा यह कि विस्थापन की भगदड़ बेतहाशा फैल रही है, गांव के गांव उजड़ रहे हैं.

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खुल गया विवादों का पिटारा

राजनीति के पब्लिक स्कूल में पढ़ाई का बस एक ही विषय है घटना. केंद्र के राजनेताओं ने चुप्पी साध कर विवाद को सुलगने दिया. पांच वर्षों के दौरान मिली दो कामयाबी से वे आश्वस्त हैं कि विलंब ही निदान है. इस विलंब के चेतावनी संकेत को आप कमतर न आंके. जब आपको विभाजन और एकता जैसी असंगत मांगों पर चलना होता है तो टालमटोल हमेशा से एक विकल्प रहा है.

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राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा पर सरकार का रवैया

भारत अगले साल राष्ट्र मंडल खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. राजधानी दिल्ली में होने वाले इन खेलों के लिए हर लिहाज़ से चौकसी बरती जा रही है, क्योंकि भारत आतंकियों के लिए पहले से ही एक सॉफ्ट टारगेट बना हुआ है और मुंबई व दिल्ली समेत कई बड़े शहर उनकी हिटलिस्ट में शामिल हैं. ऐसे में सरकार सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

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